Allahabad High Court ने जब्त XUV के दुरुपयोग और सड़क हादसे की DGP जांच के दिए आदेश

Allahabad High Court ने जब्त XUV के दुरुपयोग और सड़क हादसे की DGP जांच के दिए आदेश

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को गोपनीय एवं स्वतंत्र जांच करने का आदेश दिया है कि शराब तस्करी के मामले में जब्त महिंद्रा एक्सयूवी को पुलिस थाने से निकालकर दबिश के लिए कैसे ले जाया गया और बाद में इस वाहन से हुई दुर्घटना में एक महिला की मौत कैसे हुई। न्यायमूर्ति अनिल कुमार ने डीजीपी को आठ सप्ताह के भीतर जांच पूरी कर अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। अदालत ने इस बात पर भी कड़ी आपत्ति जताई कि पुलिस विभाग ने गलती करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ केवल उनके सेवा अभिलेख में निंदा प्रविष्टि दर्ज कर विभागीय कार्रवाई समाप्त कर दी।

वाहन स्वामी की ओर से जब्ती को चुनौती देते हुए दायर याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि जब्ती के आदेश में कोई कानूनी खामी नहीं थी। हालांकि, बुलंदशहर के रामघाट थाने के पुलिस अधिकारियों द्वारा जब्त वाहन को लापरवाही से संभाले जाने से गंभीर प्रशासनिक खामियां सामने आईं। अदालत ने 22 सितंबर के अपने आदेश में कहा, ‘‘कथित गलत आचरण की गंभीरता और वाहन के अनधिकृत इस्तेमाल के परिणाम पर बिना किसी स्पष्ट विचार के केवल निंदा प्रविष्टि की सजा देना प्रथम दृष्टया पूरी तरह अपर्याप्त प्रतीत होता है।’’
मामले के अनुसार, एक्सयूवी से कथित तौर पर अवैध शराब की 19 पेटियां बरामद होने के बाद रामघाट पुलिस ने 16 अप्रैल 2021 को वाहन जब्त किया था।

जब्ती की कार्यवाही बुलंदशहर के जिलाधिकारी के समक्ष लंबित थी, तभी चार जून 2021 को वाहन को थाने से निकालकर ले जाया गया। सरकारी अधिवक्ता ने अदालत में स्वीकार किया कि हेड मोहर्रिर सीताराम ने दो कांस्टेबलों-पंकज राणा और नरेंद्र सिंह-के साथ कथित मिलीभगत कर जब्त वाहन को एक वांछित आरोपी को पकड़ने के लिए दबिश देने के उद्देश्य से सौंप दिया। यह काम कथित तौर पर तत्कालीन थाना प्रभारी (एसएचओ) वीरेंद्र सिंह की जानकारी के बिना किया गया था।

तीन दिन बाद, सात जून 2021 को इस वाहन की मथुरा के राया क्षेत्र में दुर्घटना हो गई। हादसे में मनोज कुमार के माता-पिता गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उनकी मां की मृत्यु हो गई। मथुरा पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज की और वाहन को फिर से जब्त कर लिया।

जब उच्च न्यायालय ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी मांगी तो पता चला कि बुलंदशहर के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने हेड मोहर्रिर और दोनों कांस्टेबलों के खिलाफ केवल निंदा प्रविष्टि दर्ज कर विभागीय कार्यवाही समाप्त कर दी थी। अदालत ने कहा कि यह घटना कोई सामान्य प्रक्रियागत चूक नहीं थी, बल्कि इसमें जब्त वाहन को बिना अनुमति हटाना और उसका इस्तेमाल करना शामिल था। इसी आचरण के दौरान वाहन एक जानलेवा दुर्घटना का शिकार हुआ।

पीठ ने डीजीपी को यह भी जांच करने का निर्देश दिया कि क्या संबंधित पुलिसकर्मियों के आचरण के लिए चोरी, आपराधिक गबन या आपराधिक विश्वासघात जैसे आपराधिक आरोप लगाए जा सकते हैं। जांच के दायरे में तत्कालीन एसएचओ और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की ओर से पर्यवेक्षण में हुई चूक को भी शामिल किया गया है।

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