राधेश्याम शर्मा
मेड़ता सिटी। ‘जन्म-जन्म का साथ…’ ये कहीं फिल्मों में आपने जरूर सुना होगा। इसी वाक्य को चरितार्थ करते एक संयोग ने सभी को खुशी के आंसू से भावुक कर दिया। 1 साल 2 महीने 21 दिन पहले मेड़ता के पास मोकलपुर व सातलावास के रहने वाले दो खास दोस्तों की चितौड़गढ़ में झरने में डूबने से मौत हो गई थी। अब उन्हीं दोनों दोस्तों की मांओं की कोख से पुत्रों का जन्म हुआ है। संयोग यह कि दोनों के जन्म में सिर्फ 12 घंटे का अंतर है। एक खास बात यह भी है कि दोनों माताओं ने नसबंदी करवा ली थी। जिन्हें वापस खुलवाया और फिर उन दोनों ने अब बेटों का जन्म दिया है।
दरअसल, मोकलपुर गांव निवासी नरेंद्र बेड़ा और सातलावास निवासी नरेंद्र मुंवाल चित्तौड़गढ़ के बस्सी में नर्सिंग सेकंड ईयर के छात्र थे और 14 जुलाई 2025 को अपने तीसरे दोस्त जोधपुर निवासी प्रदीप विश्नोई के साथ निलिया महादेव का झरना में पिकनिक मनाने गए थे। पानी के तेज बहाव के कारण डूबने से तीनों युवकों की मौत हो गई थी।
मोकलपुर निवासी नरेंद्र बेड़ा व सातलावास निवासी नरेंद्र मुंवाल, दोनों ही अपने पिता की इकलौती संतान थी। घटना से मोकलपुर और सातलावास के साथ क्षेत्र में शोक की लहर छा गई। अब इसे कुदरत का करिश्मा कहे या संयोग लेकिन नरेंद्र बेड़ा का शव उसी दिन मिल गया था और अंतिम संस्कार उसी दिन हो गया। जबकि नरेंद्र मुवाल का शव करीब 12 घंटे बाद मिला और अंतिम संस्कार दूसरे दिन हुआ। और अब मृतक दोनों नरेंद्र की माताओं ने 12 घंटे के ही अंतराल से पुत्रों का जन्म दिया है।
नसबंदी खुलवाने के बाद मिला संतान सुख
उल्लेखनीय है कि मृतक नरेंद्र बेड़ा व मुंवाल, दोनों के माताओं ने नसबंदी का ऑपरेशन करवा रखा था। लेकिन दोनों ने जयपुर में अपनी नसबंदी वापस खुलवाई। जिसके बाद ऐसा संयोग बना कि दुनिया से एकसाथ विदाम लेने वाले दोस्तों की माताओं ने सिर्फ 12 के घंटों के अंतराल में दोनों पुत्रों को जन्मज दिया है। यह वाक्या पूरे क्षेत्र में अभीम चर्चा का विषय बना हुआ है।
4 को शाम 7 बजे पहले तो 5 अक्टूबर की सुबह 9 बजे दूसरे का जन्म
मोकलपुर निवासी सुरेंद्र लटियाल ने बताया कि मोकलुपर निवासी बाबूलाल बेड़ा को 4 अक्टूबर की शाम 7 बजे पुत्र संतान सुख मिला। वहीं इसके 12 घंटे बाद 5 अक्टूबर की सुबह 9 बजे सातलावास निवासी सीताराम के आंगन में खुशियों ने दस्तक दी। उल्लेखनीय है कि नरेंद्र बेड़ा व नरेंद्र मुंवाल बचपन के गहरे दोस्त थे। कक्षा 6 से इनकी दोस्ती शुरू हुई और 12वीं तक साथ पढ़े। नर्सिंग में मेरिट छूटने पर दोनों को एक ही कॉलेज मिला। हादसे वाले दिन भी दोनों साथ ही चित्तौड़गढ़ की झील में घूमने गए थे।

