कूनो नेशनल पार्क में चीता प्रोजेक्ट की सफलता के बाद अब मध्यप्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) में चीतों की बसाहट होने जा रही है। 7 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव यहां कूनो से लाए जा रहे दो चीतों को रिलीज करेंगे। इसके लिए मुहली रेंज में पांच बोमा तैयार किए गए हैं। करीब 439 हेक्टेयर क्षेत्र में चीतों की सुरक्षा और निगरानी के इंतजाम किए गए हैं। 12.55 बजे पहुंचेंगे CM, 2.50 बजे भोपाल रवाना होंगे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 7 अक्टूबर को भोपाल से हेलीकॉप्टर से रवाना होकर दोपहर 12.55 बजे मुहली पहुंचेंगे। यहां वे चीतों को रिलीज करने के साथ वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन समारोह में शामिल होंगे। इस दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री दोपहर 2.50 बजे मुहली से भोपाल के लिए रवाना होंगे। चीतों की सुरक्षा के लिए करीब 439 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष इंतजाम किए गए हैं। वन विभाग उनकी निगरानी, सुरक्षा और स्वास्थ्य की लगातार मॉनिटरिंग करेगा। चीतों के साथ बुंदेलखंड में पर्यटन की उम्मीद कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के मुताबिक, चीतों का आगमन सिर्फ वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं है। इससे सागर और बुंदेलखंड में पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। चीतों की सुरक्षा के लिए करीब 439 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष इंतजाम किए गए हैं। वन विभाग उनकी निगरानी, सुरक्षा और स्वास्थ्य की लगातार मॉनिटरिंग करेगा। मध्यप्रदेश में तीसरा चीता ठिकाना बनेगा नौरादेही नौरादेही में दो चीतों के आने के बाद मध्यप्रदेश में चीतों के तीन प्रमुख ठिकाने हो जाएंगे- कूनो नेशनल पार्क, गांधी सागर अभयारण्य और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही)। चीतों के आगमन को प्रदेश में चल रही चीता पुनर्स्थापना परियोजना के अगले चरण के तौर पर देखा जा रहा है। तीनों के शिकार अलग, इसलिए एक ही जंगल में रह सकते हैं वन्यजीव शास्त्रियों के अनुसार, चीता, तेंदुआ और बाघ के शिकार का तरीका और उनके टारगेट अलग-अलग होते हैं। इसलिए एक ही जंगल में इनके बीच संसाधनों को लेकर सीधी प्रतिस्पर्धा कम रहती है। आमतौर पर चीता बाघ और तेंदुए से दूरी बनाए रखता है। जिस तरह तेंदुआ बाघ की मौजूदगी के बावजूद अपने लिए अलग शिकार और क्षेत्र तलाशकर सर्वाइव करता है, उसी तरह चीते भी अलग शिकार पर निर्भर रह सकते हैं। चीतों के लिए कूनो से पहले नौरादेही को चुना गया था चीतों की बसाहट की पहल शुरू होने पर भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून ने देश में चीतों की बसाहट के लिए सबसे पहले सागर के नौरादेही अभयारण्य को चिन्हित किया था। करीब 15 साल पहले, वर्ष 2010 में यहां सर्वे किया गया था। इसमें नौरादेही की मुहली, सिंहपुर और झापन रेंज को चीतों की बसाहट के लिए अनुकूल माना गया था। परिस्थितियों के अनुरूप सबसे पहले चीतों की बसाहट कूनो में की गई। अब नौरादेही के टाइगर रिजर्व बनने के बाद यहां भी चीतों की बसाहट की प्रक्रिया शुरू की गई है। कूनो से नर थोलो और मादा CCB-3 वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व आएंगे 5 अक्टूबर को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में भारत में जन्मी मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। इसके साथ देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60 हो गई है। इनमें 41 चीते भारत में जन्मे हैं। अब 7 अक्टूबर को कूनो से नर चीता थोलो और मादा CCB-3 को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व लाया जाएगा। दोनों चीतों के स्थानांतरण के बाद कूनो में 54 चीते रह जाएंगे। मध्यप्रदेश में चीता पुनर्स्थापना अभियान के तहत गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में भी चार चीते मौजूद हैं। इनमें दक्षिण अफ्रीकी मूल के नर चीते प्रभास और पावक, मादा धीरा तथा सितंबर 2026 में बोत्सवाना से लाकर विमुक्त की गई मादा राधा शामिल हैं। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में थोलो और CCB-3 की विमुक्ति के साथ मध्यप्रदेश में चीता पुनर्स्थापना अभियान एक नए चरण में प्रवेश करेगा।

