पुलिस पर फायरिंग करने वाले को नहीं मिली जमानत:ट्रायल शुरू न होने का हवाला दिया, पुलिस बोली – आरोपी हार्डकोर गैंगस्टर

पुलिस पर फायरिंग करने वाले को नहीं मिली जमानत:ट्रायल शुरू न होने का हवाला दिया, पुलिस बोली – आरोपी हार्डकोर गैंगस्टर

पंजाब के मोहाली में पुलिस पार्टी पर फायरिंग करने के मामलों में नामजद आरोपी गौरव कपिला की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड और अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसे राहत देने से इनकार कर दिया। सरकारी वकील ने अदालत में तर्क दिया कि आरोपी हॉर्डकोर गैंगस्टर है। अदालत ने यह भी नोट किया कि मामले के सह-आरोपी आकाशदीप की जमानत याचिका भी पहले (17 दिसंबर 2025 को) खारिज की जा चुकी है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने गौरव कपिला की जमानत अर्जी खारिज कर दी। इसके साथ ही, अदालत ने डेराबस्सी कोर्ट से चालान सत्र अदालत तक न पहुंचने पर चिंता व्यक्त की और संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट को इस मामले को देखने के निर्देश दिए, ताकि मुकदमे की सुनवाई जल्द से जल्द शुरू हो सके। यह है सारा मामला यह मामला 19 मई 2025 का है। जब सीआईए (CIA) स्टाफ जालंधर के इंस्पेक्टर सुरिंदर कुमार को गुप्त सूचना मिली थी कि आकाश और गौरव कपिला ढकोली के मेट्रो टाउन में रह रहे हैं और उनके पास अवैध हथियार मौजूद हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने जब ढकोली में एक गाड़ी (PB-60-A-8101) में सवार आरोपियों को रोकने की कोशिश की, तो कार चला रहे गौरव कपिला ने भागने के प्रयास में पुलिस की गाड़ी को टक्कर मार दी। पुलिस से बचने के लिए आरोपियों ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। जवाबी कार्रवाई में हुई क्रॉस फायरिंग के दौरान आकाश के बाएं हाथ और गौरव कपिला की बाईं टांग में गोली लगी, जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस ने गौरव कपिला के पास से एक .32 बोर की पिस्तौल, मैगजीन और कारतूस बरामद किया था। इस संबंध में थाना ढकोली जीरकपुर में बीएनएस (BNS) की विभिन्न धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। अदालत में दोनों पक्षों में ऐसे चली बहस बचाव पक्ष की दलील: आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि गौरव कपिला 22 मई 2025 से हिरासत में है और जांच पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि त्वरित सुनवाई आरोपी का मौलिक अधिकार है और केस की फाइल ट्रेस न होने के कारण ट्रायल शुरू नहीं हो सका है, इसलिए आरोपी को जमानत दी जाए। सरकारी वकील का विरोध: अतिरिक्त सरकारी वकील पीपीएस बराड़ ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि आरोपी एक हार्डकोर गैंगस्टर है, जिसके खिलाफ हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत कम से कम 7 अन्य मामले दर्ज हैं। अपराध की गंभीरता को देखते हुए केवल लंबी हिरासत जमानत का आधार नहीं हो सकती।

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