डॉक्टर की लापरवाही से महिला की मौत का आरोप:9 महीने पहले पति की जान गई, नवजात बेटा और 4 साल की बेटी अनाथ

डॉक्टर की लापरवाही से महिला की मौत का आरोप:9 महीने पहले पति की जान गई, नवजात बेटा और 4 साल की बेटी अनाथ

मुंगेर के संग्रामपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत रामपुर पंचायत की रहने वाली आस्था कुमारी की जमुई सदर अस्पताल में मौत हो जाने के बाद उनके दो छोटे बच्चे अनाथ हो गए हैं। परिजनों और ग्रामीणों ने जमुई सदर अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टर की लापरवाही से आस्था की मौत होने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और तारापुर विधायक से बच्चों के भरण-पोषण के लिए आर्थिक सहायता और मुआवजे की मांग की है। जमुई सदर अस्पताल में मौत परिजनों के अनुसार, आस्था कुमारी के पति रतन सिंह की करीब नौ माह पहले 5 जनवरी 2026 को जमुई जिले के खैरा थाना क्षेत्र में बालू लदे ट्रैक्टर की चपेट में आने से मौत हो गई थी। पति की मौत के बाद आस्था अपने मायके चौहंदी में रहकर परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। बताया गया कि जितिया पर्व के दौरान उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया। प्रसव के बाद इलाज के दौरान जमुई सदर अस्पताल में उनकी मौत हो गई। आस्था की मौत के बाद परिवार में एक दिन का नवजात बेटा और करीब चार साल की बेटी रह गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, दोनों बच्चों की देखभाल और भरण-पोषण की जिम्मेदारी उठाने वाला परिवार में कोई नहीं बचा है। मुआवजा और भरण-पोषण की व्यवस्था कराने की मांग ग्रामीणों ने बताया कि परिवार पहले ही कई सदस्यों को खो चुका है। आस्था के जेठ की 2007 में, सास की 2011 में, ससुर की 2013 में और पति रतन सिंह की 5 जनवरी 2026 को मौत हो चुकी है। अब आस्था की मौत के बाद दोनों बच्चों के सामने जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीण संतोष कुमार सिंह, बुलबुल सिंह और फटी कुमार सिंह सहित अन्य लोगों ने मुख्यमंत्री और तारापुर विधायक से दोनों बच्चों के भविष्य को देखते हुए तत्काल आर्थिक सहायता, मुआवजा और भरण-पोषण की व्यवस्था कराने की मांग की है। जबकि मृतिका आस्था की शव मुंगेर के रामपुर गांव आने के बाद हर किसी की आंखे नम उस नवजात बच्चे को देख कर हो गया। ग्रामीणों ने ने अपनी भाषा मे कहा भगवान ऐसी दुःखी किसी परिवार या बच्चे को ना दें। मुंगेर के संग्रामपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत रामपुर पंचायत की रहने वाली आस्था कुमारी की जमुई सदर अस्पताल में मौत हो जाने के बाद उनके दो छोटे बच्चे अनाथ हो गए हैं। परिजनों और ग्रामीणों ने जमुई सदर अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टर की लापरवाही से आस्था की मौत होने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और तारापुर विधायक से बच्चों के भरण-पोषण के लिए आर्थिक सहायता और मुआवजे की मांग की है। जमुई सदर अस्पताल में मौत परिजनों के अनुसार, आस्था कुमारी के पति रतन सिंह की करीब नौ माह पहले 5 जनवरी 2026 को जमुई जिले के खैरा थाना क्षेत्र में बालू लदे ट्रैक्टर की चपेट में आने से मौत हो गई थी। पति की मौत के बाद आस्था अपने मायके चौहंदी में रहकर परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। बताया गया कि जितिया पर्व के दौरान उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया। प्रसव के बाद इलाज के दौरान जमुई सदर अस्पताल में उनकी मौत हो गई। आस्था की मौत के बाद परिवार में एक दिन का नवजात बेटा और करीब चार साल की बेटी रह गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, दोनों बच्चों की देखभाल और भरण-पोषण की जिम्मेदारी उठाने वाला परिवार में कोई नहीं बचा है। मुआवजा और भरण-पोषण की व्यवस्था कराने की मांग ग्रामीणों ने बताया कि परिवार पहले ही कई सदस्यों को खो चुका है। आस्था के जेठ की 2007 में, सास की 2011 में, ससुर की 2013 में और पति रतन सिंह की 5 जनवरी 2026 को मौत हो चुकी है। अब आस्था की मौत के बाद दोनों बच्चों के सामने जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीण संतोष कुमार सिंह, बुलबुल सिंह और फटी कुमार सिंह सहित अन्य लोगों ने मुख्यमंत्री और तारापुर विधायक से दोनों बच्चों के भविष्य को देखते हुए तत्काल आर्थिक सहायता, मुआवजा और भरण-पोषण की व्यवस्था कराने की मांग की है। जबकि मृतिका आस्था की शव मुंगेर के रामपुर गांव आने के बाद हर किसी की आंखे नम उस नवजात बच्चे को देख कर हो गया। ग्रामीणों ने ने अपनी भाषा मे कहा भगवान ऐसी दुःखी किसी परिवार या बच्चे को ना दें।  

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