OTP Scam: साइबर ठगी अब सिर्फ फर्जी लिंक, संदिग्ध कॉल या लालच देने वाले मैसेज तक सीमित नहीं रह गई है। ठग ऐसे तरीके अपना रहे हैं, जिनमें सामने वाले को कुछ समय तक शक ही नहीं होता। हैरानी की बात यह है कि अच्छी पढ़ाई और डिजिटल जानकारी रखने वाले लोग भी कई बार इन जालसाजों के झांसे में आ जाते हैं। इसकी एक वजह यह है कि ठग अब डर, जल्दबाजी और तनाव डालकर लोगों से गलत फैसला करवाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में कुछ सेकंड की जल्दबाजी बैंक खाते पर भारी पड़ सकती है।
एक क्लिक और खाते से उड़ने लगे पैसे
एक रेस्टोरेंट मालिक गणेश (बदला हुआ नाम) को शहर के रेस्टोरेंट कारोबारियों के वाट्सएप ग्रुप में एक ऐप के बारे में जानकारी दिखाई दी। बताया गया कि इस ऐप से आप पता कर सकते हैं कि शहर में कौन-सी रेड लाइट पर कैमरे लगे हैं। साथ ही व्हीकल का ऑनलाइन चालान कटने पर लाइव वीडियो के साथ ऐप में जानकारी दी जाएगा। मैसेज में ऐप का लिंक भी था। इस ग्रुप में हमेशा विश्वसनीय मैसेज आते थे, इसलिए गणेश को लगा कि यह ऐप सही है। उसने लिंक पर क्लिक करके ऐप डाउनलोड कर लिया। जैसा मैसेज में बताया गया था, ठीक उसी तरह ऐप में शहर के पूरे रोड़ नेटवर्क के नक्शे बने हुए थे।
इसके बाद रात को 2 बजे अचानक गणेश के मोबाइल पर एक साथ सैकड़ों ओटीपी आए। देखने पर पता चला कि गणेश के एक डेबिट कार्ड के जरिए फ्लिपकार्ट से धड़ाधड़ ऑर्डर हो रहे थे। गणेश कुछ कर पाते इससे पहले ही कुछ ही मिनटों में अकाउंट से कुल 60,000 रुपये निकल गए। यही नहीं, गणेश की कॉन्टैक्ट लिस्ट में मौजूद कई लोगों को वाट्सएप पर उस ऐप के लिंक भी फॉरवर्ड हो गए। इसके बाद गणेश ने फोन को फैक्ट्री रिसेट किया। अपना कार्ड ब्लॉक कराया और बैंक ब्रांच जाकर इस फ्रॉड की सूचना दी।
IIT मद्रास की स्टडी में सामने आई बड़ी बात
गणेश का मामला कोई अकेली घटना नहीं है। IIT मद्रास के शोधकर्ताओं की एक हालिया स्टडी में भी सामने आया कि ज्यादा पढ़े-लिखे और डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले लोग भी वित्तीय साइबर फ्रॉड का शिकार हो सकते हैं। ठग अक्सर डर, तनाव और जल्दबाजी का माहौल बनाते हैं। इसका मकसद सामने वाले को सोचने और स्थिति की जांच करने का समय नहीं देना होता है। जब व्यक्ति दबाव में होता है, तो वह सामान्य परिस्थितियों के मुकाबले अलग फैसला ले सकता है।
4 साल में 65 लाख से ज्यादा शिकायतें
देश में वित्तीय साइबर फ्रॉड का बढ़ता दायरा सरकारी आंकड़ों से भी समझा जा सकता है। गृह मंत्रालय के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ी 65.89 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें 55,050 करोड़ रुपये से अधिक की रकम शामिल थी। साल दर साल शिकायतों की संख्या तेजी से बढ़ी है। 2021 में करीब 2.62 लाख वित्तीय फ्रॉड की शिकायतें दर्ज हुई थीं। 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 24.02 लाख हो गया। इसी अवधि में रिपोर्ट की गई रकम 551 करोड़ रुपये से बढ़कर 22,495 करोड़ रुपये हो गई।
ठग किन तरीकों से बनाते हैं शिकार?
साइबर अपराधी लोगों को फंसाने के लिए अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं। आम तौर पर सामने आने वाले फ्रॉड में डिजिटल अरेस्ट स्कैम, फर्जी कूरियर या पार्सल स्कैम, UPI कलेक्ट रिक्वेस्ट फ्रॉड, KYC अपडेट के नाम पर ठगी और फर्जी निवेश या शेयर ट्रेडिंग स्कैम शामिल हैं। कई मामलों में ठग बैंक, पुलिस, डिलीवरी कंपनी या किसी दूसरी जानी-पहचानी संस्था का नाम लेकर भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं।
OTP ही नहीं, ये चीजें भी कभी शेयर न करें
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट प्रियंका सांखला के अनुसार, साइबर फ्रॉड से बचने के लिए लोगों को अपने संवेदनशील बैंकिंग और डिजिटल क्रेडेंशियल सुरक्षित रखने चाहिए। किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचना चाहिए और संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत करनी चाहिए। उन्होंने मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करने और OTP किसी के साथ शेयर न करने की सलाह दी है।
फ्रॉड होने पर क्या करें?
अगर साइबर फ्रॉड हो जाए तो घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। ठगी से जुड़े मैसेज, ट्रांजैक्शन की रसीद, चैट, फोन नंबर, ईमेल, SMS और ट्रांजैक्शन URL जैसे सबूत संभालकर रखने चाहिए। साथ ही बैंकिंग और दूसरे जरूरी अकाउंट के पासवर्ड तुरंत बदलने चाहिए।
बिना ऑर्डर के COD पार्सल आए तो क्या करें?
अगर आपने कोई सामान ऑर्डर नहीं किया है और फिर भी कोई कैश ऑन डिलीवरी पार्सल लेकर पहुंचता है, तो सावधान हो जाइए। ऐसे पार्सल को लेने से मना कर देना ही बेहतर है। सबसे जरूरी बात, किसी भी व्यक्ति को ऑर्डर कैंसिल करने के नाम पर ओटीपी न बताएं। ठगी करने वाले फर्जी COD पार्सल के बहाने ऐसा ऑथराइजेशन कोड हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं, जिसका इस्तेमाल बैंक अकाउंट या दूसरी संवेदनशील जानकारी को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है।
साइबर ठगी से बचने का सबसे आसान नियम यही है कि चाहे सामने वाला कितना भी भरोसेमंद क्यों न लगे, ओटीपी, पिन, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी शेयर करने से पहले रुकें और पूरी जानकारी जांच लें। ठग अक्सर इसी जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं।


1930