गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे के लिए किशनगंज में जमीन अधिग्रहण शुरू:72.5KM हिस्से की जमीन अधिग्रहण के लिए बजट जारी, ठाकुरगंज-टेढ़ागाछ के कई गांव दायरे में आए

गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे के लिए किशनगंज में जमीन अधिग्रहण शुरू:72.5KM हिस्से की जमीन अधिग्रहण के लिए बजट जारी, ठाकुरगंज-टेढ़ागाछ के कई गांव दायरे में आए

पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर को तेज सड़क संपर्क से जोड़ने वाली गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे परियोजना ने किशनगंज में जमीन पर उतरने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 3ए के तहत भूमि अधिग्रहण की मंशा संबंधी अधिसूचना जारी कर दी है। 24 सितंबर को जारी अधिसूचना को 1 अक्टूबर को भारत के राजपत्र (गजट) में प्रकाशित किया गया। इसके साथ ही किशनगंज में परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है। अधिसूचना संख्या एस.ओ. 5288 (ई) के अनुसार किशनगंज जिले में एक्सप्रेस-वे के किमी 434.45 से किमी 506.95 तक के हिस्से में आने वाली जमीन का अधिग्रहण प्रस्तावित है। यानी जिले में करीब 72.5 किमी हिस्से के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई है। केंद्र सरकार के मुताबिक जमीन का अधिग्रहण एक्सप्रेस-वे के निर्माण, प्रबंधन, रखरखाव और सुरक्षित संचालन के लिए किया जाएगा। ठाकुरगंज-टेढ़ागाछ के कई गांवों की जमीन आएगी दायरे में गजट में जारी शेड्यूल के अनुसार किशनगंज जिले में एक्सप्रेस-वे के लिए ठाकुरगंज और टेढ़ागाछ अंचल की जमीन प्रभावित होगी। ठाकुरगंज प्रखंड के बेसरबाटी, पथरिया, नेजागाछ, गोथरा, कनकपुर समेत कई राजस्व गांवों की जमीन अधिग्रहण के दायरे में शामिल की गई है। अधिसूचना जारी होने के बाद संबंधित गांवों में रैयत और भू-स्वामी अपनी जमीन के कागजात खंगालने में जुट गए हैं। लोग खाता, खेसरा और रकबा का मिलान कर यह पता कर रहे हैं कि परियोजना के लिए उनकी कितनी जमीन ली जाएगी। वहीं, जमीन जाने वाले किसानों के बीच मुआवजे को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। प्रशासनिक स्तर पर भी अधिसूचना में दर्ज जमीन और राजस्व अभिलेखों का मिलान किया जाएगा। इसके बाद जमीन की वास्तविक स्थिति का सत्यापन और सीमांकन जैसी कार्रवाई आगे बढ़ेगी। 21 दिन में दे सकते हैं आपत्ति, सक्षम प्राधिकारी करेंगे सुनवाई भूमि अधिग्रहण अधिनियम की प्रक्रिया के तहत प्रभावित भू-स्वामियों को आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार दिया गया है। गजट में अधिसूचना प्रकाशित होने की तारीख से 21 दिनों के भीतर कोई भी व्यक्ति, जिसकी जमीन या उसमें किसी तरह का हित इस अधिग्रहण से प्रभावित हो रहा है, लिखित आपत्ति दे सकता है। आपत्ति जिला भू-अर्जन पदाधिकारी सह सक्षम प्राधिकारी, किशनगंज के समक्ष दाखिल करनी होगी। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी आपत्तियों की सुनवाई करेंगे। संबंधित भू-स्वामी को खुद या अपने अधिकृत कानूनी प्रतिनिधि के माध्यम से अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। परियोजना से संबंधित नक्शा, जमीन का विवरण, खेसरा संख्या और अन्य जरूरी दस्तावेज भी सक्षम प्राधिकारी के कार्यालय में निरीक्षण के लिए उपलब्ध रहेंगे। इससे प्रभावित रैयत अपनी जमीन की स्थिति और प्रस्तावित अधिग्रहण की जानकारी की पुष्टि कर सकेंगे। आपत्तियों के बाद होगा सीमांकन और मुआवजे की प्रक्रिया अधिसूचना के बाद अब भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया कई चरणों में आगे बढ़ेगी। सबसे पहले प्रभावित लोगों से प्राप्त आपत्तियों की सुनवाई और उनका निपटारा किया जाएगा। इसके बाद जमीन का भौतिक सत्यापन, सीमांकन और अंतिम अधिग्रहण से संबंधित कार्रवाई होगी। आगे चलकर अधिग्रहित होने वाली जमीन का मूल्यांकन किया जाएगा। निर्धारित प्रक्रिया के तहत पात्र रैयतों को मुआवजा दिया जाएगा। ऐसे में अब प्रभावित किसानों की नजर प्रशासन की ओर से होने वाले सर्वे, सीमांकन और मुआवजा निर्धारण पर है। स्थानीय स्तर पर रैयतों के बीच यह भी चर्चा है कि अधिग्रहण के बाद उन्हें किस दर से मुआवजा मिलेगा और भुगतान की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी। जमीन से जुड़े दस्तावेजों को दुरुस्त रखने और अधिसूचना में दर्ज खाता-खेसरा का मिलान करने पर भी जोर दिया जा रहा है। पूर्वी यूपी से सिलीगुड़ी तक तेज होगा सड़क संपर्क गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे को पूर्वी भारत की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में माना जा रहा है। इसका उद्देश्य पूर्वी उत्तर प्रदेश, उत्तर बिहार, सीमांचल, उत्तर बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों के बीच सड़क संपर्क को तेज और बेहतर बनाना है। परियोजना पूरी होने के बाद लंबी दूरी के यातायात में समय कम होने की उम्मीद है। इससे माल ढुलाई आसान होने के साथ परिवहन लागत घटने की संभावना है। एक्सप्रेस-वे के कारण इस पूरे क्षेत्र में व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। किशनगंज बनेगा यूपी-बंगाल और नॉर्थ ईस्ट के बीच अहम कॉरिडोर किशनगंज की भौगोलिक स्थिति इस परियोजना के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। यह जिला बिहार के साथ पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत की सीमा से जुड़ा हुआ है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर की वजह से किशनगंज पहले से ही पूर्वोत्तर राज्यों के लिए महत्वपूर्ण ट्रांजिट क्षेत्र है। ऐसे में एक्सप्रेस-वे के निर्माण से जिले की सड़क कनेक्टिविटी और मजबूत होने की उम्मीद है। इससे स्थानीय बाजारों, कृषि उत्पादों और व्यापारिक गतिविधियों को भी बेहतर सड़क नेटवर्क मिलने की संभावना है। भविष्य में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद भी जताई जा रही है। अब अगला फोकस: गजट में अधिसूचना जारी होने के बाद प्रभावित गांवों में जमीन का सत्यापन और रैयतों की आपत्तियां महत्वपूर्ण होंगी। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद अधिग्रहण की अगली कार्रवाई शुरू होगी। ऐसे में किशनगंज में इस बहुप्रतीक्षित एक्सप्रेस-वे परियोजना के निर्माण की दिशा में जमीन संबंधी प्रक्रिया ने अब औपचारिक रूप से गति पकड़ ली है। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर को तेज सड़क संपर्क से जोड़ने वाली गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे परियोजना ने किशनगंज में जमीन पर उतरने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 3ए के तहत भूमि अधिग्रहण की मंशा संबंधी अधिसूचना जारी कर दी है। 24 सितंबर को जारी अधिसूचना को 1 अक्टूबर को भारत के राजपत्र (गजट) में प्रकाशित किया गया। इसके साथ ही किशनगंज में परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है। अधिसूचना संख्या एस.ओ. 5288 (ई) के अनुसार किशनगंज जिले में एक्सप्रेस-वे के किमी 434.45 से किमी 506.95 तक के हिस्से में आने वाली जमीन का अधिग्रहण प्रस्तावित है। यानी जिले में करीब 72.5 किमी हिस्से के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई है। केंद्र सरकार के मुताबिक जमीन का अधिग्रहण एक्सप्रेस-वे के निर्माण, प्रबंधन, रखरखाव और सुरक्षित संचालन के लिए किया जाएगा। ठाकुरगंज-टेढ़ागाछ के कई गांवों की जमीन आएगी दायरे में गजट में जारी शेड्यूल के अनुसार किशनगंज जिले में एक्सप्रेस-वे के लिए ठाकुरगंज और टेढ़ागाछ अंचल की जमीन प्रभावित होगी। ठाकुरगंज प्रखंड के बेसरबाटी, पथरिया, नेजागाछ, गोथरा, कनकपुर समेत कई राजस्व गांवों की जमीन अधिग्रहण के दायरे में शामिल की गई है। अधिसूचना जारी होने के बाद संबंधित गांवों में रैयत और भू-स्वामी अपनी जमीन के कागजात खंगालने में जुट गए हैं। लोग खाता, खेसरा और रकबा का मिलान कर यह पता कर रहे हैं कि परियोजना के लिए उनकी कितनी जमीन ली जाएगी। वहीं, जमीन जाने वाले किसानों के बीच मुआवजे को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। प्रशासनिक स्तर पर भी अधिसूचना में दर्ज जमीन और राजस्व अभिलेखों का मिलान किया जाएगा। इसके बाद जमीन की वास्तविक स्थिति का सत्यापन और सीमांकन जैसी कार्रवाई आगे बढ़ेगी। 21 दिन में दे सकते हैं आपत्ति, सक्षम प्राधिकारी करेंगे सुनवाई भूमि अधिग्रहण अधिनियम की प्रक्रिया के तहत प्रभावित भू-स्वामियों को आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार दिया गया है। गजट में अधिसूचना प्रकाशित होने की तारीख से 21 दिनों के भीतर कोई भी व्यक्ति, जिसकी जमीन या उसमें किसी तरह का हित इस अधिग्रहण से प्रभावित हो रहा है, लिखित आपत्ति दे सकता है। आपत्ति जिला भू-अर्जन पदाधिकारी सह सक्षम प्राधिकारी, किशनगंज के समक्ष दाखिल करनी होगी। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी आपत्तियों की सुनवाई करेंगे। संबंधित भू-स्वामी को खुद या अपने अधिकृत कानूनी प्रतिनिधि के माध्यम से अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। परियोजना से संबंधित नक्शा, जमीन का विवरण, खेसरा संख्या और अन्य जरूरी दस्तावेज भी सक्षम प्राधिकारी के कार्यालय में निरीक्षण के लिए उपलब्ध रहेंगे। इससे प्रभावित रैयत अपनी जमीन की स्थिति और प्रस्तावित अधिग्रहण की जानकारी की पुष्टि कर सकेंगे। आपत्तियों के बाद होगा सीमांकन और मुआवजे की प्रक्रिया अधिसूचना के बाद अब भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया कई चरणों में आगे बढ़ेगी। सबसे पहले प्रभावित लोगों से प्राप्त आपत्तियों की सुनवाई और उनका निपटारा किया जाएगा। इसके बाद जमीन का भौतिक सत्यापन, सीमांकन और अंतिम अधिग्रहण से संबंधित कार्रवाई होगी। आगे चलकर अधिग्रहित होने वाली जमीन का मूल्यांकन किया जाएगा। निर्धारित प्रक्रिया के तहत पात्र रैयतों को मुआवजा दिया जाएगा। ऐसे में अब प्रभावित किसानों की नजर प्रशासन की ओर से होने वाले सर्वे, सीमांकन और मुआवजा निर्धारण पर है। स्थानीय स्तर पर रैयतों के बीच यह भी चर्चा है कि अधिग्रहण के बाद उन्हें किस दर से मुआवजा मिलेगा और भुगतान की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी। जमीन से जुड़े दस्तावेजों को दुरुस्त रखने और अधिसूचना में दर्ज खाता-खेसरा का मिलान करने पर भी जोर दिया जा रहा है। पूर्वी यूपी से सिलीगुड़ी तक तेज होगा सड़क संपर्क गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे को पूर्वी भारत की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में माना जा रहा है। इसका उद्देश्य पूर्वी उत्तर प्रदेश, उत्तर बिहार, सीमांचल, उत्तर बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों के बीच सड़क संपर्क को तेज और बेहतर बनाना है। परियोजना पूरी होने के बाद लंबी दूरी के यातायात में समय कम होने की उम्मीद है। इससे माल ढुलाई आसान होने के साथ परिवहन लागत घटने की संभावना है। एक्सप्रेस-वे के कारण इस पूरे क्षेत्र में व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। किशनगंज बनेगा यूपी-बंगाल और नॉर्थ ईस्ट के बीच अहम कॉरिडोर किशनगंज की भौगोलिक स्थिति इस परियोजना के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। यह जिला बिहार के साथ पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत की सीमा से जुड़ा हुआ है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर की वजह से किशनगंज पहले से ही पूर्वोत्तर राज्यों के लिए महत्वपूर्ण ट्रांजिट क्षेत्र है। ऐसे में एक्सप्रेस-वे के निर्माण से जिले की सड़क कनेक्टिविटी और मजबूत होने की उम्मीद है। इससे स्थानीय बाजारों, कृषि उत्पादों और व्यापारिक गतिविधियों को भी बेहतर सड़क नेटवर्क मिलने की संभावना है। भविष्य में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद भी जताई जा रही है। अब अगला फोकस: गजट में अधिसूचना जारी होने के बाद प्रभावित गांवों में जमीन का सत्यापन और रैयतों की आपत्तियां महत्वपूर्ण होंगी। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद अधिग्रहण की अगली कार्रवाई शुरू होगी। ऐसे में किशनगंज में इस बहुप्रतीक्षित एक्सप्रेस-वे परियोजना के निर्माण की दिशा में जमीन संबंधी प्रक्रिया ने अब औपचारिक रूप से गति पकड़ ली है।  

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