कानपुर में शनिवार देर रात नरवल में बुजुर्ग ने फंदा लगाकर जान दे दी। वह करीब छह साल से पैर में दर्द और चलने की परेशानी से जूझ रहे थे और उनका इलाज चल रहा था। रात में खाना खाने और दर्द की दवा लेने के बाद वह कमरे में सोने चले गए थे। देर रात वॉकर के सहारे छत पर गए, जहां उन्होंने पिलर से गमछे के सहारे फंदा लगा लिया। रविवार सुबह परिजन उन्हें खोजते हुए छत पर पहुंचे तो शव फंदे से लटकता मिला। सूचना पर पुलिस और फोरेंसिक टीम पहुंची, जांच के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। छह साल पहले गिरने से टूटा था पैर नर्वल गांव निवासी अशोक कुमार सिंह किसान हैं। उनके पिता प्रताप सिंह (85), मां विमला देवी और छोटा भाई धर्मेंद्र उर्फ राजू परिवार में हैं। अशोक ने बताया कि करीब छह साल पहले पिता गिर गए थे, जिससे उनका बायां पैर टूट गया था। इलाज के बाद भी उन्हें पैर में दर्द और चलने में परेशानी बनी रही। कई डॉक्टरों से उनका इलाज चल रहा था। चलने के लिए वह वॉकर का इस्तेमाल करते थे। पिछले एक सप्ताह से पैर में ज्यादा दिक्कत होने के कारण वह परेशान थे। रात में दवा खाने के बाद छत पर गए अशोक के मुताबिक, शनिवार रात खाना खाने के बाद पिता ने दर्द की दवा ली और कमरे में सोने चले गए। देर रात वह उठे और वॉकर के सहारे छत पर चले गए। वहां पिलर से गमछे के सहारे फंदा लगाकर जान दे दी। रविवार सुबह उनकी पत्नी विमला देवी उठीं और कमरे में गईं तो प्रताप सिंह वहां नहीं मिले। काफी तलाश करने के बाद वह छत पर पहुंचीं। वहां प्रताप सिंह को पिलर से फंदे के सहारे लटकता देख उनकी चीख निकल गई। चीख-पुकार सुनकर परिवार के अन्य लोग भी छत पर पहुंचे। सूचना पर 112 नंबर से पुलिस को जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही नर्वल थाने की पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। टीम ने घटनास्थल की जांच की और जरूरी साक्ष्य जुटाए। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

