राजकोट मनपा कोर्ट बंद करने की मंजूरी, नए दो टॉयलेट के निर्माण के प्रस्ताव खारिज

राजकोट मनपा कोर्ट बंद करने की मंजूरी, नए दो टॉयलेट के निर्माण के प्रस्ताव खारिज

राजकोट. मनपा की स्थायी समिति की शनिवार को हुई बैठक में मनपा कोर्ट बंद करने की मंजूरी दी गई। साथ ही नए दो टॉयलेट के निर्माण के प्रस्ताव खारिज किए गए। सर्वेश्वर चौक समेत यातायात से व्यस्त 10 क्षेत्रों में स्थायी निर्माण के बजाय स्वच्छता के बेहतर मानकों को बनाए रखने वाले प्री-फैब्रिकेटेड लेडीज टॉयलेट ब्लॉक बनाने की योजना जल्द तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए।
बैठक के बाद समिति के चेयरमैन परेश पीपलिया ने यह जानकारी दी। एजेंडे में कुल 21 प्रस्ताव थे। इनमें से दो प्रस्ताव खारिज और 19 मंजूर किए गए। इसके तहत 6.36 करोड़ रुपए्रये के विकास कार्यों को मंजूरी दी गई। वार्ड नंबर 12 में श्री लक्ष्मणराव इनामदार टाउनशिप में दुकानों की नीलामी से हुई 4.23 करोड़ रुपए की आय को भी मंजूरी दी गई।
उन्होंने बताया कि वार्ड नंबर 7 के सर्वेश्वर चौक में नाले के पास 26.35 लाख रुपए की लागत से पिंक टॉयलेट ब्लॉक बनाने का प्रस्ताव आया था। इसी तरह वार्ड नंबर 3 में रेलनगर के संतोषीनगर मेन रोड पर आंगनवाड़ी के पास स्थित प्लॉट में 20.63 लाख रुपए की लागत से जनरल पे एंड यूज टॉयलेट बनाने का प्रस्ताव रखा गया था।

सर्वेश्वर चौक समेत 10 क्षेत्रों में प्री-फैब्रिकेटेड लेडीज टॉयलेट ब्लॉक बनाने की योजना तैयार करने के निर्देश

हालांकि अब अहमदाबाद और सूरत की तर्ज पर राजकोट में हाइजीनिक और अधिक स्वच्छ रहने वाले प्री-फैब्रिकेटेड टॉयलेट ब्लॉक बनाने की योजना लागू करने का विचार है। इसलिए इन दोनों टॉयलेट के निर्माण के बजाय संबंधित स्थानों पर प्री-फैब्रिकेटेड टॉयलेट बनाने की योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इन टॉयलेट में उपयोग के लिए शुल्क लेने का मनपा का कोई इरादा नहीं है। स्थायी निर्माण की तुलना में ऐसे टॉयलेट ब्लॉक की लागत भी कम आती है। राजकोट में महिला टॉयलेट की जरूरत को देखते हुए समिति के चेयरमैन ने बताया कि सर्वेश्वर चौक के अलावा त्रिकोणबाग, आजी डैम चौकड़ी, सामाकांठा इमिटेशन मार्केट समेत 10 स्थानों पर ऐसे पिंक टॉयलेट बनाने की योजना है।
उन्होंने बताया कि 1977 में खाद्य पदार्थों से संबंधित मामलों के लिए शुरू की गई और सालाना 1.13 करोड़ रुपए के रखरखाव खर्च से संचालित प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (मनपा) कोर्ट को वर्तमान परिस्थितियों में आवश्यकता और खर्च को देखते हुए बंद करने का निर्णय लिया गया। नए फूड एक्ट के बाद इस अदालत में मामलों की संख्या काफी कम हो गई, इसलिए खर्च में कटौती के तहत इस अदालत को बंद करने का प्रस्ताव समिति ने मंजूर किया।

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