पाकुड़ के 4 पहाड़िया नाबालिग बोकारो में बचाए गए:केरल में काम दिलाने के बहाने ले जा रहा था दलाल, 2 बच्चों को परिवार को सौंपा

पाकुड़ के 4 पहाड़िया नाबालिग बोकारो में बचाए गए:केरल में काम दिलाने के बहाने ले जा रहा था दलाल, 2 बच्चों को परिवार को सौंपा

बोकारो से बचाए गए आदिम जनजाति पहाड़िया समुदाय के चार नाबालिगों को उनके परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया पाकुड़ के बाल कल्याण समिति कार्यालय में शुरू की गई। दस्तावेजों के मिलान के बाद दो बच्चों को उनके परिवार को सौंप दिया गया है, जबकि दो अन्य बच्चों के दस्तावेज अधूरे होने के कारण उनकी जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद रविवार को उन्हें भी परिजनों को सौंपने की तैयारी है। बाल कल्याण समिति के सदस्य विनोद प्रमाणिक ने बताया कि चारों नाबालिग पाकुड़ जिले के रहने वाले हैं। एक दलाल इन्हें केरल में काम दिलाने के बहाने ले जा रहा था। बोकारो में मामले की जानकारी मिलने के बाद वहां की बाल कल्याण समिति ने बच्चों को बचाया और दलाल को भी पकड़ा। इसके बाद जिला प्रशासन के सहयोग से चारों बच्चों को पाकुड़ लाया गया। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद परिजनों को सौंपे जा रहे बच्चे बच्चों को पाकुड़ लाने के बाद बाल कल्याण समिति ने उनके दस्तावेजों और परिजनों से जुड़े विवरण का सत्यापन शुरू किया। इसी प्रक्रिया के तहत दो बच्चों के दस्तावेज सही पाए जाने के बाद उन्हें परिवार को सौंप दिया गया। शेष दो बच्चों के दस्तावेज पूरे नहीं होने के कारण समिति उनकी जांच कर रही है। इस दौरान समिति की सदस्य रंजन श्रीवास्तव और सलमा जहां भी मौजूद रहीं। जिला प्रशासन की ओर से दूसरे राज्यों में नाबालिगों को ले जाने वाले लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि बच्चों को काम के नाम पर बाहर ले जाने की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके। आदिम जनजाति बहुल इलाकों में सक्रिय हैं दलाल पाकुड़ के आदिम जनजाति बहुल ग्रामीण क्षेत्रों में नाबालिगों को काम दिलाने के नाम पर दूसरे राज्यों में ले जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। जानकारी के अनुसार, बंगाल समेत अन्य राज्यों से आने वाले दलाल स्थानीय लोगों के संपर्क के जरिए परिवारों तक पहुंचते हैं और बच्चों को बाहर काम दिलाने के साथ अच्छी कमाई का झांसा देते हैं। कई मामलों में अभिभावकों की सहमति लेकर बच्चों को दूसरे प्रदेश ले जाने का प्रयास किया जाता है। जिला प्रशासन के निर्देश पर बाल कल्याण समिति इन क्षेत्रों में जागरूकता अभियान भी चला रही है। इसके बावजूद नाबालिगों को दूसरे राज्यों में ले जाने के प्रयास जारी रहने के कारण प्रशासन और समिति की ओर से निगरानी बढ़ाई जा रही है। बोकारो से बचाए गए आदिम जनजाति पहाड़िया समुदाय के चार नाबालिगों को उनके परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया पाकुड़ के बाल कल्याण समिति कार्यालय में शुरू की गई। दस्तावेजों के मिलान के बाद दो बच्चों को उनके परिवार को सौंप दिया गया है, जबकि दो अन्य बच्चों के दस्तावेज अधूरे होने के कारण उनकी जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद रविवार को उन्हें भी परिजनों को सौंपने की तैयारी है। बाल कल्याण समिति के सदस्य विनोद प्रमाणिक ने बताया कि चारों नाबालिग पाकुड़ जिले के रहने वाले हैं। एक दलाल इन्हें केरल में काम दिलाने के बहाने ले जा रहा था। बोकारो में मामले की जानकारी मिलने के बाद वहां की बाल कल्याण समिति ने बच्चों को बचाया और दलाल को भी पकड़ा। इसके बाद जिला प्रशासन के सहयोग से चारों बच्चों को पाकुड़ लाया गया। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद परिजनों को सौंपे जा रहे बच्चे बच्चों को पाकुड़ लाने के बाद बाल कल्याण समिति ने उनके दस्तावेजों और परिजनों से जुड़े विवरण का सत्यापन शुरू किया। इसी प्रक्रिया के तहत दो बच्चों के दस्तावेज सही पाए जाने के बाद उन्हें परिवार को सौंप दिया गया। शेष दो बच्चों के दस्तावेज पूरे नहीं होने के कारण समिति उनकी जांच कर रही है। इस दौरान समिति की सदस्य रंजन श्रीवास्तव और सलमा जहां भी मौजूद रहीं। जिला प्रशासन की ओर से दूसरे राज्यों में नाबालिगों को ले जाने वाले लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि बच्चों को काम के नाम पर बाहर ले जाने की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके। आदिम जनजाति बहुल इलाकों में सक्रिय हैं दलाल पाकुड़ के आदिम जनजाति बहुल ग्रामीण क्षेत्रों में नाबालिगों को काम दिलाने के नाम पर दूसरे राज्यों में ले जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। जानकारी के अनुसार, बंगाल समेत अन्य राज्यों से आने वाले दलाल स्थानीय लोगों के संपर्क के जरिए परिवारों तक पहुंचते हैं और बच्चों को बाहर काम दिलाने के साथ अच्छी कमाई का झांसा देते हैं। कई मामलों में अभिभावकों की सहमति लेकर बच्चों को दूसरे प्रदेश ले जाने का प्रयास किया जाता है। जिला प्रशासन के निर्देश पर बाल कल्याण समिति इन क्षेत्रों में जागरूकता अभियान भी चला रही है। इसके बावजूद नाबालिगों को दूसरे राज्यों में ले जाने के प्रयास जारी रहने के कारण प्रशासन और समिति की ओर से निगरानी बढ़ाई जा रही है।  

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