रामपुर के वृद्धाश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन आचार्य पंडित मुमुक्षु कृष्ण दद्दा महाराज ने कर्ण, द्रौपदी और पांडवों से जुड़े प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। इस दौरान उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को धर्म, कर्म, सत्य और जीवन के उच्च मूल्यों का संदेश दिया। आचार्य ने कर्ण के संघर्ष और दानशीलता का जिक्र करते हुए कहा कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, मनुष्य के कर्म और संस्कार ही उसके जीवन की दिशा निर्धारित करते हैं। उन्होंने पांडवों के प्रसंग के माध्यम से विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। साथ ही, श्रीमद्भागवत को केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला सच्चा मार्गदर्शक बताया। इस अवसर पर आश्रम में निवास कर रहे सभी बुजुर्गों के साथ-साथ कर्मचारियों ने भी श्रद्धापूर्वक कथा का श्रवण किया। पूरा परिसर भक्तिमय हो गया और उपस्थित लोगों ने आध्यात्मिक शांति की अनुभूति करते हुए कथा के संदेशों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया।

