ahmedabad: ऐतिहासिक पोल, हवेलियों और स्थापत्य से लेकर लोककला, परंपरागत जीवनशैली और जीवंत सांस्कृतिक विरासत तक… अहमदाबाद की समृद्ध धरोहर को अब देश-विदेश के 30 युवा करीब से जानेंगे और उसके संरक्षण में अपनी भूमिका निभाएंगे। अहमदाबाद महानगरपालिका (मनपा) और एलिक्सिर फाउंडेशन के संयुक्त आयोजन में वर्ल्ड हेरिटेज वालंटियर्स प्रोग्राम का आठवां संस्करण शनिवार से 5 अक्टूबर तक आयोजित होगा। दस दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम में युवा केवल विरासत स्थलों का भ्रमण नहीं करेंगे, बल्कि संरक्षण, दस्तावेजीकरण और जनजागरूकता से जुड़ी व्यावहारिक गतिविधियों में भी भाग लेंगे।
कार्यक्रम में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, अहमदाबाद वर्ल्ड हेरिटेज सिटी ट्रस्ट और जीएलएस यूनिवर्सिटी सहभागी संस्थाओं के रूप में जुड़ी हैं। वर्ष 2008 में शुरू हुई वर्ल्ड हेरिटेज वालंटियर्स पहल का उद्देश्य दुनिया भर के युवाओं को विश्व विरासत स्थलों के संरक्षण से जोड़ना है। इसके तहत विभिन्न विरासत स्थलों पर एक्शन कैंप आयोजित किए जाते हैं, जहां युवा विशेषज्ञों, संस्थाओं और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर विरासत संरक्षण की दिशा में काम करते हैं।
सिर्फ स्मारक नहीं, पूरी जीवनशैली समझेंगे
कार्यक्रम के दौरान मॉन्यूमेंट एवं हेरिटेज स्टडी विजिट, संरक्षण की व्यावहारिक गतिविधियां, हेरिटेज अवेयरनेस कैंपेन, कम्युनिटी एंगेजमेंट, तकनीकी दस्तावेजीकरण, अकादमिक सत्र और विशेषज्ञों के साथ संवाद होंगे। सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी कार्यक्रम का हिस्सा रहेंगी। वालंटियर्स अहमदाबाद की मूर्त और अमूर्त दोनों तरह की विरासत को समझेंगे। इस दौरान उन्हें शहर के ऐतिहासिक स्वरूप के साथ यहां की परंपराओं, संस्कृति और समुदाय से जुड़ी विरासत को जानने का अवसर मिलेगा।
82 विश्व विरासत स्थलों पर 87 कैंप
वर्ष 2026 में अप्रैल से दिसंबर के बीच दुनिया के 82 विश्व विरासत स्थलों पर 87 एक्शन कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें भारत के पहले विश्व विरासत शहर अहमदाबाद को भी महत्वपूर्ण मेजबान शहर के रूप में चुना गया है। कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को विरासत के महत्व से परिचित कराने के साथ उनमें इसके संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता की भावना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। दस दिनों के दौरान वालंटियर्स विशेषज्ञों और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर यह समझेंगे कि किसी शहर की विरासत केवल ऐतिहासिक इमारतों तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसकी परंपराएं, जीवनशैली, कला और सामुदायिक स्मृतियां भी उसकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

