दोनों भाइयों ने एजेंट को दिए थे 10-15 लाख रुपए जेपीएससी 14वीं सिविल सेवा पीटी में धांधली मामले में सीआईडी ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई की। जांच एजेंसी ने पीटी पास करने वाले दो भाइयों दीपक राणा और ओमप्रकाश राणा को शनिवार को हजारीबाग से गिरफ्तार कर लिया। सीआईडी को पता चला है कि दोनों भाइयों ने एक एजेंट को करीब 15 लाख रुपए दिए थे। बाद में ओएमआर शीट में सेटिंग कर उनका चयन कराया गया। सीआईडी ने इस मामले में केस दर्ज कर पूरे सिंडिकेट की कड़ियां जोड़ी हैं। अब तक की जांच में यह प्रमाणित हो चुका है कि एक सुनियोजित आपराधिक साजिश के तहत मोटी रकम लेकर सीटें बेची गईं और ओएमआर शीट में हेरफेर की गई। इस मामले में सीआईडी जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, परीक्षा संचालन एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय तिवारी, तकनीकी प्रोग्रामर उस्मान व एबाद समेत 27 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें इनमें नौ सफल अभ्यर्थी शामिल हैं। ऐसे तीन अभ्यर्थी हजारीबाग से गिरफ्तार हुए हैं। सीजीएल: आसनसोल में अभ्यर्थियों को जवाब रटवाने वाला एजेंट तीन दिन की रिमांड पर जेएसएससी की सीजीएल परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले में सीआईडी की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सीआईडी की एसआईटी ने शनिवार को पूर्व में गिरफ्तार एजेंट दिलीप कुमार पासवान को तीन दिन की रिमांड पर लिया था। सीआईडी को पता चला है कि परीक्षा से पहले दिलीप ने चार-पांच अभ्यर्थियों को पश्चिम बंगाल के आसनसोल स्थित एक होटल में ठहराया था और उन्हें प्रश्न-उत्तर रटवाया था। इसकी एवज में मोटी रकम वसूली थी। ये अभ्यर्थी सफल भी हुए थे। अब वसूली करने वाले एजेंट पर सीआईडी की नजर हजारीबाग से गिरफ्तार दोनों भाइयों से पूछताछ में उस मुख्य बिचौलिए (एजेंट) का पूरा ब्योरा सीआईडी को मिल चुका है, जिसने 10-15 लाख रुपए लेकर सौदा तय कराया था। सीआईडी की टीमें उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। दोनों भाइयों द्वारा दी गई 10 से 15 लाख रुपए की रकम किस माध्यम से दी गई और यह पैसा आगे किसके पास भेजा गया, इसकी कड़ियां जोड़ी जा रही है। वहीं एजेंट उमेश, बुद्धेश्वर व रमेश और कोचिंग संचालकों के मोबाइल व दस्तावेज से मिले रोल नंबर व लेनदेन के भी साक्ष्य मिले हैं। ऐसे में कुछ और अभ्यिर्थयों की गिरफ्तारी की भी संभावना है। दोनों भाइयों ने एजेंट को दिए थे 10-15 लाख रुपए जेपीएससी 14वीं सिविल सेवा पीटी में धांधली मामले में सीआईडी ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई की। जांच एजेंसी ने पीटी पास करने वाले दो भाइयों दीपक राणा और ओमप्रकाश राणा को शनिवार को हजारीबाग से गिरफ्तार कर लिया। सीआईडी को पता चला है कि दोनों भाइयों ने एक एजेंट को करीब 15 लाख रुपए दिए थे। बाद में ओएमआर शीट में सेटिंग कर उनका चयन कराया गया। सीआईडी ने इस मामले में केस दर्ज कर पूरे सिंडिकेट की कड़ियां जोड़ी हैं। अब तक की जांच में यह प्रमाणित हो चुका है कि एक सुनियोजित आपराधिक साजिश के तहत मोटी रकम लेकर सीटें बेची गईं और ओएमआर शीट में हेरफेर की गई। इस मामले में सीआईडी जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, परीक्षा संचालन एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय तिवारी, तकनीकी प्रोग्रामर उस्मान व एबाद समेत 27 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें इनमें नौ सफल अभ्यर्थी शामिल हैं। ऐसे तीन अभ्यर्थी हजारीबाग से गिरफ्तार हुए हैं। सीजीएल: आसनसोल में अभ्यर्थियों को जवाब रटवाने वाला एजेंट तीन दिन की रिमांड पर जेएसएससी की सीजीएल परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले में सीआईडी की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सीआईडी की एसआईटी ने शनिवार को पूर्व में गिरफ्तार एजेंट दिलीप कुमार पासवान को तीन दिन की रिमांड पर लिया था। सीआईडी को पता चला है कि परीक्षा से पहले दिलीप ने चार-पांच अभ्यर्थियों को पश्चिम बंगाल के आसनसोल स्थित एक होटल में ठहराया था और उन्हें प्रश्न-उत्तर रटवाया था। इसकी एवज में मोटी रकम वसूली थी। ये अभ्यर्थी सफल भी हुए थे। अब वसूली करने वाले एजेंट पर सीआईडी की नजर हजारीबाग से गिरफ्तार दोनों भाइयों से पूछताछ में उस मुख्य बिचौलिए (एजेंट) का पूरा ब्योरा सीआईडी को मिल चुका है, जिसने 10-15 लाख रुपए लेकर सौदा तय कराया था। सीआईडी की टीमें उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। दोनों भाइयों द्वारा दी गई 10 से 15 लाख रुपए की रकम किस माध्यम से दी गई और यह पैसा आगे किसके पास भेजा गया, इसकी कड़ियां जोड़ी जा रही है। वहीं एजेंट उमेश, बुद्धेश्वर व रमेश और कोचिंग संचालकों के मोबाइल व दस्तावेज से मिले रोल नंबर व लेनदेन के भी साक्ष्य मिले हैं। ऐसे में कुछ और अभ्यिर्थयों की गिरफ्तारी की भी संभावना है।

