पितृपक्ष मेले में पिंडदान और तर्पण के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। प्रेतशिला, रामशिला, सीताकुंड, देवघाट व विष्णुपद मंदिर समेत अलग-अलग पिंडवेदियों पर श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। गुरुवार को 2 लाख 50 हजार 100 श्रद्धालुओं ने गयाजी में पिंडदान और तर्पण किया। इसके साथ ही मेले की शुरुआत से अब तक आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 46 लाख 70 हजार 600 हो गई है। मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्वास्थ्य, आवासन और खोया-पाया केंद्र की व्यवस्था की गई है। गुरुवार को 7,408 लोगों ने मेडिकल उपचार का लाभ लिया। अब तक 1 लाख 37 हजार 966 श्रद्धालुओं का इलाज किया जा चुका है। वहीं, 70 लोगों को व्हीलचेयर की सुविधा दी गई। मेले की शुरुआत से अब तक 965 लोग इसका लाभ ले चुके हैं। 103 बिछड़े लोगों को परिजनों से मिलाया भीड़ के बीच बिछड़ने वाले लोगों को उनके परिजनों से मिलाने के लिए खोया-पाया सेल काम कर रहा है। बुधवार को इस सेल की मदद से 103 लोगों को उनके बिछड़े परिजनों से मिलाया गया। अब तक 1,197 लोगों को अपनों से मिलवाया जा चुका है। बच्चों और बुजुर्गों को भीड़ में खोने से बचाने के लिए उनके हाथों पर रिस्ट बैंड लगाए जा रहे हैं। बुधवार को 1,037 लोगों को रिस्ट बैंड लगाया गया। अब तक 13,849 लोगों को यह सुविधा दी गई है। कंट्रोल रूम में 156 शिकायतें मिलीं मेला क्षेत्र में बनाए गए कंट्रोल रूम में बुधवार को 156 शिकायतें मिलीं। मेले की शुरुआत से अब तक कुल 2,387 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इन शिकायतों के जरिए श्रद्धालु अपनी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचा रहे हैं। टेंट सिटी में 1,467 लोगों ने किया आवासन गांधी मैदान स्थित टेंट सिटी में श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था की गई है। बुधवार को यहां 1,467 लोगों ने आवासन किया। अब तक कुल 15,336 श्रद्धालु टेंट सिटी में ठहर चुके हैं। श्रद्धालुओं के बीच बुधवार को गंगाजल के 2,325 पैकेट बांटे गए। अब तक 61,808 पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। पूर्वजों के नाम पर लगाए 46 पौधे पर्यावरण संरक्षण के लिए पितृवाटिका में ‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ अभियान चलाया जा रहा है। बुधवार को यहां 46 पौधे लगाए गए। अब तक कुल 600 पौधे लगाए जा चुके हैं। विदेशी श्रद्धालुओं और अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले यात्रियों की मदद के लिए एआई आधारित भाषा अनुवाद की सुविधा भी दी जा रही है। बुधवार को 3,249 यात्रियों को इससे मदद मिली। अब तक 95,825 यात्री इस सुविधा का लाभ ले चुके हैं। पितृपक्ष मेले में पिंडदान और तर्पण के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। प्रेतशिला, रामशिला, सीताकुंड, देवघाट व विष्णुपद मंदिर समेत अलग-अलग पिंडवेदियों पर श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। गुरुवार को 2 लाख 50 हजार 100 श्रद्धालुओं ने गयाजी में पिंडदान और तर्पण किया। इसके साथ ही मेले की शुरुआत से अब तक आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 46 लाख 70 हजार 600 हो गई है। मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्वास्थ्य, आवासन और खोया-पाया केंद्र की व्यवस्था की गई है। गुरुवार को 7,408 लोगों ने मेडिकल उपचार का लाभ लिया। अब तक 1 लाख 37 हजार 966 श्रद्धालुओं का इलाज किया जा चुका है। वहीं, 70 लोगों को व्हीलचेयर की सुविधा दी गई। मेले की शुरुआत से अब तक 965 लोग इसका लाभ ले चुके हैं। 103 बिछड़े लोगों को परिजनों से मिलाया भीड़ के बीच बिछड़ने वाले लोगों को उनके परिजनों से मिलाने के लिए खोया-पाया सेल काम कर रहा है। बुधवार को इस सेल की मदद से 103 लोगों को उनके बिछड़े परिजनों से मिलाया गया। अब तक 1,197 लोगों को अपनों से मिलवाया जा चुका है। बच्चों और बुजुर्गों को भीड़ में खोने से बचाने के लिए उनके हाथों पर रिस्ट बैंड लगाए जा रहे हैं। बुधवार को 1,037 लोगों को रिस्ट बैंड लगाया गया। अब तक 13,849 लोगों को यह सुविधा दी गई है। कंट्रोल रूम में 156 शिकायतें मिलीं मेला क्षेत्र में बनाए गए कंट्रोल रूम में बुधवार को 156 शिकायतें मिलीं। मेले की शुरुआत से अब तक कुल 2,387 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इन शिकायतों के जरिए श्रद्धालु अपनी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचा रहे हैं। टेंट सिटी में 1,467 लोगों ने किया आवासन गांधी मैदान स्थित टेंट सिटी में श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था की गई है। बुधवार को यहां 1,467 लोगों ने आवासन किया। अब तक कुल 15,336 श्रद्धालु टेंट सिटी में ठहर चुके हैं। श्रद्धालुओं के बीच बुधवार को गंगाजल के 2,325 पैकेट बांटे गए। अब तक 61,808 पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। पूर्वजों के नाम पर लगाए 46 पौधे पर्यावरण संरक्षण के लिए पितृवाटिका में ‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ अभियान चलाया जा रहा है। बुधवार को यहां 46 पौधे लगाए गए। अब तक कुल 600 पौधे लगाए जा चुके हैं। विदेशी श्रद्धालुओं और अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले यात्रियों की मदद के लिए एआई आधारित भाषा अनुवाद की सुविधा भी दी जा रही है। बुधवार को 3,249 यात्रियों को इससे मदद मिली। अब तक 95,825 यात्री इस सुविधा का लाभ ले चुके हैं।

