4 मेडिकल कॉलेजों के हैं वैज्ञानिक:कोरोना में अहम रोल निभाने वालों को प्रमोशन का इंतजार

4 मेडिकल कॉलेजों के हैं वैज्ञानिक:कोरोना में अहम रोल निभाने वालों को प्रमोशन का इंतजार

कोरोना महामारी के दौरान वायरस के सैंपल की जांच करने और संक्रमण की निगरानी में अहम भूमिका निभाने वाले वैज्ञानिक वर्षों से प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं। भोपाल, इंदौर, रीवा और ग्वालियर की वायरोलॉजी लैब में कार्यरत 13 वैज्ञानिकों के लिए भर्ती के बाद आगे बढ़ने का स्पष्ट कैडर नहीं है। भोपाल में 2018 और इंदौर में 2019 से पद संभाल रहे वैज्ञानिक अब भी उसी पद पर हैं। यानी वायरस बदलते रहे, इनका अनुभव और विशेषज्ञता बढ़ती रही, लेकिन करियर की सीढ़ी आगे नहीं बढ़ी।
क्लास-1 अधिकारी हैं वायरोलॉजी लैब में तैनात वैज्ञानिक क्लास-1 राजपत्रित अधिकारी हैं। उनका कहना है कि उनके लिए मेडिकल कॉलेजों के प्रोफेसरों की तरह सेवा अवधि, शोध कार्य और उपलब्धियों के आधार पर समयबद्ध पदोन्नति की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके बजाय उन्हें 8 साल वाले समयमान वेतनमान का हवाला दिया जा रहा। वायरस पर नजर : वैज्ञानिकों का कहना है लैब में काम करने वाले विशेषज्ञों की जिम्मेदारी केवल सैंपल जांचने तक सीमित नहीं है। नए वायरस, संक्रमण के पैटर्न और महामारी की निगरानी में विशेषज्ञता जरूरी है। ऐसे में वर्षों से काम कर रहे वैज्ञानिकों के लिए पदोन्नति और करियर ग्रोथ की स्पष्ट व्यवस्था होना जरूरी है। वैज्ञानिकों ने बताया प्रमोशन का रास्ता वैज्ञानिकों ने केंद्र सरकार की फ्लेक्सिबल कॉम्प्लिमेंटिंग स्कीम और आईसीएमआर की वैज्ञानिक कैडर व्यवस्था का हवाला देते हुए पदोन्नति का प्रस्ताव दिया है। इसमें सेवा अवधि के साथ वार्षिक मूल्यांकन, शोध कार्य, विशेषज्ञता और उपलब्धियों को आधार बनाने की मांग है। प्रस्ताव का उद्देश्य वैज्ञानिक बी से आगे सी, डी और उच्च पदों तक जाने के लिए स्पष्ट कैडर तैयार करना है।

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