UN में रूस-जर्मनी के विदेश मंत्रियों की पहली मुलाकात, यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार हुई सीधी बातचीत

UN में रूस-जर्मनी के विदेश मंत्रियों की पहली मुलाकात, यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार हुई सीधी बातचीत

Russia Germany Talks: संयुक्त राष्ट्र (UN) की बैठक के दौरान एक बड़ी खबर सामने आई है। यूक्रेन पर हमले के बाद पहली बार रूस और जर्मनी के विदेश मंत्रियों ने एक-दूसरे से मुलाकात की और बातचीत की। साल 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से ही दोनों देशों के बीच बातचीत लगभग बंद हो गई थी, इसलिए इस मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। बैठक में यूक्रेन युद्ध, द्विपक्षीय संबंधों और काला सागर के रास्ते अनाज निर्यात को लेकर चर्चा हुई।

अनाज संकट और ब्लैक सी रूट पर सीधी बात

जर्मन विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव से मुलाकात के दौरान काला सागर (Black Sea) के रास्ते अनाज के सुरक्षित निर्यात को जल्द से जल्द बहाल करने की अपील की। जर्मन प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, वाडेफुल ने कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील और गरीब देशों) में गहराते खाद्य संकट को देखते हुए समय बहुत कम है और सभी पक्षों को व्यावहारिक समाधान निकालने की जरूरत है।

लावरोव का तंज- ‘नया कुछ नहीं कहा बर्लिन ने’

वहीं दूसरी तरफ रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का रुख इस बैठक के बाद काफी सख्त नजर आया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लावरोव ने तंज कसते हुए कहा कि जर्मन मंत्री ने बातचीत में ऐसी कोई नई बात नहीं कही जो बर्लिन अपने सार्वजनिक बयानों में न कहता आ रहा हो। लावरोव ने कहा कि मैंने उनसे साफ कहा कि आप मुझे फोन करके सिर्फ इतना कह सकते थे कि मेरा बयान पढ़ लीजिए। रूसी विदेश मंत्री ने आगे कहा कि सुरक्षित समुद्री रास्तों के लिए रूस इस समय भारत, मिस्र और तुर्की जैसे देशों के साथ सीधी बातचीत कर रहा है।

ड्रोन हमले और हाइब्रिड वॉर पर तल्खी

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में पूर्वी जर्मनी के लीपजिग/हाले एयरपोर्ट पर हुए एक ड्रोन हमले के प्रयास को लेकर दोनों देशों में तनाव चरम पर है। जर्मनी ने इस घटना के लिए सीधे तौर पर मॉस्को को जिम्मेदार ठहराते हुए बर्लिन में एक रूसी वाणिज्य दूतावास और सांस्कृतिक केंद्र को बंद कर दिया है। बैठक के दौरान जर्मन पक्ष ने रूस से यूरोप और नाटो के खिलाफ तनाव बढ़ाने वाले कदम तुरंत रोकने को कहा। साथ ही यह साफ कर दिया कि इस तरह के हाइब्रिड हमलों से यूक्रेन को मिलने वाले जर्मन समर्थन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

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