IAS Tukaram Mundhe On Nana Patekar Death: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से फिल्म इंडस्ट्री के साथ-साथ उनके करीबी दोस्त भी सदमे में हैं। 75 साल की उम्र में नाना पाटेकर ने गोवा स्थित अपने घर पर अंतिम सांस ली। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया था। उनके निधन के बाद महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कमिश्नर और उनके करीबी दोस्त तुकाराम मुंढे ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट लिखकर नाना को याद किया है। उन्होंने बताया कि निधन से महज आठ दिन पहले ही उनकी नाना पाटेकर से बातचीत हुई थी।
8 दिन पहले हुई थी आखिरी बातचीत
तुकाराम मुंढे ने नाना पाटेकर की एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि उन्होंने सिर्फ एक बेहतरीन कलाकार को नहीं खोया, बल्कि एक असाधारण इंसान और अपने प्यारे दोस्त को भी खो दिया है। उन्होंने कहा कि नाना की गर्मजोशी और स्नेह उनके आसपास रहने वाले हर व्यक्ति को छू जाता था।
मुंढे ने बताया कि दोनों की आखिरी बातचीत नाना के निधन से ठीक आठ दिन पहले हुई थी। उस वक्त उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि यह बातचीत उनकी दोस्ती की आखिरी बातचीत बन जाएगी।
‘लव यू बाला…’ नाना के आखिरी शब्द
तुकाराम मुंढे ने अपनी पोस्ट में नाना पाटेकर के आखिरी शब्दों को याद करते हुए लिखा, “हमने सिर्फ आठ दिन पहले बात की थी। मैं कभी सोच भी नहीं सकता था कि वो हमारी आखिरी बातचीत होगी। उनके मुझसे कहे आखिरी शब्द थे- ‘लव यू बाला…’ ये शब्द जिंदगी भर मेरे साथ रहेंगे।”
नाना का यह छोटा सा संदेश अब उनके दोस्त के लिए जिंदगीभर की याद बन गया है। मुंढे के मुताबिक, नाना सिर्फ उनके दोस्त नहीं थे, बल्कि उनकी जिंदगी का एक हिस्सा बन चुके थे।
‘नाना मेरी जिंदगी का एक हिस्सा छोड़ गए’
नाना को याद करते हुए तुकाराम मुंढे ने लिखा कि कुछ लोग अपने पीछे सिर्फ यादें छोड़कर जाते हैं, जबकि कुछ लोग हमारी जिंदगी में अपना एक हिस्सा छोड़ जाते हैं। उनके मुताबिक, नाना भी उन्हीं लोगों में से एक थे।
उन्होंने अपने दोस्त को अलविदा कहते हुए लिखा कि नाना की बहुत याद आएगी और उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।
चार दशक से ज्यादा लंबा रहा फिल्मी सफर
नाना पाटेकर ने हिंदी सिनेमा और थिएटर में चार दशक से ज्यादा समय तक काम किया। ‘परिंदा’, ‘सलाम बॉम्बे!’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘द अटैक्स ऑफ 26/11’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी दमदार अदाकारी की छाप छोड़ी। ‘क्रांतिवीर’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था।
गंभीर भूमिकाओं के अलावा ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उनका कॉमिक अंदाज भी दर्शकों को खूब पसंद आया। उनके निधन के बाद जहां सिनेमा जगत उनके किरदारों को याद कर रहा है, वहीं तुकाराम मुंढे जैसे करीबी लोग उनके पीछे छूट गईं निजी यादों को साझा कर रहे हैं।

