Pew Research Center: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) अब सवालों के जवाब देने और तस्वीरें बनाने से आगे बढ़कर इंसानों की सोच और राय का अनुमान लगाने तक पहुंच गया है, लेकिन क्या मशीन इंसानों की वास्तविक राय को उसी तरह समझ सकती है? प्यू रिसर्च सेंटर के एक हालिया प्रयोग के नतीजे इस पर सवाल खड़े करते हैं। एआइ से तैयार किए गए ‘सिंथेटिक सर्वे’ वास्तविक लोगों की राय को सटीक तरीके से दोहरा नहीं पाए।
करीब 300 सवालों में बड़ा अंतर
हाल में जारी रिपोर्ट के मुताबिक, रिसर्च सेंटर ने तीन पुराने सर्वे एआइ के बनाए ‘डिजिटल ट्विन’ प्रतिभागियों के साथ दोबारा कराए। इन डिजिटल प्रतिभागियों को वास्तविक सर्वे में शामिल लोगों की उम्र, जनसांख्यिकी और अन्य विशेषताओं के आधार पर तैयार किया गया था। करीब 300 सवालों में एआइ और इंसानों के जवाबों के बीच औसतन 12 प्रतिशत अंक का अंतर मिला। करीब 28 फीसदी सवालों में यह अंतर 15 अंक से ज्यादा रहा। कुछ सवालों में अंतर 20, 30 और 40 अंक से भी ऊपर पहुंच गया।
कई मुद्दों पर अनुमान हुआ उलटा
एआइ ने कुछ समूहों की राय का अनुमान काफी ज्यादा लगाया। उदाहरण के लिए, उसने माना कि 97 फीसदी हिस्पैनिक वयस्क विश्व कप को कम से कम कुछ हद तक फॉलो करेंगे, जबकि वास्तविक आंकड़ा 43 फीसदी था। इसी तरह इजराइल के प्रति अनुकूल राय रखने वाले रिपब्लिकन और रिपब्लिकन समर्थक निर्दलियों का एआइ अनुमान 95 फीसदी था, जबकि वास्तविक आंकड़ा 58 फीसदी ही रहा।
‘पता नहीं’ भी समझ नहीं पाया एआइ
रिपोर्ट में एक और अहम अंतर सामने आया। वास्तविक लोग किसी सवाल का जवाब न पता होने पर ‘निश्चित नहीं’ विकल्प चुन सकते हैं। सर्वे में इंसानों ने यह विकल्प करीब 16 फीसदी तक चुना, जबकि एआइ प्रतिभागियों ने सिर्फ 4 फीसदी तक। यानी मशीन ने अनिश्चितता को भी इंसानों की तरह नहीं समझा।
एआइ एजेंट बदले तो बदली तस्वीर
रिसर्च में जीपीटी-5.1 और क्लाउड ओपस 4.6 जैसे अलग-अलग एआइ एजेंट्स का इस्तेमाल किया गया। दोनों के जवाब कई मुद्दों पर अलग रहे और वास्तविक लोगों की राय से भी मेल नहीं खाए। इससे साफ है कि एआइ की मदद से राय का अनुमान लगाने में केवल मॉडल ही नहीं, बल्कि उसके प्रशिक्षण और इस्तेमाल के तरीके का भी असर पड़ता है।


Pew Research: Real people answer surveys, humans write reports; AI used for code, copy-editing