शिक्षा व्यवस्था चरमराई, तीन बीईईओ के भरोसे 3147 स्कूल

शिक्षा व्यवस्था चरमराई, तीन बीईईओ के भरोसे 3147 स्कूल

जिले की शिक्षा व्यवस्था इन दिनों अधिकारियों की कमी से प्रभावित हो रही है। जिले में संचालित 3147 सरकारी विद्यालयों की निगरानी महज तीन प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (बीईईओ) के भरोसे चल रही है। गिरिडीह सदर प्रखंड का अतिरिक्त प्रभार जिला शिक्षा अधीक्षक के पास है। वहीं जिले के 10 प्रखंडों में बीईईओ का पद लंबे समय से रिक्त है। ऐसे में अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे अधिकारियों पर काम का दबाव बढ़ गया है।वर्तमान में बगोदर, बेंगाबाद और गांवा प्रखंड में ही बीईईओ की नियमित तैनाती है। बगोदर के बीईईओ रंजीत कुमार चौधरी को बिरनी, सरिया और धनवार का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। बेंगाबाद के बीईईओ अशोक कुमार को डुमरी, पीरटांड़ और गांडेय का अतिरिक्त प्रभार मिला हुआ है। वहीं गांवा के बीईईओ तितुलाल मंडल जमुआ, देवरी और तिसरी प्रखंड का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं। गिरिडीह सदर प्रखंड का प्रभार जिला शिक्षा अधीक्षक आशीष कुमार हेम्ब्रम के पास है। निरीक्षण प्रभावित, विद्यालयों की व्यवस्था पर असर बीईईओ की कमी का सीधा असर विद्यालयों की नियमित निगरानी पर पड़ रहा है। अतिरिक्त प्रभार के कारण अधिकारी सभी प्रखंडों के विद्यालयों तक नियमित रूप से नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे शिक्षकों की उपस्थिति, कक्षा संचालन, पठन-पाठन की गुणवत्ता और विद्यालयों में अनुशासन की नियमित समीक्षा प्रभावित हो रही है।ग्रामीण क्षेत्रों के कई विद्यालयों में समय पर कक्षाएं संचालित नहीं होने और शैक्षणिक गतिविधियों में अपेक्षित गति नहीं होने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। नियमित निरीक्षण और फीडबैक का तंत्र कमजोर होने से ऐसी शिकायतों पर समय पर कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। योजनाओं की निगरानी भी प्रभावित : बीईईओ की कमी का असर केवल शैक्षणिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है। विद्यालयों में पेयजल, शौचालय, भवन की मरम्मत और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति की नियमित समीक्षा भी प्रभावित हो रही है। इसके अलावा मध्याह्न भोजन, छात्रवृत्ति, पाठ्य-पुस्तक वितरण, पोशाक योजना सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी में भी परेशानी हो रही है।अधिकारियों के पास कई प्रखंडों का अतिरिक्त प्रभार होने के कारण योजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा और विद्यालयों से फीडबैक लेने में भी कठिनाई आ रही है। इसका असर योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर पड़ने की आशंका है। जिले की शिक्षा व्यवस्था इन दिनों अधिकारियों की कमी से प्रभावित हो रही है। जिले में संचालित 3147 सरकारी विद्यालयों की निगरानी महज तीन प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (बीईईओ) के भरोसे चल रही है। गिरिडीह सदर प्रखंड का अतिरिक्त प्रभार जिला शिक्षा अधीक्षक के पास है। वहीं जिले के 10 प्रखंडों में बीईईओ का पद लंबे समय से रिक्त है। ऐसे में अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे अधिकारियों पर काम का दबाव बढ़ गया है।वर्तमान में बगोदर, बेंगाबाद और गांवा प्रखंड में ही बीईईओ की नियमित तैनाती है। बगोदर के बीईईओ रंजीत कुमार चौधरी को बिरनी, सरिया और धनवार का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। बेंगाबाद के बीईईओ अशोक कुमार को डुमरी, पीरटांड़ और गांडेय का अतिरिक्त प्रभार मिला हुआ है। वहीं गांवा के बीईईओ तितुलाल मंडल जमुआ, देवरी और तिसरी प्रखंड का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं। गिरिडीह सदर प्रखंड का प्रभार जिला शिक्षा अधीक्षक आशीष कुमार हेम्ब्रम के पास है। निरीक्षण प्रभावित, विद्यालयों की व्यवस्था पर असर बीईईओ की कमी का सीधा असर विद्यालयों की नियमित निगरानी पर पड़ रहा है। अतिरिक्त प्रभार के कारण अधिकारी सभी प्रखंडों के विद्यालयों तक नियमित रूप से नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे शिक्षकों की उपस्थिति, कक्षा संचालन, पठन-पाठन की गुणवत्ता और विद्यालयों में अनुशासन की नियमित समीक्षा प्रभावित हो रही है।ग्रामीण क्षेत्रों के कई विद्यालयों में समय पर कक्षाएं संचालित नहीं होने और शैक्षणिक गतिविधियों में अपेक्षित गति नहीं होने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। नियमित निरीक्षण और फीडबैक का तंत्र कमजोर होने से ऐसी शिकायतों पर समय पर कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। योजनाओं की निगरानी भी प्रभावित : बीईईओ की कमी का असर केवल शैक्षणिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है। विद्यालयों में पेयजल, शौचालय, भवन की मरम्मत और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति की नियमित समीक्षा भी प्रभावित हो रही है। इसके अलावा मध्याह्न भोजन, छात्रवृत्ति, पाठ्य-पुस्तक वितरण, पोशाक योजना सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी में भी परेशानी हो रही है।अधिकारियों के पास कई प्रखंडों का अतिरिक्त प्रभार होने के कारण योजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा और विद्यालयों से फीडबैक लेने में भी कठिनाई आ रही है। इसका असर योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर पड़ने की आशंका है।  

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