चतरा सदर अस्पताल में मरीजों को मुफ्त दवा नहीं मिलने का मामला सामने आया है। अस्पताल के एक डॉक्टर पर कमीशन के लालच में मरीजों को बाहर की दवा लिखने का आरोप लगा है। मामला चतरा सदर थाना क्षेत्र के विंड मोहल्ला निवासी अलीम खान से जुड़ा है। अलीम अपनी मां का ब्लड प्रेशर का इलाज कराने सदर अस्पताल पहुंचे थे। ओपीडी में ड्यूटी पर तैनात डॉ. एसके चौधरी ने उनकी मां की जांच की। आरोप है कि जांच के बाद अस्पताल में उपलब्ध मुफ्त दवा देने के बजाय डॉक्टर ने उन्हें एक पर्ची थमा दी। मरीज के परिजनों के अनुसार, पर्ची में बाहर से दवा लेने के लिए कहा गया। मुफ्त दवा के बजाय बाहर की दवा लिखने पर उठे सवाल अलीम खान का आरोप है कि सरकारी अस्पताल में उपलब्ध मुफ्त दवा देने के बजाय उन्हें बाहर से दवा खरीदने के लिए कहा गया। इससे अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली मुफ्त दवा की व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन ने भी संज्ञान लिया है। आरोप है कि डॉक्टर ने मरीज की जांच करने के बाद सरकारी अस्पताल की दवा उपलब्ध कराने के बजाय बाहर की दवा लिखी। इस मामले में डॉक्टर की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, डॉक्टर पर लगाए गए कमीशन के आरोप की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। डीएस ने डॉ. एसके चौधरी से मांगा जवाब मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने इसे गंभीरता से लिया है। सदर अस्पताल के डीएस ने डॉ. एसके चौधरी से पूरे मामले में जवाब मांगा है। अब डॉक्टर के जवाब के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मरीज को अस्पताल की मुफ्त दवा देने के बजाय बाहर की दवा क्यों लिखी गई। फिलहाल अस्पताल प्रबंधन की ओर से मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया है। चतरा सदर अस्पताल में मरीजों को मुफ्त दवा नहीं मिलने का मामला सामने आया है। अस्पताल के एक डॉक्टर पर कमीशन के लालच में मरीजों को बाहर की दवा लिखने का आरोप लगा है। मामला चतरा सदर थाना क्षेत्र के विंड मोहल्ला निवासी अलीम खान से जुड़ा है। अलीम अपनी मां का ब्लड प्रेशर का इलाज कराने सदर अस्पताल पहुंचे थे। ओपीडी में ड्यूटी पर तैनात डॉ. एसके चौधरी ने उनकी मां की जांच की। आरोप है कि जांच के बाद अस्पताल में उपलब्ध मुफ्त दवा देने के बजाय डॉक्टर ने उन्हें एक पर्ची थमा दी। मरीज के परिजनों के अनुसार, पर्ची में बाहर से दवा लेने के लिए कहा गया। मुफ्त दवा के बजाय बाहर की दवा लिखने पर उठे सवाल अलीम खान का आरोप है कि सरकारी अस्पताल में उपलब्ध मुफ्त दवा देने के बजाय उन्हें बाहर से दवा खरीदने के लिए कहा गया। इससे अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली मुफ्त दवा की व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन ने भी संज्ञान लिया है। आरोप है कि डॉक्टर ने मरीज की जांच करने के बाद सरकारी अस्पताल की दवा उपलब्ध कराने के बजाय बाहर की दवा लिखी। इस मामले में डॉक्टर की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, डॉक्टर पर लगाए गए कमीशन के आरोप की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। डीएस ने डॉ. एसके चौधरी से मांगा जवाब मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने इसे गंभीरता से लिया है। सदर अस्पताल के डीएस ने डॉ. एसके चौधरी से पूरे मामले में जवाब मांगा है। अब डॉक्टर के जवाब के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मरीज को अस्पताल की मुफ्त दवा देने के बजाय बाहर की दवा क्यों लिखी गई। फिलहाल अस्पताल प्रबंधन की ओर से मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया है।

