Gonda News: गोंडा जिले में नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर भगाने और उसके साथ दुराचार के मामले में अदालत ने दोषी अभियुक्त सुशील जायसवाल को 20 साल के कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने उस पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह मामला तरबगंज थाना क्षेत्र से जुड़ा है। पुलिस की प्रभावी पैरवी और मॉनिटरिंग सेल की निगरानी के बाद 30 सितंबर 2026 को अदालत ने मामले में फैसला सुनाया।
गोंडा जिले में नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर भगाने और दुराचार करने के मामले में अदालत ने दोषी अभियुक्त सुशील जायसवाल को 20 साल के कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने अभियुक्त पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह मामला तरबगंज थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार, मामले में प्रभावी पैरवी के चलते अदालत ने अभियुक्त को दोषसिद्ध करते हुए सजा सुनाई।
10 मई 2022 को दर्ज हुआ था मुकदमा
पुलिस के मुताबिक, 10 मई 2022 को तरबगंज थाने में नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर भगाकर ले जाने के संबंध में नामजद अभियुक्त के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले में पुलिस ने संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी किशोर को पुलिस अभिरक्षा में लिया था। आवश्यक कार्रवाई के बाद उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया गया था। मामले की विवेचना पूरी करने के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत हुई पैरवी
पुलिस की ओर से बताया गया कि चिन्हित अपराधों में दोषी अभियुक्तों को अधिकतम और जल्द सजा दिलाने के लिए ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत तरबगंज थाने में दर्ज इस मामले की लगातार मॉनिटरिंग की गई। मामले में मॉनिटरिंग सेल, सहायक अभियोजन अधिकारी अशोक कुमार सिंह, कोर्ट मोहर्रिर महिला कांस्टेबल सुमन और थाना तरबगंज के पैरोकार हेड कांस्टेबल सोनू कुमार कन्नौजिया ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी की।
20 साल की सजा और 20 हजार का जुर्माना
पुलिस के अनुसार, प्रभावी पैरवी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने 30 सितंबर 2026 को अभियुक्त सुशील जायसवाल को दोषसिद्ध कर दिया। अदालत ने उसे 20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 20 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया गया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत गंभीर अपराधों में दोषी अभियुक्तों को सजा दिलाने के लिए मामलों की लगातार निगरानी और न्यायालय में प्रभावी पैरवी की जा रही है। इसका उद्देश्य लंबित मामलों में जल्द न्यायिक प्रक्रिया पूरी कराकर दोषियों को कानून के तहत सजा दिलाना है।

