बारां जिले के शाहबाद कंजर्वेशन रिजर्व में 1800 मेगावाट के निजी वाटर पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट लगाने के फैसले के खिलाफ जनसंगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। पीपल्स ग्रीन पार्टी, शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन, चंबल संसद और शाहबाद संरक्षण समिति ने परियोजना के विरोध में 20 नवंबर को जयपुर में मुख्यमंत्री आवास तक कूच करने का ऐलान किया है। डॉ. सुधांशु और गब्बर यादव का कहना है कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार परियोजना के लिए 1 लाख 19 हजार 759 पेड़ों की कटाई होगी, जबकि उनका दावा है कि इससे 5 लाख से ज्यादा पेड़-पौधे और दुर्लभ जड़ी-बूटियां भी नष्ट होंगी। कुनो नदी के प्राकृतिक बहाव पर चिंता जनसंगठनों का कहना है कि परियोजना के तहत कुनो नदी के पानी को लिफ्ट कर उसका रीसाइकिल किया जाएगा। उनका दावा है कि इससे नदी का प्राकृतिक बहाव प्रभावित होगा और क्षेत्र का भूजल स्तर भी नीचे जा सकता है। संगठनों ने आशंका जताई है कि इसका सीधा असर आसपास के ग्रामीण इलाकों पर पड़ेगा। 500 गांवों की खेती और आजीविका पर असर की आशंका विरोध कर रहे संगठनों के अनुसार नदी और भूजल व्यवस्था में बदलाव का असर करीब 500 गांवों की खेती और आजीविका पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि शाहबाद का जंगल स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी समुदायों के लिए केवल वन क्षेत्र नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की आजीविका और प्राकृतिक संसाधनों का महत्वपूर्ण आधार है। चीता कॉरिडोर पर भी उठाए सवाल संगठनों ने शाहबाद के जंगल को चीता कॉरिडोर का हिस्सा बताते हुए परियोजना के वन्यजीवों पर प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि निर्माण और जंगल में होने वाले बदलाव से चीतों के आवागमन का मार्ग प्रभावित हो सकता है। साथ ही, उन्होंने परियोजना से सहरिया आदिवासी समुदाय के विस्थापित होने की आशंका भी जताई है। 20 नवंबर को जयपुर कूच का ऐलान परियोजना के विरोध में अब जनसंगठनों ने आंदोलन को जयपुर तक ले जाने की तैयारी शुरू कर दी है। पीपल्स ग्रीन पार्टी, शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन, चंबल संसद और शाहबाद संरक्षण समिति ने 20 नवंबर को मुख्यमंत्री आवास पर कूच का ऐलान किया है। संगठनों का कहना है कि वे शाहबाद के जंगल, नदी, वन्यजीव और स्थानीय समुदायों पर परियोजना के संभावित प्रभावों को लेकर सरकार के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराएंगे।

