विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर बिहार के पर्यटन विकास को लेकर सिख हेरिटेज गुरुनानक भवन में सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम का पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक, आधुनिक सुविधाओं और सतत पर्यटन के जरिए राज्य की पर्यटन क्षमता को आगे बढ़ाया जा रहा है। 2025 में 6.62 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंचे बिहार पर्यटन मंत्री ने बताया कि बिहार में पर्यटन क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2025 में राज्य में 6.62 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया। धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों के प्रति पर्यटकों के बढ़ते आकर्षण को देखते हुए पर्यटन परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है। सीतामढ़ी से सोनपुर और बोधगया तक कई बड़ी परियोजनाएं राज्य में कई महत्वपूर्ण पर्यटन परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें सीतामढ़ी के पुनौराधाम में माता सीता की जन्मस्थली पर मंदिर, सोनपुर में बाबा हरिहरनाथ मंदिर कॉरिडोर, बोधगया में 165 करोड़ रुपये की लागत से बौद्ध ध्यान एवं अनुभव केंद्र, सहरसा की मत्स्यगंधा झील में ग्लास ब्रिज और पर्यटन सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा पटना, वैशाली और राजगीर में फाइव स्टार होटल व इको-टूरिज्म सुविधाओं के विकास, पटना हाट सांस्कृतिक केंद्र और वाल्मीकिनगर में लव-कुश पार्क जैसी परियोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। धार्मिक सर्किट से जोड़े जा रहे प्रमुख स्थल पर्यटन विकास के तहत बिहार के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को विभिन्न सर्किट से जोड़ा जा रहा है। रामायण सर्किट में पुनौराधाम, कुशेश्वरस्थान और सिंहेश्वर, जबकि बौद्ध सर्किट में बोधगया, राजगीर, नालंदा और वैशाली को शामिल किया गया है। वहीं फुलवारी और मनेर को सूफी सर्किट से जोड़ा गया है। ‘स्वदेश दर्शन 2.0’ के तहत सोनपुर के उन्नयन, अंबिका भवानी मंदिर में पर्यटक सुविधाओं और गया में बौद्ध ध्यान केंद्र के विकास की योजनाओं पर भी काम चल रहा है। राजगीर, वैशाली और पटना में फाइव स्टार होटल की योजना राज्य में लक्जरी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पीपीपी मॉडल पर राजगीर में दो, वैशाली में एक और पटना में दो फाइव स्टार होटल विकसित करने की योजनाओं पर काम किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य पर्यटन के जरिए निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाना है। 2026-27 में पर्यटन को लेकर कई लक्ष्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में मत्स्यगंधा झील और वाल्मीकि पार्क को पूरा करने के साथ गया में 1,000 बेड की क्षमता वाले धर्मशाला परिसर के निर्माण का लक्ष्य रखा है। साथ ही बिहार को घरेलू पर्यटक आगमन के मामले में देश के शीर्ष 10 राज्यों में शामिल करने और विदेशी पर्यटक आगमन में शीर्ष पांच राज्यों में लाने की दिशा में काम किया जा रहा है। डिजिटल सुविधाओं पर भी जोर बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक नंद किशोर ने पर्यटन क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया। पर्यटकों की सुविधा के लिए वेबसाइट और मोबाइल ऐप, ऑनलाइन बुकिंग, जीपीएस आधारित सेवाओं और रियल टाइम पर्यटन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण के लिए ई-वाहनों और रोपवे जैसे पर्यावरण अनुकूल परिवहन साधनों को बढ़ावा देने की बात भी कही गई। पर्यटन निवेश के लिए सब्सिडी और विशेष पैकेज अधिकारियों के अनुसार पर्यटन क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने विभिन्न वित्तीय प्रोत्साहन दिए हैं। 10 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं पर 30 प्रतिशत तक और 50 करोड़ रुपये या उससे अधिक की परियोजनाओं पर 25 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी का प्रावधान है। इसके अलावा एससी, एसटी, ईबीसी, बीसी, दिव्यांग और महिला उद्यमियों के लिए विशेष पैकेज की व्यवस्था की गई है। पर्यटन क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने के लिए नीति अवधि में एक लाख लोगों को कौशल प्रशिक्षण देने और एक लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य भी रखा गया है। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर बिहार के पर्यटन विकास को लेकर सिख हेरिटेज गुरुनानक भवन में सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम का पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक, आधुनिक सुविधाओं और सतत पर्यटन के जरिए राज्य की पर्यटन क्षमता को आगे बढ़ाया जा रहा है। 2025 में 6.62 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंचे बिहार पर्यटन मंत्री ने बताया कि बिहार में पर्यटन क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2025 में राज्य में 6.62 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया। धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों के प्रति पर्यटकों के बढ़ते आकर्षण को देखते हुए पर्यटन परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है। सीतामढ़ी से सोनपुर और बोधगया तक कई बड़ी परियोजनाएं राज्य में कई महत्वपूर्ण पर्यटन परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें सीतामढ़ी के पुनौराधाम में माता सीता की जन्मस्थली पर मंदिर, सोनपुर में बाबा हरिहरनाथ मंदिर कॉरिडोर, बोधगया में 165 करोड़ रुपये की लागत से बौद्ध ध्यान एवं अनुभव केंद्र, सहरसा की मत्स्यगंधा झील में ग्लास ब्रिज और पर्यटन सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा पटना, वैशाली और राजगीर में फाइव स्टार होटल व इको-टूरिज्म सुविधाओं के विकास, पटना हाट सांस्कृतिक केंद्र और वाल्मीकिनगर में लव-कुश पार्क जैसी परियोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। धार्मिक सर्किट से जोड़े जा रहे प्रमुख स्थल पर्यटन विकास के तहत बिहार के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को विभिन्न सर्किट से जोड़ा जा रहा है। रामायण सर्किट में पुनौराधाम, कुशेश्वरस्थान और सिंहेश्वर, जबकि बौद्ध सर्किट में बोधगया, राजगीर, नालंदा और वैशाली को शामिल किया गया है। वहीं फुलवारी और मनेर को सूफी सर्किट से जोड़ा गया है। ‘स्वदेश दर्शन 2.0’ के तहत सोनपुर के उन्नयन, अंबिका भवानी मंदिर में पर्यटक सुविधाओं और गया में बौद्ध ध्यान केंद्र के विकास की योजनाओं पर भी काम चल रहा है। राजगीर, वैशाली और पटना में फाइव स्टार होटल की योजना राज्य में लक्जरी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पीपीपी मॉडल पर राजगीर में दो, वैशाली में एक और पटना में दो फाइव स्टार होटल विकसित करने की योजनाओं पर काम किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य पर्यटन के जरिए निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाना है। 2026-27 में पर्यटन को लेकर कई लक्ष्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में मत्स्यगंधा झील और वाल्मीकि पार्क को पूरा करने के साथ गया में 1,000 बेड की क्षमता वाले धर्मशाला परिसर के निर्माण का लक्ष्य रखा है। साथ ही बिहार को घरेलू पर्यटक आगमन के मामले में देश के शीर्ष 10 राज्यों में शामिल करने और विदेशी पर्यटक आगमन में शीर्ष पांच राज्यों में लाने की दिशा में काम किया जा रहा है। डिजिटल सुविधाओं पर भी जोर बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक नंद किशोर ने पर्यटन क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया। पर्यटकों की सुविधा के लिए वेबसाइट और मोबाइल ऐप, ऑनलाइन बुकिंग, जीपीएस आधारित सेवाओं और रियल टाइम पर्यटन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण के लिए ई-वाहनों और रोपवे जैसे पर्यावरण अनुकूल परिवहन साधनों को बढ़ावा देने की बात भी कही गई। पर्यटन निवेश के लिए सब्सिडी और विशेष पैकेज अधिकारियों के अनुसार पर्यटन क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने विभिन्न वित्तीय प्रोत्साहन दिए हैं। 10 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं पर 30 प्रतिशत तक और 50 करोड़ रुपये या उससे अधिक की परियोजनाओं पर 25 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी का प्रावधान है। इसके अलावा एससी, एसटी, ईबीसी, बीसी, दिव्यांग और महिला उद्यमियों के लिए विशेष पैकेज की व्यवस्था की गई है। पर्यटन क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने के लिए नीति अवधि में एक लाख लोगों को कौशल प्रशिक्षण देने और एक लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य भी रखा गया है।

