‘फरक्का जल संधि बिहार के हित में नहीं’:समस्तीपुर में नीतीश संवाद; सजंय झा बोले- 2050 की जरूरतों को ध्यान में रखकर हो आगे का समझौता

‘फरक्का जल संधि बिहार के हित में नहीं’:समस्तीपुर में नीतीश संवाद; सजंय झा बोले- 2050 की जरूरतों को ध्यान में रखकर हो आगे का समझौता

जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने कहा कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि बिहार के हित में नहीं है। भविष्य में यदि इस समझौते को लेकर कोई नया करार होता है तो उसमें बिहार की वर्ष 2050 तक की जल जरूरतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। संजय झा गुरुवार को समस्तीपुर में फरक्का जल समझौते को लेकर आयोजित नीतीश संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि फरक्का जल संधि के कारण बिहार का जल प्रबंधन प्रभावित हुआ है। गर्मी के मौसम में गंगा के साथ-साथ बिहार की आंतरिक नदियों से भी पानी खींचकर बांग्लादेश को दिए जाने का उन्होंने दावा किया। संजय झा ने कहा कि तत्कालीन सरकारों में बैठे लोगों ने बिहार के हितों का ध्यान नहीं रखा। उन्होंने कहा कि इस समझौते के प्रभाव से बिहार के किसानों की सिंचाई, लोगों के पेयजल और अन्य जल जरूरतों के साथ लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। राज्य के युवाओं के भविष्य पर भी इसका असर पड़ने की बात उन्होंने कही। तीन पीरियड में 1500 क्यूसेक पानी छोड़ने का दावा संजय झा ने कहा कि फरक्का जल संधि की शर्तों को पूरा करने के लिए बिहार को तीन पीरियड में 1500 क्यूसेक पानी छोड़ना पड़ता है। उनके अनुसार, इससे राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। उन्होंने कहा कि फिलहाल गंगा में सबसे अधिक पानी बिहार की सहायक नदियों के माध्यम से पहुंचता है। ऐसे में बिहार के जल हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। डिप्टी सीएम विजय चौधरी बोले- पानी छोड़ने की बाध्यता खत्म हो कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिहार के डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने कहा कि जदयू के अभियान का असर है कि जो राजनीतिक दल फरक्का समझौते के समय इस मुद्दे पर चुप थे, वे भी अब इसके विरोध में आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संधि की शर्तों को पूरा करने के लिए बिहार को तीन पीरियड में 1500 क्यूसेक पानी छोड़ना पड़ता है। इसके कारण राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न होने का उन्होंने दावा किया। चौधरी ने कहा कि बिहार से तीन पीरियड में पानी छोड़ने की बाध्यता खत्म की जानी चाहिए। इस पानी का इस्तेमाल बिहार में औद्योगिक विकास और सिंचाई जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। रामनाथ ठाकुर बोले- पुनर्विचार होना चाहिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि जदयू की पहल किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि जन सरोकार से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि यह बिहार के हक और बिहार के लोगों के हित की बात है। रामनाथ ठाकुर ने कहा कि फरक्का जल संधि के कारण बिहार को कितना और किस तरह का नुकसान हो रहा है, इस मुद्दे को जदयू केंद्र तक पहुंचाना चाहता है। उन्होंने फरक्का जल संधि पर पुनर्विचार किए जाने की मांग की। उमेश कुशवाहा बोले- बिहार को दोहरा नुकसान जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि फरक्का जल संधि से बिहार को दोहरा नुकसान हो रहा है। उनके अनुसार, एक ओर बिहार अपने हिस्से का पानी भी बांग्लादेश को दे रहा है, वहीं दूसरी ओर इस अंतरराष्ट्रीय संधि का 73 प्रतिशत बोझ बिहार उठा रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार के जल हितों को ध्यान में रखते हुए फरक्का जल संधि की शर्तों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने कहा कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि बिहार के हित में नहीं है। भविष्य में यदि इस समझौते को लेकर कोई नया करार होता है तो उसमें बिहार की वर्ष 2050 तक की जल जरूरतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। संजय झा गुरुवार को समस्तीपुर में फरक्का जल समझौते को लेकर आयोजित नीतीश संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि फरक्का जल संधि के कारण बिहार का जल प्रबंधन प्रभावित हुआ है। गर्मी के मौसम में गंगा के साथ-साथ बिहार की आंतरिक नदियों से भी पानी खींचकर बांग्लादेश को दिए जाने का उन्होंने दावा किया। संजय झा ने कहा कि तत्कालीन सरकारों में बैठे लोगों ने बिहार के हितों का ध्यान नहीं रखा। उन्होंने कहा कि इस समझौते के प्रभाव से बिहार के किसानों की सिंचाई, लोगों के पेयजल और अन्य जल जरूरतों के साथ लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। राज्य के युवाओं के भविष्य पर भी इसका असर पड़ने की बात उन्होंने कही। तीन पीरियड में 1500 क्यूसेक पानी छोड़ने का दावा संजय झा ने कहा कि फरक्का जल संधि की शर्तों को पूरा करने के लिए बिहार को तीन पीरियड में 1500 क्यूसेक पानी छोड़ना पड़ता है। उनके अनुसार, इससे राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। उन्होंने कहा कि फिलहाल गंगा में सबसे अधिक पानी बिहार की सहायक नदियों के माध्यम से पहुंचता है। ऐसे में बिहार के जल हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। डिप्टी सीएम विजय चौधरी बोले- पानी छोड़ने की बाध्यता खत्म हो कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिहार के डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने कहा कि जदयू के अभियान का असर है कि जो राजनीतिक दल फरक्का समझौते के समय इस मुद्दे पर चुप थे, वे भी अब इसके विरोध में आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संधि की शर्तों को पूरा करने के लिए बिहार को तीन पीरियड में 1500 क्यूसेक पानी छोड़ना पड़ता है। इसके कारण राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न होने का उन्होंने दावा किया। चौधरी ने कहा कि बिहार से तीन पीरियड में पानी छोड़ने की बाध्यता खत्म की जानी चाहिए। इस पानी का इस्तेमाल बिहार में औद्योगिक विकास और सिंचाई जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। रामनाथ ठाकुर बोले- पुनर्विचार होना चाहिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि जदयू की पहल किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि जन सरोकार से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि यह बिहार के हक और बिहार के लोगों के हित की बात है। रामनाथ ठाकुर ने कहा कि फरक्का जल संधि के कारण बिहार को कितना और किस तरह का नुकसान हो रहा है, इस मुद्दे को जदयू केंद्र तक पहुंचाना चाहता है। उन्होंने फरक्का जल संधि पर पुनर्विचार किए जाने की मांग की। उमेश कुशवाहा बोले- बिहार को दोहरा नुकसान जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि फरक्का जल संधि से बिहार को दोहरा नुकसान हो रहा है। उनके अनुसार, एक ओर बिहार अपने हिस्से का पानी भी बांग्लादेश को दे रहा है, वहीं दूसरी ओर इस अंतरराष्ट्रीय संधि का 73 प्रतिशत बोझ बिहार उठा रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार के जल हितों को ध्यान में रखते हुए फरक्का जल संधि की शर्तों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।  

​

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *