मुरादाबाद में पिछले 2 महीने से चल रहे वन विभाग के ‘ऑपरेशन पैंथर’ के तहत गुरुवार सुबह ठाकुरद्वारा के गांव बलिया में वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में एक और भारी-भरकम तेंदुआ सफलतापूर्वक कैद हो गया। तेंदुए के पकड़े जाने की सूचना जैसे ही सुबह ग्रामीणों को मिली, तो पूरे गांव ने राहत की सांस ली। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर तेंदुए को सुरक्षित रेस्क्यू किया और उसे मेडिकल परीक्षण के बाद आरक्षित वन क्षेत्र में भेजने की तैयारी की जा रही है। 3 अगस्त से बाद से यह 26 वां तेंदुआ वन विभाग के पिंजड़े में कैद हुआ है। जबकि 3 तेंदुए इस अवधि में मृत अवस्था में मिले। तेंदुओं के हमलों में 4 ग्रामीणों की जान भी जा चुकी है।
इस बीच शहर से सटे टीएमयू अंडरपास के बाद अब सदर तहसील के पास सोनकपुर पुल के नीचे भी तेंदुआ चहलकदमी करते हुए देखा गया है। इससे शहर से सटे इस हिस्से में दहशत का माहौल है।
अब तक 26 तेंदुए जिंदा पकड़े गए, 3 की हुई मौत जिलाधिकारी अनुनय झा के निर्देश पर वन विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस महा-अभियान के तहत अब तक कुल 26 तेंदुओं को जिंदा रेस्क्यू किया जा चुका है। घने गन्ने के खेतों और जंगलों में चलाए जा रहे इस तलाशी अभियान के दौरान 3 तेंदुए मृत अवस्था में भी सड़क किनारे पाए गए हैं। प्रभावित इलाकों में तेंदुओं को पकड़ने के लिए वन विभाग ने 47 से अधिक पिंजरों का जाल बिछा रखा है, जिसकी थर्मल-इमेजिंग ड्रोन और नाइट-विज़न कैमरा ट्रैप के जरिए लगातार निगरानी की जा रही है। 3 अगस्त से अब तक 4 ग्रामीणों की मौत, बलिया गांव बना मुख्य निशाना भले ही प्रशासन लगातार तेंदुओं को पिंजरे में कैद कर रहा है, लेकिन वन्यजीवों के इस खौफनाक हमले में ग्रामीणों को भारी कीमत चुकानी पड़ी है। 3 अगस्त से लेकर अभी तक तेंदुओं के हमलों में 4 ग्रामीणों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 30 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। बलिया गांव में सर्वाधिक मौतें गौर करने वाली बात यह है कि तेंदुओं के जानलेवा हमलों का मुख्य केंद्र ठाकुरद्वारा का बलिया गांव ही रहा है, जहां सबसे अधिक मौतें दर्ज की गई हैं। इसी गांव के दिव्यांग किसान जगराज सैनी और विरमो देवी सहित अन्य ग्रामीणों को तेंदुओं ने गन्ने के खेतों और घरों के बाहर अपना शिकार बनाया था।
1. संतोष देवी (पहली मौत) दिनांक: 3 अगस्त 2026 निवासी: ग्राम लालापुर पीपलसाना, ठाकुरद्वारा विवरण: यह क्षेत्र में तेंदुओं के हिंसक हमलों की शुरुआत थी। संतोष देवी खेतों की तरफ गई थीं, जहाँ घात लगाकर बैठे तेंदुए ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। 2. विरमो देवी (दूसरी मौत) दिनांक: 18 अगस्त 2026 निवासी: ग्राम बहापुर बलिया, ठाकुरद्वारा विवरण: विरमो देवी अपने पशुओं के लिए खेत में चारा काटने गई थीं। झाड़ियों में छिपे तेंदुए ने अचानक उनके गले पर गहरा वार किया। साथ की महिलाओं के शोर मचाने पर जब तक ग्रामीण पहुंचे, तब तक विरमो देवी दम तोड़ चुकी थीं। 3. मिथिलेश देवी सैनी (तीसरी मौत) दिनांक: 25 अगस्त 2026 निवासी: ग्राम बहापुर बलिया, ठाकुरद्वारा विवरण: विरमो देवी की मौत के ठीक एक हफ्ते बाद, मिथिलेश देवी सुबह के समय अपने खेत में कृषि कार्य कर रही थीं। इसी दौरान तेंदुए ने उन पर अचानक पीछे से झपट्टा मार दिया। चीख-पुकार सुनकर पास के खेतों से ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर दौड़े, जिसके बाद तेंदुआ उन्हें छोड़कर भाग गया, लेकिन तब तक मिथिलेश देवी की जान जा चुकी थी। 4. जगराज सिंह (चौथी मौत) दिनांक: 29 अगस्त 2026 उम्र: लगभग 32 से 40 वर्ष निवासी: ग्राम बहापुर बलिया, ठाकुरद्वारा शारीरिक स्थिति: यह मृतक एक दिव्यांग (हैंडीकैप) किसान थे। विवरण: यह इस क्षेत्र की सबसे खौफनाक घटना थी। जगराज सिंह गांव के बाहर स्थित अपने झोपड़ीनुमा घर के बाहर सो रहे थे। रात के अंधेरे में आदमखोर तेंदुआ झोपड़ी के भीतर पहुंचा और उन्हें अपने जबड़े में दबोचकर खेतों की तरफ खींच ले गया। अगली सुबह ग्रामीणों को घर से कुछ दूरी पर खेत में उनका क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। सघन गश्त जारी, ग्रामीणों को सतर्क रहने की हिदायत गुरुवार सुबह एक और तेंदुए के पकड़े जाने के बाद भी वन विभाग और स्थानीय पुलिस बल को मुस्तैद रखा गया है। मुख्य वन संरक्षक और जिलाधिकारी ने प्रभावित गांवों के लोगों से अपील की है कि वे अभी भी पूरी तरह सतर्क रहें। गन्ने के खेतों में अकेले जाने से पूरी तरह बचें, हमेशा लाठी-डंडों के साथ समूह में निकलें और रात के समय बच्चों को किसी भी परिस्थिति में अकेले बाहर न छोड़ें, क्योंकि क्षेत्र में अभी भी अन्य तेंदुओं की मौजूदगी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

