मानदेय बढ़ाने समेत 4 मांगों को लेकर बैंक-सखियों का प्रदर्शन:बोलीं- ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं पहुंचा रहे, महंगाई में कम मानदेय से परिवार चलाना मुश्किल

मानदेय बढ़ाने समेत 4 मांगों को लेकर बैंक-सखियों का प्रदर्शन:बोलीं- ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं पहुंचा रहे, महंगाई में कम मानदेय से परिवार चलाना मुश्किल

सुल्तानपुर में ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं पहुंचा रहीं बैंक सखियों ने अपनी विभिन्न समस्याओं और मूलभूत सुविधाओं को लेकर आवाज उठाई है। सोमवार दोपहर 2 बजे समस्त बैंक सखी संघ, सुल्तानपुर के बैनर तले बैंक सखियां जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचीं। यहां उन्होंने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को मांग पत्र सौंपकर समस्याओं के समाधान की मांग की। बैंक सखियों ने ज्ञापन में कहा कि उन पर लगातार काम का दबाव बढ़ रहा है। इसके बावजूद वर्तमान महंगाई के दौर में उन्हें मिलने वाला मानदेय काफी कम है। इससे परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में दिन-रात बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने का काम कर रही हैं। ऐसे में उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार और संबंधित विभाग को ठोस कदम उठाने चाहिए। मानदेय 30 हजार करने समेत 4 प्रमुख मांगें बैंक सखी संघ ने ज्ञापन में मासिक मानदेय 25 से 30 हजार रुपए करने, बैंक सखी की सेवा को पूर्ण रूप से स्थायी करने की मांग की। इसके अलावा बैंकिंग लेनदेन को सुचारू और डिजिटल तरीके से संचालित करने के लिए निःशुल्क स्मार्टफोन और हर महीने मुफ्त डेटा व कॉलिंग रिचार्ज देने की मांग की गई। बीमा और बैठने की जगह की भी मांग बैंक सखियों ने कार्य के दौरान सुरक्षा के लिए बैंक की ओर से निःशुल्क जीवन और स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही बैंक शाखाओं के भीतर उनके बैठने के लिए समुचित जगह, शौचालय और अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की अपील की। उन्होंने बैंक सखियों को पहचान पत्र और यूनिफॉर्म/ड्रेस उपलब्ध कराने की मांग भी रखी। संघ ने जिलाधिकारी से उनकी व्यावहारिक समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर संबंधित विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की। मांगें पूरी होने पर बेहतर काम करने का दावा बैंक सखियों का कहना है कि वे ग्रामीण इलाकों में लोगों को बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ने और वित्तीय समावेशन को मजबूत करने में लगातार काम कर रही हैं। उनकी मांगें पूरी होने से वे अधिक ऊर्जा और समर्पण के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे सकेंगी।

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