Kerala Transplant Institute: वीणा जॉर्ज का दावा, पिछली LDF सरकार ने ही किया था उद्घाटन

Kerala Transplant Institute: वीणा जॉर्ज का दावा, पिछली LDF सरकार ने ही किया था उद्घाटन

पथनमथिट्टा (केरलम), छह अक्टूबर पूर्व स्वास्थ्य राज्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने मंगलवार को दावा किया कि मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन द्वारा घोषित केरलम इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट का एलडीएफ सरकार इस साल फरवरी में उद्घाटन कर चुकी है। जॉर्ज ने एक टीवी चैनल से कहा कि हाल में उन्होंने सतीशन की ओर से 30 महीने के भीतर कोझिकोड में इस संस्थान की स्थापना किए जाने की घोषणा से जुड़ी खबर देखी तो उन्हें आश्चर्य हुआ। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे मन में पहला विचार आया कि यह कैसा मजाक है।

यह पिछली सरकार की परियोजना है। इसके निर्माण कार्य का उद्घाटन पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने सात फरवरी 2026 को किया था।’’
माकपा नेता ने कहा, ‘‘पिछली सरकार ने 2022-23 में इस परियोजना की आवश्यकता पर विचार करना शुरू किया था और इसके लिए कोझिकोड में जमीन भी चिह्नित की थी। परियोजना के लिए करीब 643 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी गई थी और इसे केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (केआईआईएफबी) के जरिए कार्यान्वित किया जाना था।’’
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इससे पहले टाटा समूह से जुड़ी जहाज निर्माण परियोजना की भी इसी तरह घोषणा की थी।

सतीशन ने तीन अक्टूबर को कहा था कि शेवायूर गोल्फ लिंक रोड पर 20 एकड़ जमीन में 271 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस संस्थान में अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी और अंग प्रत्यारोपण सर्जरी से जुड़ी सभी सेवाएं एक ही जगह उपलब्ध होने से इलाज की लागत मौजूदा खर्च की एक-तिहाई तक कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा था कि नए अस्पताल परिसर में 350 बिस्तर और 10 ऑपरेशन थिएटर होंगे। शेवायूर में इसी परिसर में 35 करोड़ रुपये की लागत से पूरी तरह सुसज्जित त्वचा रोग अस्पताल भी बनाया जाएगा।

जॉर्ज ने दावा किया कि पिछली सरकार ने संस्थान के भवन के निर्माण तक उसके संचालन के लिए कोझिकोड सरकारी कॉलेज में जगह भी चिह्नित की थी, एक विशेष अधिकारी नियुक्त किया था और इसके लिए 60 पद सृजित किए थे। उन्होंने कहा, ‘‘पिछली सरकार ने संस्थान के कामकाज के तरीके को लेकर एक दस्तावेज भी तैयार किया था।’’
स्वास्थ्य मंत्री जॉर्ज ने कहा कि 643 करोड़ रुपये की लागत वाली, यह केरलम की एक बड़ी परियोजना थी और इसकी लागत घटाकर 271 करोड़ रुपये नहीं की जानी चाहिए।

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