मेरठ के टीपीनगर क्षेत्र की एक महिला ने किश्तों पर ली गई महिंद्रा पिकअप बेचने के लिए एक व्यक्ति को दी। आरोप है कि पिकअप को बेचने के बजाय उसे हरिद्वार ले जाकर कटवा दिया गया। महिला की शिकायत के बाद पुलिस ने हरिद्वार पहुंचकर कटी हुई गाड़ी बरामद भी कर ली। आरोप है कि एफआईआर दर्ज किए बिना ही आरोपियों को छोड़ दिया गया। पीड़िता ने टीपीनगर थाने के दो दरोगाओं पर आरोपियों से मिलीभगत करने और उस पर कटी हुई गाड़ी लेने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है। सोमवार को पीड़िता ने डीआईजी रेंज कलानिधि नैथानी से शिकायत की। डीआईजी ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। दो तस्वीरें देखें… टीपीनगर क्षेत्र निवासी सुदेश ने बताया कि उन्होंने 6 नवंबर, 2017 को महिंद्रा पिकअप गाड़ी किश्तों पर खरीदी थी। आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण वह समय पर किश्तें जमा नहीं कर पा रही थीं। इसके चलते उन्होंने गाड़ी बेचकर पूरी किश्त चुकाने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने ब्रह्मपुरी के रशीद नगर निवासी नईम अहमद से संपर्क किया। दोनों के बीच तय हुआ कि गाड़ी बेचने के बाद उससे मिलने वाली रकम से पूरी किश्त जमा कर दी जाएगी। सुदेश ने पिकअप नईम अहमद को दे दी। काफी समय तक वह गाड़ी बिकने का इंतजार करती रहीं। कई बार संपर्क करने के बावजूद गाड़ी के संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। 21 अगस्त को पहुंचीं तो गाड़ी गायब मिली
पीड़िता का कहना है कि 21 अगस्त को जब वह नईम अहमद के पास पहुंचीं तो वहां पिकअप नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने पहले टीपीनगर थाने में शिकायत की। वहां से उन्हें ब्रह्मपुरी थाने भेज दिया गया। ब्रह्मपुरी थाने में भी कार्रवाई नहीं होने पर वह दोबारा पुलिस के चक्कर काटती रहीं। दोनों थानों से कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने एसएसपी से शिकायत की। एसएसपी ने मामले में टीपीनगर पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए। बिना एफआईआर हिरासत में लेने का आरोप
पीड़िता का आरोप है कि एसएसपी के निर्देश के बाद टीपीनगर थाने के दरोगा मंजीत और कमल सिंह ने बिना एफआईआर दर्ज किए नईम अहमद और उसके दो साथियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि पिकअप को मिडियेटर रितुराज के माध्यम से हरिद्वार ले जाकर कटवा दिया गया है। इसके बाद दोनों दरोगा हरिद्वार पहुंचे। पुलिस ने वहां से पिकअप के कटे हुए हिस्से बरामद किए। हालांकि तब तक गाड़ी को काटा जा चुका था। दरोगा बोला- आरोपी पकड़े गए, जल्द जेल जाएंगे
सुदेश का कहना है कि हरिद्वार से पुलिस कार्रवाई के दौरान दरोगा मंजीत ने उन्हें सूचना दी कि आरोपी पकड़े गए हैं और जल्द ही उन्हें जेल भेज दिया जाएगा। इससे उन्हें उम्मीद जगी कि उनकी शिकायत पर कार्रवाई होगी। लेकिन आरोप है कि मेरठ लौटने के बाद मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। पीड़िता का दावा है कि आरोपियों को छोड़ दिया गया और उनके खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। कटी हुई पिकअप को क्रेन की मदद से दोनों दरोगा मेरठ लेकर आए। पीड़िता पर ही कटी गाड़ी लेने का दबाव
सुदेश का आरोप है कि नईम अहमद से दोनों दरोगाओं ने सांठगांठ कर ली। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उस पर ही दबाव बनाया गया कि वह जिस स्थिति में गाड़ी बरामद हुई है, उसी हालत में उसे ले ले। पीड़िता का कहना है कि जिस गाड़ी को उसने पूरी रकम जुटाने और किश्त चुकाने के लिए सौंपा था, उसके टुकड़े मिलने के बावजूद पुलिस आरोपियों पर कार्रवाई नहीं कर रही है। उसने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अफसरों से शिकायत के बाद धमकाने का आरोप
सुदेश के मुताबिक उसने मामले की शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों से की। आरोप है कि शिकायत के बाद संबंधित दरोगा उसे धमका रहे हैं। इससे वह बेहद डरी हुई है। पीड़िता ने वरिष्ठ अधिकारियों से सुरक्षा और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। सुदेश का कहना है कि उनके पास दरोगा से बातचीत की ऑडियो रिकार्डिंग भी है। डीआईजी ने दिए जांच के आदेश
सोमवार को सुदेश डीआईजी रेंज कलानिधि नैथानी से मिली और पूरे मामले की शिकायत की। उसने पिकअप दिए जाने से लेकर हरिद्वार में उसके काटे जाने, पुलिस द्वारा बरामदगी और इसके बाद आरोपियों को छोड़े जाने तक की पूरी जानकारी डीआईजी को दी। डीआईजी ने मामले में जांच के आदेश दिए हैं। अब जांच में यह स्पष्ट होगा कि पिकअप हरिद्वार कैसे पहुंची, उसे किसने कटवाया, पुलिस ने किन परिस्थितियों में उसकी बरामदगी की और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

