न्यू मार्केट में गुरुवार को लगी आग ने बाजार की आपातकालीन व्यवस्थाओं और फायर सेफ्टी की खामियां उजागर कर दीं। घटनास्थल से फायर कंट्रोल रूम महज डेढ़ किमी दूर है, फिर भी दमकल को आग तक पहुंचने में करीब 30 मिनट लगे। पहले ताले लगे बैरियर, फिर दुकानों के बाहर फैला अतिक्रमण (कब्जे) और लटकते तार बाधा बने। आखिरकार दुकानों की पिछली दीवार तोड़कर आग बुझानी पड़ी। दोपहर 2:56 बजे लगी आग पर शाम 6 बजे काबू पाया जा सका। पांच बड़ी दुकानों का करोड़ों का सामान जल गया। दमकल में प्रेशर नहीं, फोम टेंडर अटका: प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक शुरुआती दमकलों में पानी का पर्याप्त प्रेशर नहीं बना। भेल से बुलाया भारी फोम टेंडर संकरी गली में बिजली-इंटरनेट के तारों में उलझा। तार टूटे, आग सामने की दुकानों तक पहुंच गई। पानी नहीं पहुंचा तो जेसीबी से पिछली दीवारें तोड़ी गईं। इसके बाद दमकलकर्मियों ने फोम-केमिकल से आग बुझाई। फायर एनओसी नहीं: बताया जा रहा है कि इस बाजार की किसी दुकान के पास फायर एनओसी नहीं है। आग से बचने के इंतजाम भी दुकानों में नहीं रखे जाते। यानी, आग लगने के बाद दमकल के सामने सिर्फ एक नहीं, कई तरह की रुकावटें थीं। दमकल जब तक नहीं पहुंची, तब तक व्यापारी बाल्टियों से पानी डालकर आग पर काबू पाने की कोशिश करते रहे। बैरियर पर चाबी तलाशते रहे, झूले ने भी रास्ता रोका अचानक लगी आग की लपटें 25 फीट ऊपर तक उठ रही थीं। दमकल पहुंची तो नो-व्हीकल जोन के बैरियर पर ताला लगा था। किसी तरह बैरियर खुला तो छोटी दुकानों, ठेलों, टीनशेड और बाहर रखे सामान से रास्ता घिरा था। दमकल खड़ी करने तक की जगह नहीं मिली। दमकल की राह में सड़क लगे झूलों ने भी रोकी। देरी की वजह से आग लगातार बढ़ती गई।

