मप्र भोज (मुक्त) विश्वविद्यालय में बीए, बीकॉम सहित अन्य पाठ्यक्रमों के प्रश्नपत्र छापने के ठेके में 40% कमीशन मांगने का आरोप सामने आया है। मेरठ की केवी प्रिंटर्स के व्यवस्थापक राजीव शर्मा ने शपथपत्र और बैंक रिकॉर्ड के साथ शिकायत की है कि तत्कालीन रजिस्ट्रार सुशील मंडेरिया ने ठेका देने से पहले ₹5 लाख एडवांस और बाद में बिल पास कराने के बदले 40% कमीशन मांगा। 86,00,946 ब्लकि पास कराने के लिए 32.62 लाख कैश लिए। लोकायुक्त ने जांच शुरू कर दी है। टेंडर में सबसे कम दर वाली L-1 बेंगलुरु की फर्म थी, लेकिन काम L-2 केवी प्रिंटर्स को मिला। एग्रीमेंट से एक दिन पहले मंडेरिया के परिचित भूपेंद्र भदौरिया ने ₹5 लाख मांगे। अगले दिन एग्रीमेंट हुआ और उसी शाम रजिस्ट्रार के सरकारी आवास पर ₹5 लाख देने का आरोप है। शिकायत से जांच तक ₹35 लाख निकाले, ₹32.62 लाख देने का दावा फर्म ने छपाई-सप्लाई के ₹86,00,946 के चार बिल लगाए। इसमें ₹76.79 लाख मूल राशि और ₹9.21 लाख IGST था। आरोप है कि GST की रकम पर भी कमीशन मांगा गया। ₹44.89 लाख का भुगतान मिलने पर बैंक से ₹35 लाख कैश निकाले गए। शिकायतकर्ता का दावा है कि ₹32.62 लाख फाइनेंस ऑफिसर को दिए गए, जिन्हें फाइनेंस ऑफिसर और भूपेंद्र लैपटॉप बैग में रखकर रजिस्ट्रार के सरकारी आवास ले गए। इसके बाद बाकी बिलों का भुगतान हुआ। भुगतान की टाइमलाइन मंडेरिया बोले- मुझ पर लगे आरोप निराधार हैं ठेका पूरी प्रक्रिया के तहत किया था। कुलगुरु को अपना स्पष्टीकरण दे चुका हूं। मुझ पर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। – डॉ. सुशील मंडेरिया, तत्कालीन रजिस्ट्रार,भोज विवि (वर्तमान- एसो. प्रोफेसर जेयू, ग्वालियर)

