राजेंद्र राठौड़ के बेटे ने RCA-चुनाव से वापस लिया नामांकन:बोले- दबाव में नहीं; चिकित्सा मंत्री-सांसद-विधायक के बेटों ने अब तक नहीं छोड़ा मैदान

राजेंद्र राठौड़ के बेटे ने RCA-चुनाव से वापस लिया नामांकन:बोले- दबाव में नहीं; चिकित्सा मंत्री-सांसद-विधायक के बेटों ने अब तक नहीं छोड़ा मैदान

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के चुनाव में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह ने सोमवार को अपने गुट के साथ नामांकन वापस ले लिया। पराक्रम ने बृजकिशोर उपाध्याय को समर्थन दिया है। पराक्रम सिंह RCA अध्यक्ष पद के दावेदार थे। उन्होंने चुनाव लड़ने के दौरान 32 वोटों का समर्थन होने का दावा भी किया था। छह सदस्यों की कार्यकारिणी के चुनाव में तीन अलग-अलग गुटों ने शनिवार को नामांकन दाखिल किया था। ऐसे में उनका मैदान से हटना चुनावी मुकाबले में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, कार्यकारी सदस्य पद के लिए नामांकन दाखिल करने वाले धर्मवीर शेखावत ने अपना नाम वापस नहीं लिया है। वहीं, चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खीमसर के बेटे धनंजय सिंह, सांसद घनश्याम तिवारी के बेटे आशीष तिवारी और भाजपा विधायक जसवंत यादव के बेटे मोहित यादव ने अब तक अपना नामांकन वापस नहीं लिया है। दूसरी ओर, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बेटे पवन दिलावर पहले ही नाम वापस ले चुके हैं। ऐसे में RCA का चुनाव अब राजनीतिक रस्साकशी और बदलते समर्थन के बीच और दिलचस्प होता जा रहा है। पराक्रम बोले- अध्यक्ष बनना चाहता था नामांकन वापस लेने के बाद पराक्रम सिंह ने कहा कि जब उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया था, तब उनके पास कुल 32 वोटों का समर्थन था। संख्या बल के लिहाज से उनका गुट मजबूत स्थिति में था। वे खुद राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन का अध्यक्ष बनना चाहते थे। उनके साथियों ने भी अलग-अलग पदों के लिए नामांकन दाखिल किए थे। लेकिन बाद में सरकार के स्तर पर अलग फैसला हुआ। सरकार ने बृज किशोर उपाध्याय को अध्यक्ष बनाने और उनके साथियों को छह सदस्यीय कार्यकारिणी में जगह देने का निर्णय लिया। इसके बाद उन्होंने सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए अपने गुट के साथ नामांकन वापस लेने का निर्णय किया। किसी दबाव में नहीं, पार्टी के खिलाफ जाना संस्कारों में नहीं पराक्रम सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी दबाव में नाम वापस नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि उनके पास मजबूत संख्या बल था और इसी आधार पर उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया था। हालांकि, उनके संस्कार उन्हें पार्टी के खिलाफ जाने का फैसला करने की अनुमति नहीं देते। इसलिए उन्होंने बृज किशोर उपाध्याय के नेतृत्व में अपने नाम वापस लेने का निर्णय किया है। पराक्रम सिंह ने कहा कि उन्हें उम्मीद ही नहीं, बल्कि पूरा विश्वास है कि बृज किशोर उपाध्याय राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के लिए अच्छा काम करेंगे। अध्यक्ष से लेकर संयुक्त सचिव पद तक नाम वापस RCA चुनाव में पराक्रम सिंह के गुट की ओर से अलग-अलग पदों पर नामांकन दाखिल किए गए थे। अब इस गुट के प्रमुख चेहरों ने अपने नाम वापस ले लिए हैं। अध्यक्ष पद पर पराक्रम सिंह, सचिव पद पर बृज किशोर उपाध्याय, कोषाध्यक्ष पद पर सुशील जैन और संयुक्त सचिव पद पर गोविंद उपाध्याय ने नामांकन वापस ले लिया है। हालांकि, कार्यकारी सदस्य पद के लिए मैदान में उतरे धर्मवीर शेखावत ने अभी अपना नाम वापस नहीं लिया है। ऐसे में एक तरफ जहां कुछ उम्मीदवारों के हटने से चुनावी समीकरण बदल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ दावेदार अब भी मुकाबले में बने हुए हैं। मंत्रियों और नेताओं के बेटों पर टिकी नजरें राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के चुनाव में अब सबसे ज्यादा चर्चा उन उम्मीदवारों को लेकर है, जिनके परिवारों का प्रदेश की राजनीति में प्रभाव है। चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खीमसर के बेटे धनंजय सिंह, सांसद घनश्याम तिवारी के बेटे आशीष तिवारी और भाजपा विधायक जसवंत यादव के बेटे मोहित यादव ने अब तक अपना नामांकन वापस नहीं लिया है। वहीं, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बेटे पवन दिलावर पहले ही चुनावी मैदान से हट चुके हैं। पराक्रम सिंह के नाम वापसी के फैसले ने इस मुकाबले में नए राजनीतिक समीकरण खड़े कर दिए हैं। RCA में चुनाव से पहले ही शुरू हुई समर्थन की सियासत राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के चुनाव में अब केवल पदों की दावेदारी ही नहीं, बल्कि समर्थन और राजनीतिक सहमति भी अहम भूमिका निभाती नजर आ रही है। तीन गुटों के नामांकन दाखिल करने से शुरू हुआ मुकाबला अब नाम वापसी के साथ नए मोड़ पर पहुंच गया है। पराक्रम सिंह ने 32 वोटों का समर्थन होने का दावा करने के बावजूद सरकार के फैसले के साथ जाने का निर्णय लिया है। ऐसे में सवाल यह है कि बाकी दावेदार चुनावी मैदान में टिके रहते हैं या आने वाले समय में नाम वापसी के जरिए समीकरण एक बार फिर बदलते हैं। फिलहाल, RCA चुनाव पर क्रिकेट से ज्यादा राजनीतिक हलचल का असर दिखाई दे रहा है और अब सभी की नजरें शेष उम्मीदवारों के अगले कदम पर टिकी हैं।

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