Rajasthan Bureaucracy: ऐन पहले टली नए प्रमुख की नियुक्ति, वन विभाग में PMO तक पहुंची शिकायत से हड़कंप!

Rajasthan Bureaucracy: ऐन पहले टली नए प्रमुख की नियुक्ति, वन विभाग में PMO तक पहुंची शिकायत से हड़कंप!

राजस्थान में वन विभाग के नए प्रमुख (पीसीसीएफ-हॉफ) की नियुक्ति के लिए विशेष चयन समिति की बैठक ऐन मौके पर टाल दी गई। यह बैठक 24 सितंबर 2026 को प्रस्तावित थी, लेकिन महज एक दिन पहले, 23 सितंबर को राज्य के कार्मिक विभाग ने ‘अपरिहार्य कारणों’ का हवाला देकर रद्द कर दिया। वन विभाग प्रमुख के चयन के इतिहास में इतनी कम समय सीमा में बैठक टलने की यह पहली घटना है, जिसके बाद से ब्यूरोक्रेसी और राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

पीएमओ में शिकायत, कथित घोटाले की गूंज

बैठक अचानक रद्द होने के पीछे सबसे बड़ा कारण पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे वरिष्ठ अधिकारी पीके उपाध्याय के खिलाफ प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में पहुंची एक गंभीर शिकायत को बताया जा रहा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अधिकारी द्वारा अलवर और बारां जिलों से जुड़े लगभग 21 करोड़ रुपए के कथित वित्तीय घोटाले से जुड़ी विजिलेंस जांच को प्रभावित करने की कोशिश की गई है। इस हाई-प्रोफाइल शिकायत के सामने आने के बाद चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए, जिसके चलते प्रशासनिक स्तर पर तुरंत ब्रेक लगाना पड़ा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले और कानूनी पत्र का हवाला

मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब कोटा के वकील तपेश्वर सिंह भाटी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2011 के चर्चित ‘सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया’ (पी.जे. थॉमस प्रकरण) मामले का हवाला देते हुए मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को एक कानूनी पत्र भेजा गया। इस पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर आरोपों या लंबित जांच के दायरे में आने वाले किसी भी अधिकारी को शीर्ष पद पर नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए, भले ही वह औपचारिक रूप से दोषी साबित न हुआ हो। पत्र में यह भी चेतावनी दी गई थी कि यदि जांच पूरी होने से पहले नियुक्ति की जाती है, तो इसे अदालत में चुनौती दी जाएगी।

1185 करोड़ की फंडिंग और एनओसी पर भी संकट

इस विवाद का असर केवल प्रशासनिक पदों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर महकमे के विकास कार्यों पर भी पड़ता नजर आ रहा है। फ्रांस की विकास एजेंसी (AFD) द्वारा वित्तपोषित 1185 करोड़ रुपए की एक बड़ी परियोजना की फंडिंग और नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) को रोक दिए जाने की खबर ने विभाग की चिंताएं और बढ़ा दी हैं। जब इस पूरे घटनाक्रम और आरोपों को लेकर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास से संपर्क किया गया, तो उन्होंने इस पर कुछ भी खुलकर बोलने से इनकार करते हुए केवल इतना कहा कि इस स्तर पर वे कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं और आगामी फैसला तय समय व नियमों के अधीन ही किया जाएगा।

रेस में कौन-कौन अधिकारी शामिल?

वर्तमान में वन विभाग प्रमुख के इस शीर्ष पद के लिए पीके उपाध्याय, अनुराग भारद्वाज और शिखा मेहरा के नाम प्रमुखता से चर्चा में बने हुए हैं। वरिष्ठता के मामले में पीके उपाध्याय सूची में सबसे आगे चल रहे हैं। हालांकि, इससे पहले जून 2024 में भी वरिष्ठता को दरकिनार करते हुए अरिंदम तोमर की जगह अरिजीत बनर्जी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी, और मौजूदा प्रमुख बनर्जी भी 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। अब देखना यह होगा कि लंबित शिकायतों और कानूनी पेंच के बीच सरकार नया वन प्रमुख चुनने के लिए क्या अगला कदम उठाती है।

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