मंत्रीजी बोले-नाली के लिए सरकार बनाई है क्या?:नरेश मीणा ने ‘मजबूरी’ में लड़ा चुनाव; RLP ‘मिर्ची बड़े’ की दुकान नहीं

मंत्रीजी बोले-नाली के लिए सरकार बनाई है क्या?:नरेश मीणा ने ‘मजबूरी’ में लड़ा चुनाव; RLP ‘मिर्ची बड़े’ की दुकान नहीं

नमस्कार, पंचायतीराज मंत्रीजी ने गांव वालों को कह दिया- सरकार सिर्फ नाली बनाने के लिए बनाई है क्या? बारां में बीएसएस प्रमुख नेताजी ने बताया कि कैसे परिवार के दबाव में उन्होंने चुनाव लड़ा। नागौर में बोतल निशान वाली पार्टी के एक सीनियर कार्यकर्ता बोले-हमारी पार्टी मिर्ची बड़े की दुकान नहीं है और शिव विधायक बाड़मेर से वाया पाली होते हुए जोधपुर पहुंचे। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. मंत्रीजी बोले नाली के लिए सरकार बनाई क्या? मंत्रीजी कोटा में सेवा संकल्प अभियान के तहत पदयात्रा निकाल रहे थे। इस दौरान रामगंजमंडी के एक गांव में गांव वालों से संवाद भी किया। अपनी जनता के सामने बैठे मंत्रीजी का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर था। उन्होंने गांव वालों से पूछा- क्या केवल नाली बनाने के लिए हमने सरकार बनाई है क्या? गांव वालों का जवाब आता इससे पहले मंत्रीजी खुद बोले- नाली बने या न बने, हम देश का अपमान सहन नहीं कर सकते। इसके बाद मंत्रीजी ने -देश के अपमान में विरोधी पार्टी की भूमिका- विषय पर व्याख्यान देना आरंभ कर दिया। इस दौरान उन्होंने यकीन दिलाने की कोशिश की कि विरोधी पार्टी को वोट दिया तो देश की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इसके बाद उन्होंने वॉट्सएप मैसेज का उदाहरण देते हुए कहा- एक आदमी कह रहा था कि पेट्रोल चाहे हजार रुपए लीटर हो जाए, तब भी वोट बीजेपी को ही दूंगा। जम्हूरियत की नब्ज टटोलकर मंत्रीजी ने आखिरी पत्ता चला। बोले- अगर आपकी नाराजगी मुझसे है तो मुझे पत्थर मारो। मेरा घर तोड़ दो, लेकिन वोट विरोधी पार्टी को मत देना। 2. नरेश मीणा की ‘मजबूरी’ उनके परिवार ने 31 साल तक पंचायत पर राज किया। पिताजी के बाद मां, पत्नी, बहू सबका नंबर आया। इसके बाद नेताजी को याद आया कि गांव में पंचायत का चुनाव लड़ने के लिए दूसरों को भी मौका देना चाहिए। उन्होंने कहा- मैं बारां से निकलकर राजधानी पहुंचा। यूनिवर्सिटी में सचिव का चुनाव जीता। अध्यक्ष का चुनाव लड़ा। साल 2000 में मां पंचायत समिति सदस्य रही। 2005 में पिताजी सदस्य बने। 2010 का चुनाव आया तो पिताजी बोले कि चुनाव लड़, या पत्नी को लड़ा। मैंने कह दिया कि मैं पंचायत चुनाव लड़ने के लिए पैदा नहीं हुआ। फिर भी हालात ऐसे बने के पत्नी ने चुनाव लड़ा और जिला परिषद सदस्य बन गई। 2015 में परिवार से पंचायत समिति सदस्य जीता और 2020 में मां सरपंच बनी। छह महीने पहले पिताजी ने कह दिया- बस अब बहुत हुआ। जनता ने 31 साल आशीर्वाद दिया। अब हमें कसम ले लेनी चाहिए कि पंचायत का चुनाव न लड़ें। दूसरों को मौका दें। कुल मिलाकर नेताजी अब विधानसभा क्षेत्र की जनता से यही आशा करते हैं कि जैसा आशीर्वाद पंचायत क्षेत्र ने परिवार को दिया, वैसा ही वह भी दें। 3. हनुमान बेनीवाल की पार्टी जिस प्रकार हर दुकानदार सपना देखता है कि एक दिन उसकी दुकान शोरूम में तब्दील हो जाए। उसी तर्ज पर नेतागण भी सपना देखते हैं कि एक दिन उनकी छोटी पार्टी बड़ी पार्टी बन जाए, बहुमत लाने की आदी हो जाए और सत्ता का सुख प्राप्त हो। बोतल निशान पार्टी वाले सांसद नेता हनुमान बेनीवाल जी ने जनता को संबोधित करते हुए सवाल किया- पंचायत का चुनाव एकजुट होकर लड़ोगे या अलग-अलग गुटों में बंट जाओगे। उन्होंने आने वाले विधानसभा चुनाव का हवाला दिया और समर्थकों को दुहाई दी कि एकजुट रहे तो चुनाव में कमाल कर सकते हैं। नेताजी के एक सीनियर कार्यकर्ता ने पार्टी की रणनीति सार्वजनिक करते हुए उद्घोष सा किया। बोले- लोग हमारे पास आते हैं और कहते हैं कि फलां – फलां पार्टी ने हमें टिकट नहीं दिया तो आप ही दे दो। हमारी पार्टी मिर्ची बड़े की दुकान थोड़े है कि कोई आए और कहे कि लाओ गरम-गरम दे दो। कुल मिलाकर कार्यकर्ता भी समझने लगे कि दुकान आहिस्ता-आहिस्ता बड़ी हो रही है। इसके लिए पार्टी प्रमुख मेहनत जमकर कर रहे हैं। 4. चलते-चलते.. बहता पानी निर्मल होत है। भाटी जी लगातार बहते रहते हैं। राजनीति में ठहराव घातक होता है। भाटी जी की महत्वकांक्षाएं बड़ी हैं, विधानसभा में जीत के बाद उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा था। जीत नहीं सके लेकिन विधायकों में भी वे खास विधायक हैं। किसी पार्टी से ताल्लुक नहीं रखते लेकिन अपने इलाके में लगातार एक्टिव रहते हैं। सोशल मीडिया पर उन्हें लेकर काफी क्रेज है। देश के उभरते युवा नेताओं में उनका नाम गिना जाता है। जनता की नब्ज का पता लगाने का पुराना राजनीतिक नुस्खा है कि यात्रा निकाल कर देख लो। ईडब्लूएस के सरलीकरण का मुद्दा लेकर भाटी जी भी बाड़मेर से निकल पड़ा। पाली-जालोर का चक्कर लगाते हुए जोधपुर पहुंच गए। यात्रा में उनका कई जगह जोरदार स्वागत हुआ। ऐसे स्वागत के लिए मंत्री-सांसद भी तरसते हैं। जेसीबी से फूलों की बरसात हुई। काफिला जहां पहुंचा वहीं भारी समर्थन मिला। सबसे खूबसूरत तस्वीर पाली के फालना से सामने आई। स्कूल के बच्चे बस से घर लौट रहे थे। दूसरी लेन से भाटी का कारवां जा रहा था। बच्चे खिड़कियों से हाथ हिलाकर भाटी का अभिवादन करने लगे। भाटी भी कार से निकले और बच्चों का अभिवादन स्वीकर किया। बच्चों के चहेते नेता राजनीति में अक्सर लंबी दूरी तय करते हैं। इनपुट सहयोग- मुकेश सोनी (कोटा), प्रकाश तंवर (नागौर), ओम टेलर (पाली), खेताराम जाट (बाली, पाली)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।

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