चुनाव आयोग और ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लगातार हमलों के बीच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पलटवार किया है। साय ने कांग्रेस पर चुनाव में हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जब जनता की अदालत में चुनाव हारती है, तो अपनी हार की जिम्मेदारी लेने के बजाय चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े करने लगती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस अब तक 100 से ज्यादा चुनाव हार चुकी है। उनके मुताबिक, यही वजह है कि राहुल गांधी लगातार चुनाव आयोग की भूमिका और चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं। साय ने चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की चर्चाओं पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग में किसी तरह का मतभेद नहीं है और भारतीय निर्वाचन आयोग की दुनिया में अपनी विश्वसनीयता है। आयोग की कार्यप्रणाली की अलग-अलग स्तरों पर सराहना होती रही है। दरअसल, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति की खबरें सामने आने के बाद राहुल गांधी ने आयोग पर निशाना साधा था। 23 सितंबर को राहुल गांधी ने ‘वोट चोरी’ को भारतीय लोगों के खिलाफ अपराध और संविधान पर सीधा हमला बताया था। चुनाव आयोग ने बाद में कहा कि SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। ‘इतना अविश्वास है तो सांसद पद से इस्तीफा क्यों नहीं’ मुख्यमंत्री साय ने राहुल गांधी के चुनाव प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठाने को लेकर भी सवाल किया। उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी को चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया पर इतना ही अविश्वास है, तो उन्हें सांसद पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। साय ने कांग्रेस पर देश में भ्रम और सनसनी फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठाने से लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचता है। राहुल गांधी से माफी की मांग मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी से अपने बयानों के लिए देश से माफी मांगने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने के बजाय कांग्रेस को चुनावी नतीजों के बाद अपनी भूमिका और रणनीति पर विचार करना चाहिए। राहुल गांधी का आरोप क्या है? राहुल गांधी पिछले कुछ समय से मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठा रहे हैं। 23 सितंबर को उन्होंने चुनाव आयोग से जुड़े कथित मतभेदों की खबरों के बाद ‘वोट चोरी’ को संविधान पर सीधा हमला बताया था। इसके बाद 24 सितंबर को भी उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। वहीं, चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर आयोग के भीतर मतभेद की खबरों को खारिज करते हुए कहा है कि SIR से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

