Sports Ministry ने IUSF को दी राष्ट्रीय खेल महासंघ के रूप में अस्थायी मान्यता

Sports Ministry ने IUSF को दी राष्ट्रीय खेल महासंघ के रूप में अस्थायी मान्यता

(पूनम मेहरा)
नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर खेल मंत्रालय ने भारत में विश्वविद्यालय खेलों के विकास के लिए भारतीय यूनिस्पोर्ट्स (विश्वविद्यालय खेल) महासंघ (आईयूएसएफ) को अस्थायी मान्यता प्रदान कर दी है। नवगठित संस्था के लिए संबद्धता की शर्तों में ढील दी गई है। इससे भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) पर प्रश्नचिह्न लग गया है जिसको प्रशासनिक खामियों के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।भारत में विश्वविद्यालय स्तर के खेलों के लिए नोडल निकाय रही एआईयू पिछले साल जर्मनी में विश्व विश्वविद्यालय खेलों के दौरान प्रशासनिक चूक के लिए विवादों में घिरी हुई है। तब भारतीय टीम में शामिल 12 बैडमिंटन खिलाड़ियों में से छह को इसलिए भाग लेने से रोक दिया गया था क्योंकि टीम मैनेजर ने निश्चित समय तक उनके नाम जमा नहीं करवाए थे। खेल मंत्रालय ने इस वर्ष जनवरी में एआईयू को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि संस्था खिलाड़ियों की विकास और योजना से संबंधित अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में नाकाम रही है।एआईयू ने हालांकि यह सुनिश्चित किया था कि जो खिलाड़ी प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाए उन्हें विश्वविद्यालय खेलों कि वैश्विक संस्था एफआईएसयू से भागीदारी प्रमाण पत्र प्राप्त हो जाएं। एक विश्वसनीय सूत्र ने पीटीआई को बताया कि एफआईएसयू से संबद्धता के कारण एआईयू को मंत्रालय द्वारा दी गई मौजूदा मान्यता को वापस नहीं लिया गया। आईयूएसएफ को मान्यता मिलने के बाद हालांकि यह देखना होगा कि एआईयू भविष्य में भी प्रासंगिक बना रहेगा या नहीं।आईयूएसएफ के महासचिव (जिनका नाम नहीं बताया गया है) को भेजे गए एक पत्र में मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि उसने इस साल जुलाई में अपना दावा पेश करने वाली नई संस्था के लिए कुछ शर्तों में ढील दी है। मंत्रालय ने पत्र में कहा, ‘‘मुझे उपरोक्त विषय पर पांच जुलाई 2026 के आपके पत्र के संदर्भ में यह सूचित करने का निर्देश दिया गया है कि भारतीय यूनिस्पोर्ट्स फेडरेशन (आईयूएसएफ) के राष्ट्रीय खेल महासंघ (एनएसएफ) के रूप में मान्यता के लिए किए गए अनुरोध पर विचार किया गया है। इस पत्र के जारी होने की तिथि से आईयूएसएफ को एनएसएफ के रूप में अस्थायी मान्यता प्रदान करने का फैसला किया गया है।’’
आईयूएसएफ को राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप अपने संविधान में संशोधन करने और अगले छह महीनों में एफआईएसयू से मान्यता हासिल करने का निर्देश दिया गया है।पत्र में कहा गया है, ‘‘आईयूएसएफ को यह मान्यता मिलने का मतलब है कि भारत में विश्वविद्यालय खेलों के प्रचार और विकास में आईयूएसएफ को एक महत्वपूर्ण भूमिका सौंपी गई है।’’
मंत्रालय ने कहा कि आईयूएसएफ को राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के निकायों को इससे संबद्ध करने की अनुमति दी जाएगी। एआईयू के सचिव पंकज मित्तल ने इस नए घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया के लिए पीटीआई के फोन का जवाब नहीं दिया। भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) की स्थापना 1925 में भारत के अंतर-विश्वविद्यालय बोर्ड (आईयूबी) के रूप में हुई थी।1973 में इसका नाम बदलकर भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) कर दिया गया था। 

(पूनम मेहरा)
नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर खेल मंत्रालय ने भारत में विश्वविद्यालय खेलों के विकास के लिए भारतीय यूनिस्पोर्ट्स (विश्वविद्यालय खेल) महासंघ (आईयूएसएफ) को अस्थायी मान्यता प्रदान कर दी है। नवगठित संस्था के लिए संबद्धता की शर्तों में ढील दी गई है। इससे भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) पर प्रश्नचिह्न लग गया है जिसको प्रशासनिक खामियों के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

भारत में विश्वविद्यालय स्तर के खेलों के लिए नोडल निकाय रही एआईयू पिछले साल जर्मनी में विश्व विश्वविद्यालय खेलों के दौरान प्रशासनिक चूक के लिए विवादों में घिरी हुई है। तब भारतीय टीम में शामिल 12 बैडमिंटन खिलाड़ियों में से छह को इसलिए भाग लेने से रोक दिया गया था क्योंकि टीम मैनेजर ने निश्चित समय तक उनके नाम जमा नहीं करवाए थे। खेल मंत्रालय ने इस वर्ष जनवरी में एआईयू को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि संस्था खिलाड़ियों की विकास और योजना से संबंधित अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में नाकाम रही है।

एआईयू ने हालांकि यह सुनिश्चित किया था कि जो खिलाड़ी प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाए उन्हें विश्वविद्यालय खेलों कि वैश्विक संस्था एफआईएसयू से भागीदारी प्रमाण पत्र प्राप्त हो जाएं। एक विश्वसनीय सूत्र ने पीटीआई को बताया कि एफआईएसयू से संबद्धता के कारण एआईयू को मंत्रालय द्वारा दी गई मौजूदा मान्यता को वापस नहीं लिया गया। आईयूएसएफ को मान्यता मिलने के बाद हालांकि यह देखना होगा कि एआईयू भविष्य में भी प्रासंगिक बना रहेगा या नहीं।

आईयूएसएफ के महासचिव (जिनका नाम नहीं बताया गया है) को भेजे गए एक पत्र में मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि उसने इस साल जुलाई में अपना दावा पेश करने वाली नई संस्था के लिए कुछ शर्तों में ढील दी है। मंत्रालय ने पत्र में कहा, ‘‘मुझे उपरोक्त विषय पर पांच जुलाई 2026 के आपके पत्र के संदर्भ में यह सूचित करने का निर्देश दिया गया है कि भारतीय यूनिस्पोर्ट्स फेडरेशन (आईयूएसएफ) के राष्ट्रीय खेल महासंघ (एनएसएफ) के रूप में मान्यता के लिए किए गए अनुरोध पर विचार किया गया है। इस पत्र के जारी होने की तिथि से आईयूएसएफ को एनएसएफ के रूप में अस्थायी मान्यता प्रदान करने का फैसला किया गया है।’’
आईयूएसएफ को राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप अपने संविधान में संशोधन करने और अगले छह महीनों में एफआईएसयू से मान्यता हासिल करने का निर्देश दिया गया है।

पत्र में कहा गया है, ‘‘आईयूएसएफ को यह मान्यता मिलने का मतलब है कि भारत में विश्वविद्यालय खेलों के प्रचार और विकास में आईयूएसएफ को एक महत्वपूर्ण भूमिका सौंपी गई है।’’
मंत्रालय ने कहा कि आईयूएसएफ को राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के निकायों को इससे संबद्ध करने की अनुमति दी जाएगी। एआईयू के सचिव पंकज मित्तल ने इस नए घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया के लिए पीटीआई के फोन का जवाब नहीं दिया। भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) की स्थापना 1925 में भारत के अंतर-विश्वविद्यालय बोर्ड (आईयूबी) के रूप में हुई थी।

1973 में इसका नाम बदलकर भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) कर दिया गया था।

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