अश्लील फोटो से ब्लैकमेल कर किया दुराचार:महिला ने की आत्महत्या की कोशिश, आरोपी को हुई 10 साल की सजा

अश्लील फोटो से ब्लैकमेल कर किया दुराचार:महिला ने की आत्महत्या की कोशिश, आरोपी को हुई 10 साल की सजा

अश्लील फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर युवती से दुराचार करने के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी को 10 साल की कैद की सजा सुनाई है। आरोपी ने पीड़िता के विवाह से पहले बने संबंधों का फायदा उठाकर उसे ब्लैकमेल किया था। विरोध करने पर उसके अश्लील फोटो और वीडियो पीड़िता के भाई और पति को भेज दिए थे। इससे परेशान होकर पीड़िता ने आत्महत्या का प्रयास किया। इसके बाद पति को पूरे मामले की जानकारी हुई। पति ने पीड़िता का साथ देने का वादा किया, जिसके बाद उसने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। अदालत ने गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अभियोजन पक्ष के तर्कों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराते हुए 10 साल की कैद और 15 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। मामला थाना एत्माद्दौला क्षेत्र का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी मोहन पुत्र छोटे लाल निवासी नया गांव, खड़सुलिया, जिला एटा, हाल निवासी नुनहाई, आगरा के पीड़िता से विवाह से पहले ननिहाल के माध्यम से संबंध थे। आरोप था कि आरोपी ने पीड़िता के अश्लील फोटो और वीडियो अपने पास रख लिए थे। इन्हें वायरल करने की धमकी देकर वह कई बार उसके साथ दुराचार करता रहा। 19 सितंबर 2018 को आरोपी ने फोन कर पीड़िता पर अपने घर आने का दबाव बनाया और उसके साथ जबरन दुराचार किया। कुछ दिन बाद आरोपी ने उसे दोबारा बुलाया, लेकिन पीड़िता ने जाने से इंकार कर दिया। इस पर आरोपी ने उसके अश्लील फोटो और वीडियो पीड़िता के भाई और पति को भेज दिए। आत्महत्या की कोशिश के बाद पति को पता चली सच्चाई फोटो और वीडियो सामने आने के बाद पीड़िता मानसिक रूप से परेशान हो गई और उसने आत्महत्या का प्रयास किया। इसके बाद पति को पूरे मामले की जानकारी हुई। पीड़िता के पति ने फेरों के समय दिए गए वचन निभाने और हर परिस्थिति में उसका साथ देने का भरोसा दिया। इसके बाद पीड़िता ने आरोपी के खिलाफ दुराचार और आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया। मामले की सुनवाई के दौरान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नाहर सिंह तोमर ने पीड़िता और उसके पति सहित छह गवाह अदालत में पेश किए। फास्ट ट्रैक कोर्ट के अपर जिला जज नीरज श्रीवास्तव ने पीड़िता और अन्य गवाहों के बयान, मेडिकोलीगल रिपोर्ट और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर आरोपी मोहन को दोषी पाया। अदालत ने आरोपी को 10 वर्ष के कारावास और 15 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया।

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