पूर्णिया में जर्जर सड़क पर ग्रामीणों का गुस्सा फूटा:पैदल मार्च कर विरोध जताया, तंज कसते हुए पूछा- आपने कभी ऐसी खूबसूरत सड़क देखी है क्या

पूर्णिया में जर्जर सड़क पर ग्रामीणों का गुस्सा फूटा:पैदल मार्च कर विरोध जताया, तंज कसते हुए पूछा- आपने कभी ऐसी खूबसूरत सड़क देखी है क्या

पूर्णिया के बायसी प्रखंड की ताराबारी पंचायत में सड़क की खराब हालत देखकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। जर्जर और कीचड़ से भरी सड़क पर लोगों ने अनोखे तरीके से विरोध जताया। उन्होंने सड़क की तुलना ‘ताजमहल जैसी सुंदरता’ से करके प्रशासन पर तंज कसा। ताजमहल से भी ज्यादा खूबसूरत- तंज का अनोखा अंदाज ताराबारी पंचायत के ग्रामीणों ने कीचड़ और गड्ढों से भरी सड़क पर पैदल मार्च कर विरोध जताया । सड़क की खस्ताहाली पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि आजाद भारत में आपने कभी ऐसी खूबसूरत सड़क देखी है क्या । कोई नहीं कह सकता कि ऐसी सड़क पहले देखी हो। मैं तो कहना चाहता हूं कि शायद ताजमहल की खूबसूरती भी इतनी अच्छी नहीं रही होगी, जितनी अच्छी सड़क ताराबारी पंचायत की यह चमकी सड़क है। नेताओं के लॉलीपॉप और छलावे से परेशान ग्रामीण स्थानीय निवासियों ने न केवल शासन-प्रशासन पर निशाना साधा, बल्कि चुनाव के समय बड़ी-बड़ी बातें और झूठे वादे करने वाले नेताओं पर भी जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने आरोप लगाया कि हर पांच साल में नेताओं द्वारा जनता को केवल वादों का लॉलीपॉप थमा दिया जाता है। इसके जिम्मेदार कौन हैं, यह तो शासन-प्रशासन ही बताएगा। लोग बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, बड़े-बड़े वादे करते हैं और बड़ा-बड़ा लॉलीपॉप देते हैं। हम बेचारे ताराबारी पंचायत के सीधे-साधे लोग उस लॉलीपॉप को आसानी से निगल लेते हैं। नतीजा यह होता है कि पांच साल तक हमको झेलना पड़ता है। ‘नेतृत्व के नाम पर ठगा जाता है’ स्थानीय लोगों ने कहा कि कभी नेतृत्व के नाम पर तो कभी किसी अन्य मुद्दे के नाम पर जनता को सिर्फ ठगा गया है, अब और नहीं ठगे जाएंगे। पंचायत के लोगों से एकजुट होने का आह्वान करते हुए स्पष्ट किया कि अब ताराबारी का कोई भी नागरिक किसी के झांसे में नहीं आएगा। देश के लोकतांत्रिक ढांचे का हवाला देते हुए उन्होंने अपने अधिकारों के लिए लड़ने की बात कही। ग्रामीणों ने कहा कि अब ताराबारी पंचायत के एक-एक जन ने ठाना है, अब हमें कोई नहीं ठगेगा। हम अपना हक खुद लड़कर लेंगे, क्योंकि यह देश एक लोकतांत्रिक देश है और लोकतंत्र में हर एक को अपना हक मांगने और पाने का अधिकार है। जमीनी हकीकत: बदहाल सड़कें और ग्रामीणों की मुश्किलें तस्वीरें बता रही हैं कि ग्रामीण किस हद तक बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। सड़क के नाम पर केवल कीचड़, पानी और गिट्टियां बची हैं, जिससे पैदल चलना भी खतरे से खाली नहीं है। बरसात के मौसम में ऐसे रास्तों से गुजरना स्कूली बच्चों, मरीजों और बुजुर्गों के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है। पूर्णिया के बायसी प्रखंड की ताराबारी पंचायत में सड़क की खराब हालत देखकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। जर्जर और कीचड़ से भरी सड़क पर लोगों ने अनोखे तरीके से विरोध जताया। उन्होंने सड़क की तुलना ‘ताजमहल जैसी सुंदरता’ से करके प्रशासन पर तंज कसा। ताजमहल से भी ज्यादा खूबसूरत- तंज का अनोखा अंदाज ताराबारी पंचायत के ग्रामीणों ने कीचड़ और गड्ढों से भरी सड़क पर पैदल मार्च कर विरोध जताया । सड़क की खस्ताहाली पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि आजाद भारत में आपने कभी ऐसी खूबसूरत सड़क देखी है क्या । कोई नहीं कह सकता कि ऐसी सड़क पहले देखी हो। मैं तो कहना चाहता हूं कि शायद ताजमहल की खूबसूरती भी इतनी अच्छी नहीं रही होगी, जितनी अच्छी सड़क ताराबारी पंचायत की यह चमकी सड़क है। नेताओं के लॉलीपॉप और छलावे से परेशान ग्रामीण स्थानीय निवासियों ने न केवल शासन-प्रशासन पर निशाना साधा, बल्कि चुनाव के समय बड़ी-बड़ी बातें और झूठे वादे करने वाले नेताओं पर भी जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने आरोप लगाया कि हर पांच साल में नेताओं द्वारा जनता को केवल वादों का लॉलीपॉप थमा दिया जाता है। इसके जिम्मेदार कौन हैं, यह तो शासन-प्रशासन ही बताएगा। लोग बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, बड़े-बड़े वादे करते हैं और बड़ा-बड़ा लॉलीपॉप देते हैं। हम बेचारे ताराबारी पंचायत के सीधे-साधे लोग उस लॉलीपॉप को आसानी से निगल लेते हैं। नतीजा यह होता है कि पांच साल तक हमको झेलना पड़ता है। ‘नेतृत्व के नाम पर ठगा जाता है’ स्थानीय लोगों ने कहा कि कभी नेतृत्व के नाम पर तो कभी किसी अन्य मुद्दे के नाम पर जनता को सिर्फ ठगा गया है, अब और नहीं ठगे जाएंगे। पंचायत के लोगों से एकजुट होने का आह्वान करते हुए स्पष्ट किया कि अब ताराबारी का कोई भी नागरिक किसी के झांसे में नहीं आएगा। देश के लोकतांत्रिक ढांचे का हवाला देते हुए उन्होंने अपने अधिकारों के लिए लड़ने की बात कही। ग्रामीणों ने कहा कि अब ताराबारी पंचायत के एक-एक जन ने ठाना है, अब हमें कोई नहीं ठगेगा। हम अपना हक खुद लड़कर लेंगे, क्योंकि यह देश एक लोकतांत्रिक देश है और लोकतंत्र में हर एक को अपना हक मांगने और पाने का अधिकार है। जमीनी हकीकत: बदहाल सड़कें और ग्रामीणों की मुश्किलें तस्वीरें बता रही हैं कि ग्रामीण किस हद तक बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। सड़क के नाम पर केवल कीचड़, पानी और गिट्टियां बची हैं, जिससे पैदल चलना भी खतरे से खाली नहीं है। बरसात के मौसम में ऐसे रास्तों से गुजरना स्कूली बच्चों, मरीजों और बुजुर्गों के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है।  

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