बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार शर्मा ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर पलटवार किया है। कहा कि जिस पार्टी के शासन में बूथ लूटना, फर्जी मतदाता खड़ा करना और मतपेटी का बदलना शासन की शैली थी, वही पार्टी आज निर्वाचन आयोग को कठपुतली बता रही है। यह आरोप नहीं, आत्मस्वीकृति है। नीरज कुमार शर्मा ने कहा है कि तेजस्वी यादव लोकतंत्र बचाने नहीं निकले हैं। वे उस साफ वोटर लिस्ट को बदनाम करने निकले हैं, जिसमें मृत, डुप्लीकेट और पलायन कर चुके नाम हटे हैं। वोट चोरी का असली कारोबार तब चला, जब राजद के राज में जिंदा मतदाता घर से नहीं निकल पाता था और मृत नाम बूथ पर वोट डाल आते थे। SIR वोट चोरी नहीं, सूची की सफाई है। विशेष गहन पुनरीक्षण कोई गुप्त अभियान नहीं है। ‘दावा बूथ पर दाखिल करना था, प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंसू बहाना नहीं’ नीरज ने कहा कहा कि 27 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार SIR में आयोग के अधिकार और प्रक्रिया को बरकरार रखा। आयोग के आंकड़ों के अनुसार ड्राफ्ट में करीब 65 लाख नाम नहीं आए। जिसमें करीब 22 लाख मृतक, 36 लाख स्थानांतरित और 7 लाख डुप्लीकेट थे। समावेशन के दावे इस संख्या के सामने नगण्य रहे। राजद के ही 47506 बूथ स्तरीय एजेंट मैदान में थे। अगर सच में जिंदा वोटर काटे गए, तो दावा बूथ पर दाखिल करना था, प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंसू बहाना नहीं। मुख्य चुनाव आयुक्त पर व्यक्तिगत हमला संस्था पर हमला है। ज्ञानेश कुमार को मोदी-शाह का नमूना कहना वही भाषा है, जो ईवीएम हारने पर भी बोली जाती रही। चयन पैनल का प्रारूप संसद के कानून से बना है, किसी बंद कमरे की साजिश से नहीं। कार्यकाल के बाद की प्रक्रिया, रिकॉर्ड की अवधि और पैनल की संरचना अदालत में चुनौती योग्य मसले हैं, एविडेंस मिटाने के जुमले नहीं। आज 5 अक्टूबर को ही सर्वोच्च न्यायालय ने मुख्य चुनाव आयुक्त को अंतरिम रूप से हटाने से इनकार किया। जो आरोप अदालत में नहीं टिकते, उन्हें सड़क पर नारे बना देना विपक्ष की मजबूरी है, प्रमाण नहीं।
‘वोट खरीदना महिलाओं का अपमान है’ नीरज ने कहा दस हजार रुपये वोट खरीद नहीं, अधिसूचित योजना है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना कैबिनेट से पारित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण है। पात्र परिवार की महिला को स्वरोजगार की पहली किस्त सीधे बैंक खाते में जाती है। इसे चुनाव वाले दिन खाते में पैसे डालकर वोट खरीदना कहना बिहार की महिलाओं का अपमान है। जीविका दीदियां स्वयं-सहायता समूह की कार्यकर्ता हैं, भाजपा की पोलिंग एजेंट नहीं। लेवल प्लेइंग फील्ड का मतलब विपक्ष की हार को योजना बंद करवाना नहीं होता। 500 करोड़ खजाने से वोट खरीदे गए बिना कागज का नारा है। अगर राजकोष से अवैध निकासी का प्रमाण है, तो रास्ता महालेखाकार, अदालत और निर्वाचन आयोग है, फेसबुक लाइव नहीं। बिहार की राजकोषीय कमजोरी की जड़ उन वर्षों में है, जब उद्योग पलायन कर गया और अपहरण उद्योग फलता-फूलता रहा। सड़क, बिजली, बालिका शिक्षा और केंद्रीय हस्तांतरण इसी कहानी का दूसरा पक्ष हैं, जिसे तेजस्वी यादव जान-बूझकर छिपाते हैं। कानून-व्यवस्था पर उपदेश उसी पार्टी से है जिसने जंगलराज लिखा। पुलिस स्टेट और छात्रों पर हथियार चलने का जिक्र कर पूरे राज्य को बदनाम करना राजद की पुरानी चाल है। एक घटना की न्यायिक जांच हो, यह अलग बात है, लेकिन 1990 से 2005 का बिहार याद दिलाता है कि अपहरण, रंगदारी और बूथ कब्जा तब शासन-व्यवस्था थी।
बैलेट पेपर की याद उन्हीं को आती है, जिन्हें बूथ पर कब्जे की आदत थी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निजी हमला एजेंडा है, तर्क नहीं। दशकों पुराने, राजनीति में बार-बार दोहराए गए आरोप को आज फिर हत्या का मुकदमा कहकर परोसना राजद की आदत है। अदालत तय करेगी क्या टिकता है और क्या नहीं। प्रेस कॉन्फ्रेंस न तो चार्जशीट है, न फैसला। मुख्यमंत्री पर कीचड़ इसलिए उछाला जा रहा है, क्योंकि विकास, महिला योजना और जनादेश तीनों मोर्चों पर जवाब नहीं है। 7 और 8 अक्टूबर का कार्यक्रम आंदोलन नहीं, नैरेटिव बचाने की कोशिश है। प्रखंड आक्रोश मार्च, जिला धरना और विधानसभा से राजभवन मार्च उसी पटकथा के दृश्य हैं, जो दिल्ली की इंडिया गठबंधन बैठक में लिखी गई। राजभवन संवैधानिक कार्यालय है, विपक्ष का मंच नहीं। नीरज कुमार शर्मा ने कहा कि भाजपा स्पष्ट करती है कि निर्वाचन आयोग संवैधानिक संस्था है। उस पर आरोप प्रमाण के साथ अदालत में लगे। मृत और डुप्लीकेट नाम हटना किसी जाति या दल के खिलाफ षड्यंत्र नहीं। जो नाम गलती से कटा हो, उसके लिए दावा-आपत्ति का रास्ता खुला है और खुला रहेगा। बैलेट पेपर की याद उन्हीं को आती है, जिन्हें बूथ पर कब्जे की आदत थी। बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार शर्मा ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर पलटवार किया है। कहा कि जिस पार्टी के शासन में बूथ लूटना, फर्जी मतदाता खड़ा करना और मतपेटी का बदलना शासन की शैली थी, वही पार्टी आज निर्वाचन आयोग को कठपुतली बता रही है। यह आरोप नहीं, आत्मस्वीकृति है। नीरज कुमार शर्मा ने कहा है कि तेजस्वी यादव लोकतंत्र बचाने नहीं निकले हैं। वे उस साफ वोटर लिस्ट को बदनाम करने निकले हैं, जिसमें मृत, डुप्लीकेट और पलायन कर चुके नाम हटे हैं। वोट चोरी का असली कारोबार तब चला, जब राजद के राज में जिंदा मतदाता घर से नहीं निकल पाता था और मृत नाम बूथ पर वोट डाल आते थे। SIR वोट चोरी नहीं, सूची की सफाई है। विशेष गहन पुनरीक्षण कोई गुप्त अभियान नहीं है। ‘दावा बूथ पर दाखिल करना था, प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंसू बहाना नहीं’ नीरज ने कहा कहा कि 27 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार SIR में आयोग के अधिकार और प्रक्रिया को बरकरार रखा। आयोग के आंकड़ों के अनुसार ड्राफ्ट में करीब 65 लाख नाम नहीं आए। जिसमें करीब 22 लाख मृतक, 36 लाख स्थानांतरित और 7 लाख डुप्लीकेट थे। समावेशन के दावे इस संख्या के सामने नगण्य रहे। राजद के ही 47506 बूथ स्तरीय एजेंट मैदान में थे। अगर सच में जिंदा वोटर काटे गए, तो दावा बूथ पर दाखिल करना था, प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंसू बहाना नहीं। मुख्य चुनाव आयुक्त पर व्यक्तिगत हमला संस्था पर हमला है। ज्ञानेश कुमार को मोदी-शाह का नमूना कहना वही भाषा है, जो ईवीएम हारने पर भी बोली जाती रही। चयन पैनल का प्रारूप संसद के कानून से बना है, किसी बंद कमरे की साजिश से नहीं। कार्यकाल के बाद की प्रक्रिया, रिकॉर्ड की अवधि और पैनल की संरचना अदालत में चुनौती योग्य मसले हैं, एविडेंस मिटाने के जुमले नहीं। आज 5 अक्टूबर को ही सर्वोच्च न्यायालय ने मुख्य चुनाव आयुक्त को अंतरिम रूप से हटाने से इनकार किया। जो आरोप अदालत में नहीं टिकते, उन्हें सड़क पर नारे बना देना विपक्ष की मजबूरी है, प्रमाण नहीं।
‘वोट खरीदना महिलाओं का अपमान है’ नीरज ने कहा दस हजार रुपये वोट खरीद नहीं, अधिसूचित योजना है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना कैबिनेट से पारित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण है। पात्र परिवार की महिला को स्वरोजगार की पहली किस्त सीधे बैंक खाते में जाती है। इसे चुनाव वाले दिन खाते में पैसे डालकर वोट खरीदना कहना बिहार की महिलाओं का अपमान है। जीविका दीदियां स्वयं-सहायता समूह की कार्यकर्ता हैं, भाजपा की पोलिंग एजेंट नहीं। लेवल प्लेइंग फील्ड का मतलब विपक्ष की हार को योजना बंद करवाना नहीं होता। 500 करोड़ खजाने से वोट खरीदे गए बिना कागज का नारा है। अगर राजकोष से अवैध निकासी का प्रमाण है, तो रास्ता महालेखाकार, अदालत और निर्वाचन आयोग है, फेसबुक लाइव नहीं। बिहार की राजकोषीय कमजोरी की जड़ उन वर्षों में है, जब उद्योग पलायन कर गया और अपहरण उद्योग फलता-फूलता रहा। सड़क, बिजली, बालिका शिक्षा और केंद्रीय हस्तांतरण इसी कहानी का दूसरा पक्ष हैं, जिसे तेजस्वी यादव जान-बूझकर छिपाते हैं। कानून-व्यवस्था पर उपदेश उसी पार्टी से है जिसने जंगलराज लिखा। पुलिस स्टेट और छात्रों पर हथियार चलने का जिक्र कर पूरे राज्य को बदनाम करना राजद की पुरानी चाल है। एक घटना की न्यायिक जांच हो, यह अलग बात है, लेकिन 1990 से 2005 का बिहार याद दिलाता है कि अपहरण, रंगदारी और बूथ कब्जा तब शासन-व्यवस्था थी।
बैलेट पेपर की याद उन्हीं को आती है, जिन्हें बूथ पर कब्जे की आदत थी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निजी हमला एजेंडा है, तर्क नहीं। दशकों पुराने, राजनीति में बार-बार दोहराए गए आरोप को आज फिर हत्या का मुकदमा कहकर परोसना राजद की आदत है। अदालत तय करेगी क्या टिकता है और क्या नहीं। प्रेस कॉन्फ्रेंस न तो चार्जशीट है, न फैसला। मुख्यमंत्री पर कीचड़ इसलिए उछाला जा रहा है, क्योंकि विकास, महिला योजना और जनादेश तीनों मोर्चों पर जवाब नहीं है। 7 और 8 अक्टूबर का कार्यक्रम आंदोलन नहीं, नैरेटिव बचाने की कोशिश है। प्रखंड आक्रोश मार्च, जिला धरना और विधानसभा से राजभवन मार्च उसी पटकथा के दृश्य हैं, जो दिल्ली की इंडिया गठबंधन बैठक में लिखी गई। राजभवन संवैधानिक कार्यालय है, विपक्ष का मंच नहीं। नीरज कुमार शर्मा ने कहा कि भाजपा स्पष्ट करती है कि निर्वाचन आयोग संवैधानिक संस्था है। उस पर आरोप प्रमाण के साथ अदालत में लगे। मृत और डुप्लीकेट नाम हटना किसी जाति या दल के खिलाफ षड्यंत्र नहीं। जो नाम गलती से कटा हो, उसके लिए दावा-आपत्ति का रास्ता खुला है और खुला रहेगा। बैलेट पेपर की याद उन्हीं को आती है, जिन्हें बूथ पर कब्जे की आदत थी।

