गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। सपा प्रत्याशी संजयन त्रिपाठी ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मंगलवार को सपा प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि एक अक्टूबर को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन किया था। अब सपा की सदस्यता लेने के बाद पार्टी ने उन्हें अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। संजयन त्रिपाठी ने भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी पर निशाना साधते हुए कहा कि 18 साल तक जिस शिक्षक संगठन ने उन्हें तीन बार एमएलसी बनाकर सदन भेजा, उसे छोड़कर राजनीतिक दल का दामन थाम लेना ही पाला बदलने का सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि ध्रुव त्रिपाठी के नामांकन कार्यक्रम में शिक्षक नेताओं और शिक्षकों के बजाय भाजपा के मंत्री, सांसद और विधायक नजर आए। उन्होंने दावा किया कि मंच पर शिक्षक संगठन के नेताओं की मौजूदगी नहीं थी। यह इस बात का संकेत है कि राजनीतिक दल से जुड़ने के बाद शिक्षक संगठन का महत्व कम हो जाता है। पुरानी पेंशन पर बोले- समाधान सत्ता के पास संजयन त्रिपाठी ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली का समाधान सिर्फ सत्ता के पास है। सपा सरकार बनने पर अखिलेश यादव ने पुरानी पेंशन बहाल करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वित्तविहीन शिक्षकों के सम्मानजनक मानदेय का मुद्दा भी उन्होंने पार्टी नेतृत्व के सामने रखा है। उन्होंने ध्रुव त्रिपाठी पर तंज कसते हुए कहा कि जब किसी नेता के पास काम का जवाब नहीं होता तो वह धरना-प्रदर्शन कर यह दिखाने की कोशिश करता है कि वह संघर्ष कर रहा है। उन्होंने इसे समझाने के लिए बंदर और शेर की कहानी भी सुनाई। बोले- शिक्षकों की नाराजगी का उन्हें पहले से आभास था संजयन त्रिपाठी ने कहा कि ध्रुव त्रिपाठी को शिक्षकों की नाराजगी का आभास पहले ही हो गया था। इसी वजह से उन्होंने शिक्षक संगठनों के बजाय राजनीतिक दल का सहारा लिया। उन्होंने कहा कि अगर शिक्षक उनसे नाराज नहीं होते तो उन्हें संगठन छोड़कर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। सीबीएसई समर्थन पर भी दिया जवाब सीबीएसई गुट को शोषित संगठन बताए जाने पर संजयन त्रिपाठी ने कहा कि इन संस्थानों में हजारों शिक्षक काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी के दौर में सम्मानजनक रोजगार मिलना बड़ी बात है। ऐसे शिक्षकों को शोषित बताना उनके सम्मान को ठेस पहुंचाने जैसा है।

