सरकारी स्कूलों में गणित और विज्ञान पढ़ाने का तरीका अब सिर्फ ब्लैकबोर्ड पर सूत्र लिखने और किताब की परिभाषा समझाने तक सीमित नहीं रहेगा। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 6 से 10 तक विज्ञान और गणित पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए एसटीईएम आधारित क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण की रूपरेखा तैयार की है। इसका मकसद शिक्षक को सिर्फ विषय का जानकार बनाने के बजाय ऐसा प्रशिक्षक तैयार करना है। जो बच्चों से सवाल करवाए, प्रयोग करवाए और उन्हें खुद निष्कर्ष तक पहुंचने का मौका दे। यानी गणित का फॉर्मूला पहले बताया नहीं जाएगा, बल्कि गतिविधि से उसका इस्तेमाल समझाया जाएगा। विज्ञान का नियम रटवाने के बजाय प्रयोग के जरिए उसका असर दिखाया जाएगा। प्रशिक्षण में विज्ञान और गणित को अलग-अलग विषयों की तरह पढ़ाने के बजाय साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स को आपस में जोड़कर पढ़ाने पर जोर है। किट, मॉडल, गतिविधि और प्रोजेक्ट इसके प्रमुख माध्यम होंगे। खास बात यह है कि बदलाव केवल शिक्षक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहेगा। राज्य स्तर पर प्रशिक्षण की रूपरेखा और मुख्य प्रशिक्षकों की व्यवस्था होगी, जिला स्तर पर शिक्षकों की सूची और निरीक्षण होगा तथा ब्लॉक स्तर पर शिक्षक खुद गतिविधियों का अभ्यास करेंगे। जिले में इस प्रोग्राम पर वर्किंग शुरू कर दी गई है। शिक्षकों के नाम आ रहे हैं। जल्द ही ट्रेनिंग देना शुरू कर देंगे। जिले में कुल 959 स्कूल हैं। – सुरेन्द्र गोपालिया, जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक), भरतपुर।

