गंडक का पानी घटा पर तबाही बरकरार, रात में सांप-बिच्छू और बीमारी का खौफ गंडक नदी की प्रलयंकारी बाढ़ का पानी अब धीरे-धीरे उतर रहा है, लेकिन तटबंध पर शरण लिए हजारों परिवारों के लिए तबाही का दौर थमा नहीं है। घर आंखों के ठीक सामने हैं, पर उनके भीतर कीचड़ और बर्बादी पसरी है। पहाड़पुर के भरवलिया से लेकर केसरिया के सत्तरघाट तक करीब 50 हजार प्रभावित लोग आज भी तिरपाल के नीचे रात काटने को मजबूर हैं। उनके सामने उजड़ी गृहस्थी को फिर से समेटने की कठिन चुनौती खड़ी है। शनिवार को दैनिक भास्कर की 7 रिपोर्टर्स की टीम ने ग्राउंड पर जाकर हालात का जायजा लिया। बाढ़ से 27 गांव प्रभावित : 27 सितंबर को आई बाढ़ से अरेराज, संग्रामपुर और केसरिया समेत 27 गांवों के 48,908 लोग प्रभावित हुए हैं। दिन में तटबंध पर आवाजाही रहती है, लेकिन शाम ढलते ही डर का साया गहराने लगता है। लोगों ने चारपाई के नीचे बचा सामान छिपा रखा है।
पीड़ितों का दर्द : ‘पानी सब बहा ले गया, अब तिरपाल के नीचे डर का साया’
राजेंद्र साह (इजरा) : “पांच दिनों तक पूरा परिवार बेबस रहा। अब पानी उतरा तो अनाज, कपड़े और पढ़ाई के नुकसान के बीच नए सिरे से जीवन शुरू करने की चिंता है”।
लीलावती देवी (जितवारपुर): 65 वर्षीय लीलावती देवी की कहती हैं, “अंधेरी रात में मच्छर और सांप-बिच्छू का डर सताता है। विक्रमा सहनी व राम अवतार साह: फफक कर रो पड़ते हैं। कहते हैं, “पानी सब बहा ले गया। राहत का दावा बनाम धरातल की हकीकत : प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक 28 जगहों पर सामुदायिक किचन चलाकर अब तक 64,725 लोगों को भोजन कराया गया है। हालांकि, तटबंध पर रह रहे हर परिवार तक भोजन नहीं पहुंच पा रहा है। गंडक का पानी घटा पर तबाही बरकरार, रात में सांप-बिच्छू और बीमारी का खौफ गंडक नदी की प्रलयंकारी बाढ़ का पानी अब धीरे-धीरे उतर रहा है, लेकिन तटबंध पर शरण लिए हजारों परिवारों के लिए तबाही का दौर थमा नहीं है। घर आंखों के ठीक सामने हैं, पर उनके भीतर कीचड़ और बर्बादी पसरी है। पहाड़पुर के भरवलिया से लेकर केसरिया के सत्तरघाट तक करीब 50 हजार प्रभावित लोग आज भी तिरपाल के नीचे रात काटने को मजबूर हैं। उनके सामने उजड़ी गृहस्थी को फिर से समेटने की कठिन चुनौती खड़ी है। शनिवार को दैनिक भास्कर की 7 रिपोर्टर्स की टीम ने ग्राउंड पर जाकर हालात का जायजा लिया। बाढ़ से 27 गांव प्रभावित : 27 सितंबर को आई बाढ़ से अरेराज, संग्रामपुर और केसरिया समेत 27 गांवों के 48,908 लोग प्रभावित हुए हैं। दिन में तटबंध पर आवाजाही रहती है, लेकिन शाम ढलते ही डर का साया गहराने लगता है। लोगों ने चारपाई के नीचे बचा सामान छिपा रखा है।
पीड़ितों का दर्द : ‘पानी सब बहा ले गया, अब तिरपाल के नीचे डर का साया’
राजेंद्र साह (इजरा) : “पांच दिनों तक पूरा परिवार बेबस रहा। अब पानी उतरा तो अनाज, कपड़े और पढ़ाई के नुकसान के बीच नए सिरे से जीवन शुरू करने की चिंता है”।
लीलावती देवी (जितवारपुर): 65 वर्षीय लीलावती देवी की कहती हैं, “अंधेरी रात में मच्छर और सांप-बिच्छू का डर सताता है। विक्रमा सहनी व राम अवतार साह: फफक कर रो पड़ते हैं। कहते हैं, “पानी सब बहा ले गया। राहत का दावा बनाम धरातल की हकीकत : प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक 28 जगहों पर सामुदायिक किचन चलाकर अब तक 64,725 लोगों को भोजन कराया गया है। हालांकि, तटबंध पर रह रहे हर परिवार तक भोजन नहीं पहुंच पा रहा है।

