RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट बढ़ाने का फैसला हुआ है। रेपो रेट को 0.25 फीसदी बढ़ा दिया गया है। आरबीआई ने साढ़े 3 साल से अधिक समय में यह पहली रेट हाइक की है। रेपो रेट में बढ़ोतरी से बैंकों को आरबीआई से मिलने वाला कर्ज महंगा हो जाता है। इससे बैंक ग्राहकों के लिए लोन पर ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं।
पहले फरवरी 2023 में बढ़ाई थी ब्याज दर
तीन दिन तक चली RBI MPC की बैठक बुधवार को खत्म होने के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने यह घोषणा की। करीब साढ़े तीन साल के अंतराल के बाद आरबीआई ने रेपो रेट में बढ़ोतरी की है। इससे पहले फरवरी 2023 में रिजर्व बैंक ने प्रमुख ब्याज दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी कर इसे 6.50% किया था। इसके बाद 2023-24 के दौरान रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया। वहीं, 2025 में आरबीआई ने ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला शुरू किया था। इस समय पॉलिसी रेपो रेट 5.25% है।
‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ किया पॉलिसी का रुख
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपने रुख को न्यूट्रल से बदलकर कैलिब्रेटेड टाइटनिंग कर दिया है। मौद्रिक नीति समिति का यह फैसला अगस्त की पॉलिसी से अलग है। अगस्त में एमपीसी ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा था और पॉलिसी का रुख न्यूट्रल बनाए रखा था। उस समय समिति महंगाई के आउटलुक और ग्रोथ तथा महंगाई के बीच संतुलन को लेकर ज्यादा स्पष्टता का इंतजार कर रही थी। इस बार रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजह बढ़ता महंगाई जोखिम और वैश्विक स्तर पर ऊंची बॉन्ड यील्ड को बताया गया। इन परिस्थितियों ने मौद्रिक नीति को और सख्त करने की जरूरत को मजबूत किया। रेपो रेट में बढ़ोतरी का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया है।
क्या है SDF और MSF?
रेपो रेट बढ़ने के बाद स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5.25% हो गया है। वहीं, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट और बैंक रेट 5.75% पर हैं। आरबीआई एमपीसी ने बहुमत के आधार पर अपने रुख को कैलिब्रेटेड टाइटनिंग करने का फैसला किया।
महंगाई को लेकर RBI का सख्त रुख
अक्टूबर में रेपो रेट बढ़ाने का फैसला इस बात को दिखाता है कि महंगाई से जुड़े चक्रीय जोखिम अब कम नहीं हैं। नीति के रुख में बदलाव से एमपीसी का महंगाई को लेकर सख्त रुख भी साफ होता है। ऊंची तेल कीमतों, वैश्विक स्तर पर सख्त वित्तीय परिस्थितियों और खराब मौसम के कारण खाद्य महंगाई बढ़ने के जोखिम के बीच नीति निर्माताओं ने इन जोखिमों के गहराने से पहले महंगाई पर नियंत्रण को मजबूत करने का फैसला किया है।

