पति हुए बीमार तो आत्मनिर्भर बनी ऊषा तिवारी:15 हजार रुपए से अचार का काम शुरू किया, अब 30-40 हजार मासिक कमाई; 1200 महिलाओं को दिया रोजगार

पति हुए बीमार तो आत्मनिर्भर बनी ऊषा तिवारी:15 हजार रुपए से अचार का काम शुरू किया, अब 30-40 हजार मासिक कमाई; 1200 महिलाओं को दिया रोजगार

गोंडा के झंझरी ब्लॉक के गुलहरिहा गांव की ऊषा तिवारी ने परिवार की मुश्किल परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी। वर्ष 2020 में उनके पति हनुमान दत्त तिवारी बीमार थे और बाहर जाकर मजदूरी करने की स्थिति में नहीं थे। परिवार चलाने में परेशानी बढ़ी तो ऊषा ने विकासखंड के अधिकारियों से संपर्क किया और 10 महिलाओं के साथ मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह बनाया। करीब 15 हजार रुपए जुटाकर उन्होंने अचार बनाने का काम शुरू किया। शुरुआत में एक महीने में 20 डिब्बे अचार ही बिक पाते थे। स्टॉल लगाने पर बिक्री बढ़कर करीब 40 डिब्बे तक पहुंचती थी और महीने में लगभग 3 हजार रुपए का फायदा होता था। छह साल में यही छोटा कारोबार बड़ा बन गया। अब हर महीने 150 से ज्यादा डिब्बे बिकते हैं और ऊषा को करीब 30-40 हजार रुपए का फायदा हो रहा है। समूह में 11 महिलाएं हैं, जबकि करीब 50 महिलाओं को उन्होंने सीधे रोजगार दिया है। पति की मजदूरी छूटी, परिवार की जिम्मेदारी संभाली अचार के कारोबार से हुई कमाई से ऊषा अपने दो बेटों, एक बेटी और ससुर का खर्च उठाती हैं। पति की तबीयत सुधरने के बाद भी अब उन्हें परिवार चलाने के लिए बाहर जाकर मजदूरी करने की जरूरत नहीं पड़ती। ऊषा ने अपने विकलांग माता-पिता की जिम्मेदारी भी संभाल रखी है। उनकी देखभाल और खर्च का जिम्मा भी वही उठा रही हैं।
जब ऊषा ने 2020 में अचार बनाना शुरू किया तो लोगों ने खरीदने में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। धीरे-धीरे लोगों ने अचार की गुणवत्ता और स्वाद को पसंद करना शुरू किया। अब गोंडा में उनके बनाए अचार की मांग है। उनका कहना है कि अचार में किसी तरह की मिलावट नहीं की जाती। पहले खुद इस्तेमाल करके गुणवत्ता परखी जाती है, इसके बाद ही बाजार में बिक्री के लिए भेजा जाता है। आम, कटहल, हरी मिर्च, लाल मिर्च, आलू और सहजन समेत अलग-अलग सीजन में मिलने वाली चीजों से कई तरह के अचार तैयार किए जाते हैं। गोंडा के अलावा बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, अयोध्या और लखनऊ समेत कई जिलों में इसकी सप्लाई होती है। जिला, मंडल और प्रदेश स्तर पर ऊषा को उनके काम के लिए सम्मानित भी किया जा चुका है।
विश्वकर्मा योजना की मास्टर ट्रेनर, महिलाओं को देती हैं प्रशिक्षण ऊषा तिवारी विश्वकर्मा योजना की मास्टर ट्रेनर भी हैं। वह महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें अलग-अलग काम शुरू करने के लिए तैयार करती हैं। उनके साथ बड़ी संख्या में महिलाएं जुड़ी हैं, जिनमें कई महिलाएं घर से ही काम कर रही हैं। ऊषा खुद गांव-गांव जाकर महिलाओं को अचार बनाने, उसकी गुणवत्ता बनाए रखने और बाजार में बिक्री के तरीके बताती हैं। सरकार और जिला प्रशासन की ओर से कारोबार बढ़ाने के लिए मिली मदद से भी उन्हें फायदा हुआ। ऊषा का कहना है कि उन्होंने अपने साथ जुड़ी महिलाओं को सिर्फ काम नहीं दिया, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए प्रेरित किया है।
अरगा ब्रांड से जुड़कर अमेजन पर भी बिक्री ऊषा के अचार को अरगा ब्रांड से जोड़ा गया है। इसके जरिए अब इसकी ऑनलाइन बिक्री अमेजन पर भी हो रही है। इससे गोंडा के बाहर दूसरे जिलों और राज्यों के लोग भी अचार खरीद सकते हैं। पिछले वर्ष गोंडा में हुए एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह की मौजूदगी में अरगा ब्रांड और अमेजन के बीच एमओयू हुआ था। ऊषा तिवारी कहती हैं कि उन्होंने छोटा काम शुरू किया था, लेकिन धीरे-धीरे कारोबार बढ़ता गया। अब वह चाहती हैं कि महिलाएं घर से बाहर निकलकर अपने लिए रोजगार खड़ा करें। उनका कहना है कि सम्मान के साथ खुद कमाना और परिवार की मदद करना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

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