‘जीता तो शिक्षकों को 7वां वेतनमान दिलाना जनसुराज की जिम्मेदारी’:समस्तीपुर में प्रशांत किशोर बोले- जाति, धर्म और पैसे के आधार पर किसी को वोट न दें

‘जीता तो शिक्षकों को 7वां वेतनमान दिलाना जनसुराज की जिम्मेदारी’:समस्तीपुर में प्रशांत किशोर बोले- जाति, धर्म और पैसे के आधार पर किसी को वोट न दें

जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने कहा कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में जन सुराज के उम्मीदवार जीतकर आते हैं तो बिहार के शिक्षकों को सातवां वेतनमान दिलाना जन सुराज की जिम्मेदारी होगी। वे गुरुवार देर शाम समस्तीपुर में आयोजित शिक्षक संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। प्रशांत किशोर ने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव से पहले शिक्षकों को सातवां वेतनमान दिलाने की दिशा में प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए शिक्षकों को संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करनी होगी। उन्होंने शिक्षकों से जाति, धर्म और पैसे के आधार पर एनडीए या महागठबंधन को वोट देने से बचने की अपील की। उन्होंने कहा, “जब तक शिक्षक जाति-धर्म और लालू- मोदी के नाम पर वोट करते रहेंगे, तब तक सरकार उन्हें ठगती रहेगी।” वित्त रहित शिक्षकों की समस्याओं का समाधान करने की बात प्रशांत किशोर ने कहा कि वित्त रहित शिक्षकों की समस्याओं का समाधान पिछले तीन दशक से नहीं हुआ है। जन सुराज इन समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास करेगा। उन्होंने कहा कि बिना वेतन के बिहार में हजारों शिक्षक सेवानिवृत्त हो गए। उन्होंने कहा कि जो शिक्षक अभी कार्यरत हैं, उन्हें समान काम के लिए समान वेतन कैसे मिले, इसका रास्ता निकाला जाएगा। हर एमएलसी क्षेत्र में रोजगार योजना शुरू करने का दावा प्रशांत किशोर ने कहा कि दरभंगा निर्वाचन क्षेत्र समेत बिहार के किसी भी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज के उम्मीदवार जीतते हैं तो बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में युवाओं को रोजगार देने के लिए शुरू की गई योजना की तरह अन्य एमएलसी क्षेत्रों में भी योजना शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि शिक्षक संवाद के दौरान शिक्षकों को बताया गया कि यह चुनाव सरकार बनाने या गिराने का चुनाव नहीं है। यह अपनी शक्ति दिखाने और सरकार को संदेश देने का चुनाव है। सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए शिक्षकों को अपनी ताकत दिखानी होगी। प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर लोग बिहार में बेहतर व्यवस्था और युवाओं के लिए रोजगार चाहते हैं तो जन सुराज को एक बार मौका दें। ‘SIR को लेकर विरोध बहुत पहले शुरू होना चाहिए था’ पत्रकारों से बातचीत में प्रशांत किशोर ने SIR और कथित वोट चोरी को लेकर विपक्षी दलों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर कहा कि यह मांग विपक्षी दलों की ओर से बहुत पहले उठाई जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पिछले 8-10 वर्षों में चुनावी प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा वर्ग सवाल उठाता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में मनमुताबिक ऑब्जर्वर भेजे जा रहे हैं, जिससे सत्तारूढ़ दलों को मदद मिलती है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग भी की। प्रशांत किशोर ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें एचडीएफसी बैंक का चेयरमैन बनाया गया, जिससे लोगों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है।उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यशैली में व्यापक सुधार की जरूरत है और जन सुराज इसके पक्ष में है। ‘बिहार में जन सुराज चुनाव आयोग का भुक्तभोगी’ प्रशांत किशोर ने दावा किया कि बिहार में जन सुराज भी चुनाव आयोग की कार्यशैली का भुक्तभोगी रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले करीब डेढ़ करोड़ मतदाताओं को 10-10 हजार रुपए देकर वोट खरीदे गए, लेकिन चुनाव आयोग मूकदर्शक बना रहा। उन्होंने कहा कि अगर चुनाव आयोग में व्यापक सुधार नहीं होता है तो सभी विपक्षी दलों को चुनाव के बहिष्कार पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने का कोई औचित्य नहीं है। फरक्का जलसंधि पर JDU के ‘नीतीश संवाद’ पर निशाना फरक्का जलसंधि को लेकर JDU की ओर से चलाए जा रहे ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम पर प्रशांत किशोर ने कहा कि जब सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने थे, तब उन्होंने कहा था कि अब बिहार को गुजरात से चलाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि गुजरात के लोग अब ऐसी बातें नहीं चाह रहे हैं, इसलिए उनके सिपहसालार इस तरह की बातें करने लगे हैं। उन्होंने कहा कि अमित शाह और नरेंद्र मोदी जो चाहते हैं, वही JDU कर रही है। जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने कहा कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में जन सुराज के उम्मीदवार जीतकर आते हैं तो बिहार के शिक्षकों को सातवां वेतनमान दिलाना जन सुराज की जिम्मेदारी होगी। वे गुरुवार देर शाम समस्तीपुर में आयोजित शिक्षक संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। प्रशांत किशोर ने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव से पहले शिक्षकों को सातवां वेतनमान दिलाने की दिशा में प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए शिक्षकों को संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करनी होगी। उन्होंने शिक्षकों से जाति, धर्म और पैसे के आधार पर एनडीए या महागठबंधन को वोट देने से बचने की अपील की। उन्होंने कहा, “जब तक शिक्षक जाति-धर्म और लालू- मोदी के नाम पर वोट करते रहेंगे, तब तक सरकार उन्हें ठगती रहेगी।” वित्त रहित शिक्षकों की समस्याओं का समाधान करने की बात प्रशांत किशोर ने कहा कि वित्त रहित शिक्षकों की समस्याओं का समाधान पिछले तीन दशक से नहीं हुआ है। जन सुराज इन समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास करेगा। उन्होंने कहा कि बिना वेतन के बिहार में हजारों शिक्षक सेवानिवृत्त हो गए। उन्होंने कहा कि जो शिक्षक अभी कार्यरत हैं, उन्हें समान काम के लिए समान वेतन कैसे मिले, इसका रास्ता निकाला जाएगा। हर एमएलसी क्षेत्र में रोजगार योजना शुरू करने का दावा प्रशांत किशोर ने कहा कि दरभंगा निर्वाचन क्षेत्र समेत बिहार के किसी भी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज के उम्मीदवार जीतते हैं तो बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में युवाओं को रोजगार देने के लिए शुरू की गई योजना की तरह अन्य एमएलसी क्षेत्रों में भी योजना शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि शिक्षक संवाद के दौरान शिक्षकों को बताया गया कि यह चुनाव सरकार बनाने या गिराने का चुनाव नहीं है। यह अपनी शक्ति दिखाने और सरकार को संदेश देने का चुनाव है। सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए शिक्षकों को अपनी ताकत दिखानी होगी। प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर लोग बिहार में बेहतर व्यवस्था और युवाओं के लिए रोजगार चाहते हैं तो जन सुराज को एक बार मौका दें। ‘SIR को लेकर विरोध बहुत पहले शुरू होना चाहिए था’ पत्रकारों से बातचीत में प्रशांत किशोर ने SIR और कथित वोट चोरी को लेकर विपक्षी दलों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर कहा कि यह मांग विपक्षी दलों की ओर से बहुत पहले उठाई जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पिछले 8-10 वर्षों में चुनावी प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा वर्ग सवाल उठाता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में मनमुताबिक ऑब्जर्वर भेजे जा रहे हैं, जिससे सत्तारूढ़ दलों को मदद मिलती है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग भी की। प्रशांत किशोर ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें एचडीएफसी बैंक का चेयरमैन बनाया गया, जिससे लोगों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है।उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यशैली में व्यापक सुधार की जरूरत है और जन सुराज इसके पक्ष में है। ‘बिहार में जन सुराज चुनाव आयोग का भुक्तभोगी’ प्रशांत किशोर ने दावा किया कि बिहार में जन सुराज भी चुनाव आयोग की कार्यशैली का भुक्तभोगी रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले करीब डेढ़ करोड़ मतदाताओं को 10-10 हजार रुपए देकर वोट खरीदे गए, लेकिन चुनाव आयोग मूकदर्शक बना रहा। उन्होंने कहा कि अगर चुनाव आयोग में व्यापक सुधार नहीं होता है तो सभी विपक्षी दलों को चुनाव के बहिष्कार पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने का कोई औचित्य नहीं है। फरक्का जलसंधि पर JDU के ‘नीतीश संवाद’ पर निशाना फरक्का जलसंधि को लेकर JDU की ओर से चलाए जा रहे ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम पर प्रशांत किशोर ने कहा कि जब सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने थे, तब उन्होंने कहा था कि अब बिहार को गुजरात से चलाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि गुजरात के लोग अब ऐसी बातें नहीं चाह रहे हैं, इसलिए उनके सिपहसालार इस तरह की बातें करने लगे हैं। उन्होंने कहा कि अमित शाह और नरेंद्र मोदी जो चाहते हैं, वही JDU कर रही है।  

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