Neck Cracking Risk: गर्दन में जकड़न या दबाव महसूस होने पर कई लोग इसे चटकाते हैं। कुछ लोगों को गर्दन चटकाने के बाद थोड़ी देर के लिए आराम महसूस होता है, इसलिए धीरे धीरे उन्हें इसकी आदत हो जाती है और वे बार बार गर्दन चटकाने लगते हैं। लेकिन गर्दन को बार बार, बहुत जोर से या गलत तरीके से चटकाना नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि गर्दन चटकाने से शरीर पर क्या असर पड़ सकता है और किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
गर्दन चटकाने पर आवाज क्यों आती है?
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, गर्दन चटकने की आवाज का मतलब यह नहीं है कि हड्डी टूट रही है या घिस रही है। गर्दन के जोड़ को हिलाने पर जोड़ के अंदर दबाव में बदलाव से आवाज आ सकती है। इसके अलावा लिगामेंट या टेंडन के हिलने से भी चटकने जैसी आवाज सुनाई दे सकती है। कभी कभी गर्दन चटकाने से दबाव या दर्द में थोड़ी देर के लिए राहत भी महसूस हो सकती है।
गर्दन चटकाने से क्या नुकसान हो सकता है?
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के मुताबिक, गर्दन को बार बार और जोर लगाकर चटकाने से समय के साथ जोड़ को सहारा देने वाले लिगामेंट और टेंडन ढीले हो सकते हैं। इससे जोड़ की स्थिरता प्रभावित हो सकती है और चोट का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा बहुत जोर से या गलत तरीके से गर्दन चटकाने पर मांसपेशियों में खिंचाव या नस दबने जैसी समस्या भी हो सकती है।
क्या गर्दन चटकाने से स्ट्रोक हो सकता है?
हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार, गर्दन को तेजी से मोड़ने या चटकाने जैसी गतिविधि के दौरान बहुत दुर्लभ मामलों में गर्दन की एक रक्त वाहिका की अंदरूनी परत में चोट लग सकती है। इसे वर्टिब्रल आर्टरी डिसेक्शन कहा जाता है। इस स्थिति में रक्त वाहिका की दीवार में खून जमा होकर थक्का बन सकता है। अगर यह थक्का दिमाग तक जाने वाले रक्त प्रवाह को रोक देता है तो स्ट्रोक हो सकता है।
क्या गर्दन चटकाने से पैरालिसिस भी हो सकता है?
हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार, गर्दन की रक्त वाहिका में चोट के कारण होने वाला स्ट्रोक कुछ मामलों में पैरालिसिस का कारण बन सकता है। हालांकि, गर्दन चटकाने के बाद इस तरह की स्थिति बहुत दुर्लभ है।
बार बार गर्दन चटकाने की जरूरत महसूस हो तो क्या करें?
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, अगर गर्दन दिन में कभी कभार चटकती है तो आमतौर पर यह चिंता की बात नहीं होती। लेकिन अगर हर कुछ मिनट या हर घंटे गर्दन चटकाने की जरूरत महसूस होती है तो इसकी वजह पर ध्यान देना चाहिए। गलत बैठने का तरीका, लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल का इस्तेमाल और गर्दन की मांसपेशियों में खिंचाव इसके पीछे हो सकते हैं। गर्दन में लगातार दर्द हो या बार बार चटकाने की जरूरत महसूस हो तो स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार, गर्दन की तेज मूवमेंट या चटकाने के बाद अगर शरीर या चेहरे के एक तरफ अचानक कमजोरी या सुन्नपन, तेज सिरदर्द, चक्कर, संतुलन बिगड़ना, चलने में परेशानी, नजर से जुड़ी समस्या या बोलने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए। ये स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं।
गर्दन में जकड़न हो तो क्या करें?
हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार, गर्दन में हल्का दर्द या जकड़न होने पर हल्की स्ट्रेचिंग, ठंडी या गर्म सिकाई और हल्की मालिश से राहत मिल सकती है। लेकिन अगर दर्द बढ़ रहा है, लंबे समय तक बना हुआ है या रोजमर्रा के काम प्रभावित कर रहा है तो स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

