(प्रसून श्रीवास्तव)
नयी दिल्ली, चार अक्टूबर डिजिटल सेवा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के इस महीने के अंत तक शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, कंपनी का उद्यम मूल्य करीब 143-146 अरब डॉलर यानी 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक रह सकता है। जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) करीब 3.8 अरब डॉलर का होने की संभावना है।
इस आकार के साथ यह भारत का अबतक का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम बन सकता है। बैंकिंग और बाजार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कंपनी ने अमेरिका, ब्रिटेन, दुबई, हांगकांग और सिंगापुर में अपने अंतरराष्ट्रीय रोडशो पूरे कर लिए हैं। अब वह 12 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास आईपीओ के लिए अंतिम दस्तावेज दाखिल कर सकती है।
इस बारे में जियो प्लेटफॉर्म्स (जेपीएल) को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला है। सूत्रों का कहना है कि विदेशी निवेशकों से मिले सकारात्मक रुझान के आधार पर कंपनी का शुरुआती मूल्यांकन 143-146 अरब डॉलर या कम से कम 12 लाख करोड़ रुपये रहने की संभावना है। कंपनी भारत में भी आईपीओ रोडशो आयोजित कर सकती है।
इसके अलावा, दशहरा से पहले एंकर निवेशकों के लिए बोली प्रक्रिया शुरू होने और दशहरा के बाद, लेकिन 23 अक्टूबर से पहले आईपीओ खुलने की संभावना जताई जा रही है। कंपनी के शेयरों की सूचीबद्धता अक्टूबर के अंत तक होने की उम्मीद है। अमेरिका, ब्रिटेन, दुबई, हांगकांग और सिंगापुर में आयोजित रोड शो की अगुवाई जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रबंध निदेशक एवं रिलायंस जियो के चेयरमैन आकाश अंबानी और रिलायंस रिटेल वेंचर्स लि. की कार्यकारी निदेशक ईशा अंबानी ने की।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 28 अगस्त को जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ पर अंतिम टिप्पणियां जारी की थीं। कंपनी ने जून में आईपीओ के लिए दस्तावेज दाखिल किए थे। दस्तावेजों के मसौदो के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स 27 करोड़ तक नए इक्विटी शेयर जारी करने की योजना बना रही है।
यह निर्गम-बाद इक्विटी का करीब 2.9 प्रतिशत होगा। जियो प्लेटफॉर्म्स ने वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन किया है। कंपनी का शुद्ध लाभ 15 प्रतिशत बढ़कर 30,053 करोड़ रुपये हो गया, जबकि वार्षिक राजस्व 14.5 प्रतिशत बढ़कर 1,46,885 करोड़ रुपये रहा।
नुवामा रिसर्च के विश्लेषकों का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 से 2029-30 के बीच रिलायंस जियो का मुनाफा करीब 18 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ सकता है। जियो प्लेटफॉर्म्स में रिलायंस का डिजिटल कारोबार शामिल है, जिनमें दूरसंचार सेवाएं प्रमुख हैं। इसकी दूरसंचार इकाई रिलायंस जियो इन्फोकॉम का भारतीय मोबाइल बाजार में करीब 39.29 प्रतिशत हिस्सा है और इसके करीब 50.6 करोड़ मोबाइल ग्राहक हैं।
कंपनी के पास जून, 2026 तक करीब 26.85 करोड़ 5जी ग्राहक थे। कंपनी अब दूरसंचार से आगे बढ़ते हुए क्लाउड, कृत्रिम मेधा (एआई) और एंटरप्राइज नेटवर्क सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार कर रही है। जियो प्लेटफॉर्म्स पहले ही कई बड़े वैश्विक निवेशकों को आकर्षित कर चुकी है।
वर्ष 2020 में मेटा ने 43,574 करोड़ रुपये में 9.99 प्रतिशत हिस्सेदारी, जबकि गूगल ने 33,737 करोड़ रुपये में 7.73 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी। इसके अलावा सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स, जनरल अटलांटिक, केकेआर, मुबाडाला, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी, टीपीजी, एल कैटरटॉन, इन्टेल कैपिटल और क्वालकॉम वेंचर्स समेत अन्य निवेशकों ने मिलकर करीब 74,745 करोड़ रुपये का निवेश किया था। दस्तावेजों के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज की जियो प्लेटफॉर्म्स में करीब 66.4 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि मेटा और गूगल की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 17.7 प्रतिशत है।
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 2008 के बाद रिलायंस समूह का पहला सार्वजनिक निर्गम होगा। साथ ही, यह समूह के किसी उपभोक्ता-केंद्रित कारोबार का पहला आईपीओ भी होगा।

