नयी दिल्ली, एक अक्टूबर कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को भले अब पद से हटाने की तैयारी है, लेकिन इस बदलाव की जमीन कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट के प्रदेश प्रभारी का कार्यभार संभालने से पहले ही तैयार हो चुकी थी। सूत्रों ने बताया कि वडिंग के नेतृत्व को लेकर असंतोष से कांग्रेस नेतृत्व उस समय भी अवगत था, जब भूपेश बघेल पंजाब के प्रभारी थे। पार्टी नेतृत्व पंजाब के सांसदों और अन्य प्रमुख नेताओं के साथ सीधे लगातार संपर्क में था।
सूत्रों के अनुसार, बदलाव पहले इसलिए नहीं किया गया क्योंकि पार्टी इस बात पर विचार कर रही थी कि चुनाव से कुछ महीने पहले प्रदेश अध्यक्ष बदलना उचित होगा या नहीं। प्रभारी की भूमिका में बघेल बार-बार यह कह रहे थे कि वडिंग प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने रहेंगे, लेकिन राज्य इकाई और पार्टी नेतृत्व में उनके बने रहने को लेकर पशोपेश की स्थिति बनी हुई थी। सूत्रों ने बताया कि वडिंग को छोड़कर पंजाब के कांग्रेस सांसद उनके काम करने के तरीके से नाखुश थे और उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष उनके नेतृत्व शैली को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी।
उन्होंने कहा कि लगभग सभी अन्य वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री एवं विधायक भी वडिंग के नेतृत्व में चुनाव में जाने के पक्ष में नहीं थे। पायलट के पंजाब प्रभारी बनने के बाद उन्हें सभी नेताओं को साथ लेकर चलने के लिए कहा गया था। युवा नेताओं के प्रति सहानुभूति रखने वाले पायलट ने सभी नेताओं को साथ लाने की कोशिश भी की, लेकिन वडिंग और पंजाब कांग्रेस के बाकी नेताओं के बीच मतभेद इतने गहरे हो चुके थे कि सुलह की गुंजाइश ना के बराबर रह गई थी।
सूत्रों के अनुसार, आम तौर पर ऐसे मामलों की तरह, अंतिम फैसला पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर छोड़ दिया गया कि यथास्थिति बनाए रखने का जोखिम उठाया जाए या बदलाव कर सामूहिक प्रयास के साथ पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को चुनौती दी जाए। दिल्ली ने बदलाव का विकल्प चुना। कांग्रेस से जुड़े कई सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की कि सांसदों, प्रमुख नेताओं और पदाधिकारियों सहित सभी संबंधित पक्षों की राय लिए जाने के बाद यह निष्कर्ष निकला कि अधितम लोग वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने के खिलाफ हैं।
उन्होंने बताया कि वडिंग की शुक्रवार को गांधी से मुलाकात होने की संभावना है, जिसके बाद उनके पद से हटने और नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति की घोषणा की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने वडिंग को उन्हें हटाए जाने के फैसले की जानकारी दे दी है, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफे की पेशकश की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में पूर्व सांसद विजय इंदर सिंगला, पूर्व ओलंपियन और जालंधर कैंट के विधायक परगट सिंह, पूर्व विधायक राणा केपी सिंह, राजा सांसी के विधायक सुखबिंदर सिंह सरकारिया और गुरदासपुर के सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा के नाम भी चर्चा में हैं।
यह घटनाक्रम खरगे, गांधी, वेणुगोपाल और पायलट के बीच हुई बैठक में नए पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति के मुद्दे पर चर्चा के कुछ दिन बाद सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी ऐसे नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहती है जो 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले वडिंग और चन्नी, दोनों गुटों को साथ लेकर चल सके। पंजाब प्रभारी के रूप में पायलट की नियुक्ति के बाद उनके सामने तत्काल चुनौती राज्य कांग्रेस में गुटबाजी से निपटने की थी।
पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी उस समय से जारी है, जब पार्टी नेतृत्व ने एक जुलाई को वडिंग को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए रखने और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को पार्टी की चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष नियुक्त करने का फैसला किया था। पंजाब के पूर्व प्रभारी महासचिव और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पंजाब दौरों के बावजूद दोनों गुटों के बीच स्पष्ट रूप से सुलह नहीं हो सकी और पार्टी के कार्यक्रमों में मतभेद लगातार अधिक खुलकर सामने आते रहे।

