रांची यूनिवर्सिटी के 36 कर्मचारियों को दुर्गा पूजा से पहले सरकार ने बड़ा तोहफा दिया है। नौकरी नियमित होने के 5 साल बाद अब सरकार ने भी स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके साथ ही इन कर्मचारियों के वेतन निर्धारण प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। इनमें 20 तृतीय श्रेणी और 16 चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी शामिल हैं। यूनिवर्सिटी ने इन सभी की सेवा 21 सितंबर 2021 से नियमित की थी। लेकिन सरकार ने वर्ष 2023 में विवि द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को दो बार अस्वीकृत कर दिया था। इसके बाद कर्मचारी हाईकोर्ट चले गए थे। अगस्त 2025 में हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला देते हुए सरकार के आदेश को रद्द कर दिया था। अब उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने नौकरी पक्की मानते हुए वेतन निर्धारण प्रस्ताव को मंजूरी दी है। 10 से 30 साल तक काम, अब नौकरी पक्की हुई कहानी सिर्फ वेतन निर्धारण की नहीं है। कई कर्मचारी वर्षों तक अनुबंध पर काम करते रहे। सूची में तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों की नियुक्ति 2003 से और चतुर्थ श्रेणी में एक कर्मचारी की नियुक्ति 1990 की है। यानि कुछ कर्मचारियों ने नियमित कर्मचारी बनने से पहले करीब तीन दशक तक विवि में सेवा दी। विवि ने किया नियमित, सरकार ने रोका वेतन रांची विवि ने नियमितीकरण के बाद वेतन निर्धारण के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा, लेकिन प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया गया। विवि ने फिर प्रस्ताव भेजा तो 4 अगस्त 2023 को इसे भी खारिज कर दिया गया। सरकार की आपत्ति मुख्य रूप से यह थी कि इन कर्मियों की नियुक्ति सृजित पदों के विरुद्ध नहीं हुई थी। इन कर्मचारियों की नौकरी पक्की और वेतन का निर्धारण 16 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी : मो. फेदा, आइजक एक्का, वीणा कुमारी, संजय तिर्की, प्रतिमा मिंज, जगनी कुमारी, धरम मुंडा, दिनेश कुमार, शमीम अंसारी, राजेश कुमार सिंह, जितेंद्र कुमार, संतोष कुमार मंडल, राजू बहादुर राय, रवींद्र कुमार पासवान, सरिता कच्छप, शंकर भंडारी। नियमित किए गए 20 तृतीय श्रेणी कर्मचारी व उनके पद संजीत राज (कैलीग्राफिस्ट), धर्मेंद्र कुमार (स्टेनो), नईमा खातून (एलडीए), अनुज सिन्हा (टाइपिस्ट), धीरज बेदिया (क्लर्क), नसीमा खातून (स्टेनो), राकेश कुमार (क्लर्क), शमशेर अली (स्टेनो), गीता उरांव (स्टेनो), अनिल कुमार (स्टेनो), रागिनी मिश्रा (स्टेनो), विनय (क्लर्क), मंजय प्रमाणिक (क्लर्क), दिनेश्वर प्रसाद (कैशियर), सुभाष कच्छप (एलडीए), अमित कुमार (एलडीए), सुमन महतो (स्टेनो), क्षितिज श्रीवास्तव (एलडीए), शमीम खान (स्टेनो), शंकर गोदार (क्लर्क) 36 कर्मचारियों ने ऐसे जीती कानूनी लड़ाई 2016 : यूनिवर्सिटी ने नियमितीकरण के लिए प्रक्रिया बढ़ाई।
2021 : यूनिवर्सिटी ने 21 सितंबर से 36 कर्मचारियों की सेवा नियमित की।
2022 : नियमित कर्मचारियों के वेतन निर्धारण का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया।
2023 : सरकार ने वेतन निर्धारण का प्रस्ताव दो बार खारिज किया।
2025 : 26 अगस्त को कोर्ट ने सरकार के अस्वीकृति आदेश को रद्द किया। आगे क्या… नियमितीकरण की तिथि से ही सभी लाभ देय होंगे रांची यूनिवर्सिटी ने इन 36 कर्मचारियों की सेवा 21 सितंबर 2021 से नियमित की थी। इनके वेतन निर्धारण के लिए भेजे गए प्रस्ताव पर उच्च शिक्षा निदेशक सुधीर बाड़ा ने मंजूरी दे दी है। इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसलिए इनको विवि द्वारा नियमित किए जाने की तिथि से ही इन्हें एरियर समेत अन्य लाभ देय होंगे। रांची यूनिवर्सिटी के 36 कर्मचारियों को दुर्गा पूजा से पहले सरकार ने बड़ा तोहफा दिया है। नौकरी नियमित होने के 5 साल बाद अब सरकार ने भी स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके साथ ही इन कर्मचारियों के वेतन निर्धारण प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। इनमें 20 तृतीय श्रेणी और 16 चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी शामिल हैं। यूनिवर्सिटी ने इन सभी की सेवा 21 सितंबर 2021 से नियमित की थी। लेकिन सरकार ने वर्ष 2023 में विवि द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को दो बार अस्वीकृत कर दिया था। इसके बाद कर्मचारी हाईकोर्ट चले गए थे। अगस्त 2025 में हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला देते हुए सरकार के आदेश को रद्द कर दिया था। अब उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने नौकरी पक्की मानते हुए वेतन निर्धारण प्रस्ताव को मंजूरी दी है। 10 से 30 साल तक काम, अब नौकरी पक्की हुई कहानी सिर्फ वेतन निर्धारण की नहीं है। कई कर्मचारी वर्षों तक अनुबंध पर काम करते रहे। सूची में तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों की नियुक्ति 2003 से और चतुर्थ श्रेणी में एक कर्मचारी की नियुक्ति 1990 की है। यानि कुछ कर्मचारियों ने नियमित कर्मचारी बनने से पहले करीब तीन दशक तक विवि में सेवा दी। विवि ने किया नियमित, सरकार ने रोका वेतन रांची विवि ने नियमितीकरण के बाद वेतन निर्धारण के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा, लेकिन प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया गया। विवि ने फिर प्रस्ताव भेजा तो 4 अगस्त 2023 को इसे भी खारिज कर दिया गया। सरकार की आपत्ति मुख्य रूप से यह थी कि इन कर्मियों की नियुक्ति सृजित पदों के विरुद्ध नहीं हुई थी। इन कर्मचारियों की नौकरी पक्की और वेतन का निर्धारण 16 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी : मो. फेदा, आइजक एक्का, वीणा कुमारी, संजय तिर्की, प्रतिमा मिंज, जगनी कुमारी, धरम मुंडा, दिनेश कुमार, शमीम अंसारी, राजेश कुमार सिंह, जितेंद्र कुमार, संतोष कुमार मंडल, राजू बहादुर राय, रवींद्र कुमार पासवान, सरिता कच्छप, शंकर भंडारी। नियमित किए गए 20 तृतीय श्रेणी कर्मचारी व उनके पद संजीत राज (कैलीग्राफिस्ट), धर्मेंद्र कुमार (स्टेनो), नईमा खातून (एलडीए), अनुज सिन्हा (टाइपिस्ट), धीरज बेदिया (क्लर्क), नसीमा खातून (स्टेनो), राकेश कुमार (क्लर्क), शमशेर अली (स्टेनो), गीता उरांव (स्टेनो), अनिल कुमार (स्टेनो), रागिनी मिश्रा (स्टेनो), विनय (क्लर्क), मंजय प्रमाणिक (क्लर्क), दिनेश्वर प्रसाद (कैशियर), सुभाष कच्छप (एलडीए), अमित कुमार (एलडीए), सुमन महतो (स्टेनो), क्षितिज श्रीवास्तव (एलडीए), शमीम खान (स्टेनो), शंकर गोदार (क्लर्क) 36 कर्मचारियों ने ऐसे जीती कानूनी लड़ाई 2016 : यूनिवर्सिटी ने नियमितीकरण के लिए प्रक्रिया बढ़ाई।
2021 : यूनिवर्सिटी ने 21 सितंबर से 36 कर्मचारियों की सेवा नियमित की।
2022 : नियमित कर्मचारियों के वेतन निर्धारण का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया।
2023 : सरकार ने वेतन निर्धारण का प्रस्ताव दो बार खारिज किया।
2025 : 26 अगस्त को कोर्ट ने सरकार के अस्वीकृति आदेश को रद्द किया। आगे क्या… नियमितीकरण की तिथि से ही सभी लाभ देय होंगे रांची यूनिवर्सिटी ने इन 36 कर्मचारियों की सेवा 21 सितंबर 2021 से नियमित की थी। इनके वेतन निर्धारण के लिए भेजे गए प्रस्ताव पर उच्च शिक्षा निदेशक सुधीर बाड़ा ने मंजूरी दे दी है। इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसलिए इनको विवि द्वारा नियमित किए जाने की तिथि से ही इन्हें एरियर समेत अन्य लाभ देय होंगे।

