गोधरा. दाहोद जिले के धानपुर क्षेत्र में कुदरत का एक अनोखा रूप देखने को मिला। अगासवणी गांव के एक खेत में ग्रामीणों को करीब छह इंच लंबा दो सिर और चार आंखों वाला वुल्फ स्नेक दिखाई दिया। सांप को देखकर ग्रामीण हैरान रह गए और उन्होंने दाहोद के प्रकृति मित्र मंडल को दी। सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और वन विभाग के सहयोग से सांप का रेस्क्यू किया। बताया गया कि यह सांप करीब छह महीने का बच्चा है। सामान्य सांपों से अलग इसके दो सिर होने की जानकारी सामने आने के बाद इसे देखने के लिए आसपास के लोग भी मौके पर पहुंचने लगे।
वुल्फ स्नेक नहीं होता है विषैला
मंडल के विशेषज्ञों के अनुसार, रेस्क्यू किया गया सांप वुल्फ स्नेक है, जिसे स्थानीय रूप से वरु दांती कहा जाता है। यह विषैला सांप नहीं है और इंसानों के लिए सामान्यतः हानिकारक नहीं होता। यह छिपकलियों और छोटे जीवों को अपना भोजन बनाता है और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी उपयोगी माना जाता है। फिलहाल प्रकृति मित्र मंडल इस दुर्लभ सांप के बच्चे की देखभाल कर रहा है।
आनुवंशिक विकृति के कारण दो सिर
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ आनुवंशिक कारणों से कभी-कभी सांपों में दो सिर विकसित हो जाते हैं। वैज्ञानिक भाषा में इस स्थिति को बाइसिफली कहा जाता है। ऐसी स्थिति भ्रूण के विकास के दौरान शरीर के पूरी तरह अलग न होने से उत्पन्न हो सकती है। ऐसे सांपों में दोनों सिर अलग-अलग मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के साथ काम कर सकते हैं। इसके कारण भोजन करने, दिशा तय करने और खतरे से बचने के दौरान दोनों सिरों के बीच समन्वय की चुनौती रहती है। यही कारण है कि दो सिर वाले सांपों के लिए प्राकृतिक वातावरण में लंबे समय तक जीवित रहना कठिन माना जाता है।
गुजरात का पहला, देश का पांचवां मामला होने का दावा
मंडल ने दावा किया कि दाहोद में मिला यह दो सिर वाला वुल्फ स्नेक गुजरात में इस तरह का पहला और देश में पांचवां है। भारत में इससे पहले भी दो सिर वाले सांप-ओडिशा ( वुल्फ स्नेक), महाराष्ट्र (रसेल वाइपर), पश्चिम बंगाल (मोनोकल्ड कोबरा) और छत्तीसगढ़ (सैंड बोआ) में मिल चुके हैं।

