गुमला जिले के पालकोट प्रखंड में 17 जंगली हाथियों का झुंड पिछले चार दिनो से डेरा डाले हुए है। हाथी डहुपानी पंचायत के पिथर टोली गांव के पास के जंगलों से बंगरु पंचायत के कोनकेल-पेटसेरा गांव में आ गए हैं। इससे ग्रामीणों में दहशत है। अब तक कई किसानों के खेत में लगे हुए धान के फसलों को हाथियों ने रौंदकर कर बर्बाद कर दिया है। दूर से ही कर रहे हाथियों की पूजा ऐसे में कुछ ग्रामीण हाथियों को भगवान गणेश मानकर धूप, अगरबत्ती और घंटी बजाकर दूर से पूजा कर रहे हैं। वे हाथियों से विनती कर रहे हैं कि वे बिना किसी को नुकसान पहुंचाए वापस लौट जाएं। बताते चलें कि पिछले चार दिनों से हाथियों का यह झुंड खेतों में लगी धान की फसलों को बर्बाद कर रहा है। ग्रामीणों द्वारा मसाल पटाखा जलाने की वजह से अभी तक हाथियों ने गांव के घरों को नुकसान नहीं पहुंचाया है। ग्रामीण डर से रातभर जागकर अपने परिवार और बच्चों की सुरक्षा कर रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि घर से निकलने में भी भय बना रहता है और घरवालों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है कि कहीं से जंगली हाथी से सामना ना हो जाए या गांव में धावा न बोल दे। पूर्व में भी एक दो हाथी प्रत्येक वर्ष क्षेत्र में पहुंचते हैं और जनधन को काफी नुकसान पहुंच चुका है और इतनी बड़ी संख्या में इस बार छोटे-बड़े 17 जंगली हाथी के झुंड से लोगों को भय अधिक बढ़ गया है। बर्बाद फसलों की सूची बन रही इधर, वन विभाग हाथियों पर कड़ी नजर रख रहा है। विभाग ने ग्रामीणों को टॉर्च, मशाल, डीजल, मोबिल और पटाखे बांटे हैं। वनपाल कृष्णा महतो ने बताया कि बर्बाद फसलों की सूची बन रही है और किसानों को मुआवजा मिलेगा। विभाग हाथियों को रायडीह के रास्ते छत्तीसगढ़ भेजने की तैयारी कर रहा है। गुमला जिले के पालकोट प्रखंड में 17 जंगली हाथियों का झुंड पिछले चार दिनो से डेरा डाले हुए है। हाथी डहुपानी पंचायत के पिथर टोली गांव के पास के जंगलों से बंगरु पंचायत के कोनकेल-पेटसेरा गांव में आ गए हैं। इससे ग्रामीणों में दहशत है। अब तक कई किसानों के खेत में लगे हुए धान के फसलों को हाथियों ने रौंदकर कर बर्बाद कर दिया है। दूर से ही कर रहे हाथियों की पूजा ऐसे में कुछ ग्रामीण हाथियों को भगवान गणेश मानकर धूप, अगरबत्ती और घंटी बजाकर दूर से पूजा कर रहे हैं। वे हाथियों से विनती कर रहे हैं कि वे बिना किसी को नुकसान पहुंचाए वापस लौट जाएं। बताते चलें कि पिछले चार दिनों से हाथियों का यह झुंड खेतों में लगी धान की फसलों को बर्बाद कर रहा है। ग्रामीणों द्वारा मसाल पटाखा जलाने की वजह से अभी तक हाथियों ने गांव के घरों को नुकसान नहीं पहुंचाया है। ग्रामीण डर से रातभर जागकर अपने परिवार और बच्चों की सुरक्षा कर रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि घर से निकलने में भी भय बना रहता है और घरवालों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है कि कहीं से जंगली हाथी से सामना ना हो जाए या गांव में धावा न बोल दे। पूर्व में भी एक दो हाथी प्रत्येक वर्ष क्षेत्र में पहुंचते हैं और जनधन को काफी नुकसान पहुंच चुका है और इतनी बड़ी संख्या में इस बार छोटे-बड़े 17 जंगली हाथी के झुंड से लोगों को भय अधिक बढ़ गया है। बर्बाद फसलों की सूची बन रही इधर, वन विभाग हाथियों पर कड़ी नजर रख रहा है। विभाग ने ग्रामीणों को टॉर्च, मशाल, डीजल, मोबिल और पटाखे बांटे हैं। वनपाल कृष्णा महतो ने बताया कि बर्बाद फसलों की सूची बन रही है और किसानों को मुआवजा मिलेगा। विभाग हाथियों को रायडीह के रास्ते छत्तीसगढ़ भेजने की तैयारी कर रहा है।

